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इस राज्य में विवाह के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन, राज्य सरकार लाने जा रही है नया कानून, जानिए क्यों लागू किया यह नियम

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा प्रदेश में बाल विवाह को रोकने पर कड़े कदम उठाने जा रहे हैं. खबरों के मुताबिक राज्य सरकार अब सभी तरह के सामाजिक विवाहों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने जा रही है. एक आंकड़े के मुताबिक, त्रिपुरा देश का तीसरा ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा बाल विवाह हो रहे हैं.

इस राज्य में विवाह के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन, राज्य सरकार लाने जा रही है नया कानून, जानिए क्यों लागू किया यह नियम
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देश में त्रिपुरा एक ऐसा राज्य होने जा रहा है, जहां पर किसी भी तरह की शादी के लिए अब रजिस्ट्रेशन कराना होगा. सरकार द्वारा इस कानून को लागू करने के पीछे प्रदेश में बाल विवाह को रोकना बताया जा रहा है. बता दें कि हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री माणिक साहा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बाल विवाह के खिलाफ उठाए गए कदम को लेकर पुरस्कार भी मिला है. ऐसे में इस बात की पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि यह नियम जल्द ही लागू हो सकता है. 

बाल विवाह रोकने के लिए त्रिपुरा सरकार का बड़ा कदम 

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा प्रदेश में बाल विवाह को रोकने पर कड़े कदम उठाने जा रहे हैं. खबरों के मुताबिक, राज्य सरकार अब सभी तरह के सामाजिक विवाहों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने जा रही है. एक आंकड़े के मुताबिक, त्रिपुरा देश का तीसरा ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा बाल विवाह हो रहे हैं. सामाजिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के 2020 के आंकड़ों के अनुसार बाल विवाह के मामले में पश्चिम बंगाल नंबर 1, बिहार दूसरे और त्रिपुरा तीसरे स्थान पर है.  

इस कानून पर क्या बोले त्रिपुरा सीएम?

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इस कानून के लागू होने से पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गांधीग्राम में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'सरकार सामाजिक विवाहों के लिए प्री-मैरिज रजिस्ट्रेशन लागू करके बाल विवाह को रोकने पर विचार कर रही है. इसके लिए आवश्यक कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा. कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र जमा करना होगा और बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य होगा. दरअसल, विवाह पंजीकरण के लिए जब बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा, तो उस दौरान लड़का और लड़की दोनों की उम्र अपने आप सामने आ जाएगी. इससे बाल विवाह रोकने में बड़ी मदद मिलेगी. 

मौजूदा समय में क्या है कानून?

मुख्यमंत्री ने आगे यह भी बताया कि 'मौजूदा कानून के अनुसार, सामाजिक विवाह के लिए लड़कियों की शादी के लिए उम्र 18 वर्ष और लड़कों की शादी के लिए 21 वर्ष होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में इस नियम को लागू करने के पीछे का मकसद बाल विवाह को रोकना और लोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है.'

त्रिपुरा सीएम राष्ट्रपति से हो चुके हैं सम्मानित 

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हाल ही में अपने राज्य में एक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़की को बाल विवाह के खिलाफ विरोध करने के लिए मुख्यमंत्री माणिक साहा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पुरस्कार भी मिल चुका है. राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाकर खुश माणिक साहा ने कहा कि 'दूसरों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. उस दौरान उन्होंने नशीली दवाओं के व्यापार पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ प्रमुख लोग आर्थिक लाभ के लिए इस कारोबार में शामिल हैं.' इस दौरान उन्होंने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि 'चंद पैसों के लिए कुछ लोग नशीली दवाओं के व्यापार में लिप्त हैं, लेकिन यह ध्यान रखें कि कानून के शिकंजे में आने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.' 

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