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'अगर हम चुप रहे, तो 20 साल बाद कोई अज्ञात ग्रुप झंडा फहराएगा...', स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लैंड जिहाद पर दहाड़े हिमंत बिस्वा सरमा, कहा - यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है

79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर असम के मुख्यमंत्री ने लैंड जिहाद पर जमकर दहाड़ लगाई. उन्होंने कहा कि 'अगर हम अभी चुप रहे, तो आने वाले 20 साल बाद कोई अज्ञात ग्रुप यहां झंडा फहराएगा.'

'अगर हम चुप रहे, तो 20 साल बाद कोई अज्ञात ग्रुप झंडा फहराएगा...', स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लैंड जिहाद पर दहाड़े हिमंत बिस्वा सरमा, कहा - यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर प्रदेशवासियों को एक कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर असमिया के लोग ऐसे ही चुप रहे, तो आने वाले 20 साल बाद इस प्रदेश में कोई 'अज्ञात समूह' मुख्यमंत्री बनकर झंडा फहराएगा. हालांकि, उनके इस बयान को बांग्ला भाषा से जोड़कर देखा जा रहा है, खासतौर से इसे मुस्लिम समुदाय के संदर्भ में जोड़ा जा रहा है. असम के मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से भी घुसपैठियों को लेकर एक संदेश लिखा है.'

'अगर हम सभी अभी कार्रवाई नहीं करते हैं'

सोशल मीडिया पोस्ट X के जरिए सरमा ने लिखा कि 'अगर हम सभी अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो कुछ ही वर्षों में असम की जनसांख्यिकी इस तरह बदल जाएगी कि मुख्यमंत्री भी घुसपैठियों के समुदाय से होगा.'

'1.2 लाख बीघा भूमि अतिक्रमण मुक्त'

असम के मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए कहा कि '1.2 लाख बीघा करीब 16,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को हमने अतिक्रमण मुक्त कर दिया है. लव जिहाद की तरह अब एक वर्ग भूमि जिहाद में लिप्त होकर असमिया पहचान को खतरे में डालने की कोशिश कर रहा है. बेदखली अभियान के माध्यम से हमने यह संदेश दिया है कि हमारी सरकार इससे कभी भी समझौता नहीं करेगी.'

बांग्ला भाषा मुसलमानों पर इशारों-इशारों में बोला हमला

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सरमा ने आगे कहा कि 'अज्ञात लोगों की आक्रामकता ने निचले और मध्य असम की जनसांख्यिकी को बदल दिया है. उसके बाद उन सभी की नजर ऊपरी व उत्तरी असम पर पड़ी. उन्हें रोकने के लिए हमने आक्रमण के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है. मैं वादा करता हूं, हम चरागाहों, आदिवासी इलाकों, सरकारी जमीन के हर टुकड़े से अज्ञात लोगों को बेदखल करेंगे.' 

'यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है'

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मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है. यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है. अगर हम इस तरह से ही चुप रहे, तो अगले एक दशक में हमारी पहचान, हमारी जमीन और वह सब कुछ हम खो देंगे जो हमें असमिया बनाता है.' उन्होंने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए पिछले 78 वर्षों में अवैध घुसपैठ को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया. सरमा ने यह भी कहा कि अब आबादी केवल 60% रह गई है. निचले और मध्य असम में जनसांख्यिकी में भारी बदलाव आया है. 

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