श्रीलंका के लिए संकटमोचक बना भारत.... राष्ट्रपति अनुरा ने PM मोदी को कहा 'थैंक्यू', 38,000 टन ईंधन की भेजी थी खेप
मिडिल-ईस्ट युद्ध के चलते वैश्विक ईंधन संकट गहराया है, जिससे श्रीलंका भी प्रभावित हुआ. भारत ने मदद करते हुए 38,000 मीट्रिक टन ईंधन भेजा. राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर का आभार जताया.
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मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर साफ दिखाई देने लगा है. कई देशों में ईंधन संकट गहराता जा रहा है और इसी कड़ी में श्रीलंका भी गंभीर स्थिति से जूझ रहा है. लेकिन एक बार फिर भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए आगे बढ़कर दोस्ती और जिम्मेदारी का मजबूत उदाहरण पेश किया है.
भारत ने भेजी आपातकालीन ईंधन खेप
भारत ने श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन ईंधन की आपातकालीन खेप भेजी है. इस खेप में 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है. यह खेप शनिवार को कोलंबो पहुंची, जिससे देश में बढ़ती तेल की किल्लत को कुछ हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. खास बात यह है कि यह सप्लाई इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की स्थानीय इकाई लंका IOC के जरिए भेजी गई है.
राष्ट्रपति ने जताया भारत का आभार
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'कुछ दिन पहले उन्होंने ईंधन संकट को लेकर पीएम मोदी से बात की थी और भारत की त्वरित सहायता के लिए वे बेहद आभारी हैं. उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस समन्वय के लिए धन्यवाद दिया.'
Spoke with PM @narendramodi a few days ago about the fuel supply disruptions Sri Lanka is facing due to the Middle East conflict. Grateful for India’s swift support. 38,000 MT of fuel arrived in Colombo yesterday. My thanks also to EAM @DrSJaishankar for his close coordination.
— Anura Kumara Dissanayake (@anuradisanayake) March 29, 2026
आपूर्ति में बाधा के बाद भारत से मदद
दरअसल, श्रीलंका को मिडिल-ईस्ट और सिंगापुर से ईंधन आपूर्ति में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. ऐसे में लंका IOC ने भारत से मदद मांगी, जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए भारत ने राहत पहुंचाई. यह कदम दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों और सहयोग की भावना को भी बताता है.
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बताते चलें कि ईंधन संकट से निपटने के लिए श्रीलंका सरकार पहले से ही कई कदम उठा रही है. 15 मार्च से देश में ईंधन का कोटा लागू किया गया है ताकि जमाखोरी और लंबी कतारों को रोका जा सके. कई जगहों पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की गई है. हालांकि, राहत की बात यह है कि ऊर्जा मंत्रालय ने दावा किया है कि देश में अब मई के अंत तक के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है. भारत की इस मदद ने न केवल श्रीलंका को तत्काल राहत दी है, बल्कि यह भी साबित किया है कि मुश्किल वक्त में पड़ोसी देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं.
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