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हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, पहली कक्षा में एडमिशन के लिए उम्र सीमा तय

Haryana: हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और सरकारी-निजी स्कूलों को इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. स्कूलों से कहा गया है कि वे अपने एडमिशन नोटिस और सूचना बोर्ड पर नई उम्र सीमा को साफ-साफ लिखें, ताकि अभिभावकों को समय रहते सही जानकारी मिल सके.

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19 Jan 2026
( Updated: 19 Jan 2026
07:58 AM )
हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, पहली कक्षा में एडमिशन के लिए उम्र सीमा तय
Image Source: Social Media
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Haryana School Admission Rules: हरियाणा सरकार ने स्कूली शिक्षा से जुड़ा एक बहुत अहम फैसला लिया है, जिसका सीधा असर पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों और उनके माता-पिता पर पड़ेगा. राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब शैक्षणिक सत्र 2026–27 से कक्षा 1 में एडमिशन के लिए बच्चे की न्यूनतम उम्र 6 साल होना अनिवार्य होगा. यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के नियमों के अनुसार बनाने के लिए लिया गया है, ताकि पूरे देश में पढ़ाई का ढांचा एक जैसा हो सके.

अब 5.5 साल के बच्चों को नहीं मिलेगा एडमिशन


नए आदेश के मुताबिक जो बच्चे 6 साल की उम्र पूरी नहीं करते हैं, उन्हें पहली कक्षा में दाखिला नहीं दिया जाएगा. यानी अब तक जिन बच्चों को 5 साल 6 महीने की उम्र में कक्षा 1 में एडमिशन मिल जाता था, वह व्यवस्था अब खत्म हो जाएगी. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि उम्र को लेकर किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी. यह नियम सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा.

क्यों बदला गया एडमिशन का नियम


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पहले हरियाणा शिक्षा नियमावली 2011 के तहत 5 साल 6 महीने के बच्चों को भी कक्षा 1 में दाखिला मिल जाता था। लेकिन केंद्र सरकार लंबे समय से सभी राज्यों को यह निर्देश दे रही थी कि पहली कक्षा में एडमिशन के लिए न्यूनतम उम्र 6 साल तय की जाए. इसी के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) भी यही कहती है कि बच्चे पहले तीन साल प्री-स्कूल या बालवाटिका में पढ़ें और उसके बाद ही कक्षा 1 में जाएं.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 6 साल की उम्र में बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से पढ़ाई को बेहतर तरीके से समझ पाता है. इससे बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम होता है और वे धीरे-धीरे सीखने की प्रक्रिया में आगे बढ़ते हैं.

हाई कोर्ट के आदेश से मिली साफ दिशा


इस फैसले के पीछे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का आदेश भी एक बड़ी वजह है. ‘दिविशा यादव बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में कोर्ट ने कहा था कि राज्य के शिक्षा नियम केंद्र सरकार के कानूनों और नीतियों के अनुरूप होने चाहिए. कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने उम्र सीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है, ताकि भविष्य में एडमिशन को लेकर कोई भ्रम या विवाद न हो.

अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा


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इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन माता-पिता पर पड़ेगा जो अपने बच्चों को जल्दी स्कूल भेजना चाहते थे. अब जिन बच्चों की उम्र 6 साल पूरी नहीं होगी, उन्हें बालवाटिका या प्री-स्कूल में ही पढ़ना होगा. सरकार का मानना है कि एक ही उम्र के बच्चों के साथ पढ़ाई करने से बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होगा और उन पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा. साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि 2026–27 से उम्र सीमा में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी.

स्कूलों को सख्त निर्देश


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हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और सरकारी-निजी स्कूलों को इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. स्कूलों से कहा गया है कि वे अपने एडमिशन नोटिस और सूचना बोर्ड पर नई उम्र सीमा को साफ-साफ लिखें, ताकि अभिभावकों को समय रहते सही जानकारी मिल सके.

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