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नेहरू के दस्तावेज मामले में केंद्रीय मंत्री ने तथ्यों के साथ 'गांधी परिवार' को दिया दो टूक जवाब, कहा- कोई भी कागजात गायब नहीं

नेहरू से जुड़े दस्तावेजों को लेकर उठे विवाद पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय से कोई कागजात गायब नहीं हुए हैं. संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2008 में सोनिया गांधी के प्रतिनिधि के अनुरोध पर नेहरू के निजी पत्र और नोट्स के 51 कार्टन उन्हें सौंपे गए थे.

नेहरू के दस्तावेज मामले में केंद्रीय मंत्री ने तथ्यों के साथ 'गांधी परिवार' को दिया दो टूक जवाब, कहा- कोई भी कागजात गायब नहीं
Gajendra Singh Shekhawat/ Sonia Gandhi (File Photo)
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देश की राजनीति में इन दिनों भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़े दस्तावेजों को लेकर चर्चा तेज है. कांग्रेस पार्टी द्वारा माफी की मांग किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने साफ़ शब्दों में कहा है कि नेहरू से संबंधित कोई भी दस्तावेज प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) से गायब नहीं हुए हैं. संस्कृति मंत्रालय ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी सार्वजनिक किया है.

सोनिया गांधी की सौंपे गए थे कागजात: मंत्रालय 

मंत्रालय के अनुसार, यह मामला साल 2008 से जुड़ा है. 29 अप्रैल 2008 को सोनिया गांधी के प्रतिनिधि एमवी राजन ने सरकार को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में नेहरू के निजी पारिवारिक पत्रों और नोट्स को वापस लेने का अनुरोध किया गया था. इसके बाद उसी वर्ष सरकार ने नेहरू से जुड़े निजी कागजातों के कुल 51 कार्टन सोनिया गांधी को सौंप दिए थे. यह प्रक्रिया आधिकारिक सहमति और दस्तावेजी संवाद के तहत पूरी की गई थी. संस्कृति मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि PMML लगातार इन दस्तावेजों की वापसी के लिए सोनिया गांधी के कार्यालय के संपर्क में रहा है. मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2025 और जुलाई 2025 में भी इस विषय को लेकर औपचारिक पत्राचार किया गया. इससे यह साफ होता है कि सरकार इन दस्तावेजों को लेकर पारदर्शी रही है और कोई जानकारी छुपाई नहीं गई.

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केंद्रीय मंत्री ने दी प्रतिक्रिया 

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि नेहरू के दस्तावेज गायब नहीं हैं, बल्कि उनकी वर्तमान स्थिति सरकार को पता है. उन्होंने सोनिया गांधी से सवाल किया कि देश को यह बताया जाना चाहिए कि इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज सार्वजनिक आर्काइव्स में क्यों नहीं लौटाए गए. उनका कहना था कि ये सिर्फ निजी पारिवारिक कागज नहीं, बल्कि देश की राष्ट्रीय धरोहर हैं. यह विवाद उस समय और गहराया जब लोकसभा में बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने सवाल उठाया कि क्या PMML के 2025 के सालाना ऑडिट में नेहरू से जुड़े कोई दस्तावेज गायब पाए गए हैं. इसके जवाब में मंत्री शेखावत ने दो टूक कहा कि कोई भी दस्तावेज गायब नहीं हैं और कागजात 2008 में ही परिवार द्वारा वापस ले लिए गए थे.

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बताते चलें कि कांग्रेस पार्टी ने इसके बाद केंद्र सरकार से माफी की मांग की, लेकिन सरकार ने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. केंद्र का कहना है कि देश को पूरा सच जानने का अधिकार है और इतिहास से जुड़े ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. यह मामला अब केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर और सार्वजनिक हित की बहस का केंद्र बन गया है.

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