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महाराष्ट्र में आई देवा भाऊ की सरकार, बदल गई पूरी तस्वीर…कर्तव्य पथ पर दिखे गणपति बप्पा, अष्टविनायक मंदिर वाली झांकी को देख झूमे लोग

कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में महाराष्ट्र की झांकी ने ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ विषय को प्रदर्शित किया, जिसमें समुदाय-आधारित उत्सवों, स्वदेशी शिल्प कौशल और राज्य की सांस्कृतिक पहचान में निहित आत्मनिर्भरता की भावना को उभारकर दिखाया गया.

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26 Jan 2026
( Updated: 26 Jan 2026
11:52 AM )
महाराष्ट्र में आई देवा भाऊ की सरकार, बदल गई पूरी तस्वीर…कर्तव्य पथ पर दिखे गणपति बप्पा, अष्टविनायक मंदिर वाली झांकी को देख झूमे लोग
Republic Day Parade (Screengrab)
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देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित रिपब्लिक डे परेड में भारत की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता के अलावा आज़ादी के बाद से अब तक हुई निरंतर प्रगति की झलक देखने को मिली. इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर विभिन्न राज्यों की अपनी-अपनी झांकियां भी देखने को मिलीं, जिनमें अलग-अलग विषयों, धरोहरों और राजकीय पहचानों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया. इसी कड़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज की भूमि महाराष्ट्र की झांकी भी देखने को मिली, जहां गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए आधुनिकता और परंपरा के सुंदर समन्वय के रूप में प्रस्तुत किया गया.

झांकी के दोनों ओर पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं के एक दल ने ‘लेझिम’ लोकनृत्य का प्रदर्शन किया. महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का सामुदायिक आयोजन लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1893 में शुरू किया था, ताकि ब्रिटिश शासन के खिलाफ लोगों को संगठित किया जा सके और एकता व आत्मनिर्भरता का संदेश दिया जा सके.

आपको बता दें कि कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में महाराष्ट्र की झांकी ने ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ विषय को प्रदर्शित किया, जिसमें समुदाय-आधारित उत्सवों, स्वदेशी शिल्प कौशल और राज्य की सांस्कृतिक पहचान में निहित आत्मनिर्भरता की भावना को उभारकर दिखाया गया. इस झांकी में आत्मनिर्भरता के विषय को आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया.

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झांकी के अग्रभाग में गणेशोत्सव से जुड़े पारंपरिक ढोल बजाती एक महिला को दर्शाया गया. मध्य भाग में एक गणेश भक्त को भगवान गणेश की मूर्ति को सिर पर लेकर विसर्जन के लिए जाते हुए दिखाया गया, जबकि पीछे के हिस्से में एक मूर्तिकार को भगवान गणेश की मूर्ति बनाते हुए प्रदर्शित किया गया. झांकी के अंतिम हिस्से में महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों का प्रतिनिधित्व करती एक भव्य मंदिर आकृति की झलक दिखाई गई.

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महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत के साथ महायुति सरकार बनने के बाद राज्य में सनातन संस्कृति को लेकर सोच में एक बार फिर बदलाव देखने को मिला है. एक समय ऐसा भी था जब शिवाजी महाराज और हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व राजनीति के गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों पर हमले हुए, पालघर में साधुओं की नृशंस हत्या जैसी घटनाएं सामने आईं और यहां तक कि शिवसेना भी सेक्युलर राजनीति की ओर झुकती दिखी. हालांकि मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में इसका करारा जवाब दिया और आज कर्तव्य पथ पर महाराष्ट्र की झांकी ने यह दिखा दिया कि पूरी तस्वीर ही बदल चुकी है.

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां निकाली गईं. इनमें 17 झांकियां विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की थीं, जबकि 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं की रहीं. इस वर्ष झांकियों की व्यापक थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई थी.

 

अनेक झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया. साथ ही आत्मनिर्भरता के आधार पर देश की प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, विरासत, नवाचार और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया. राज्यों की झांकियों की बात करें तो असम की झांकी ‘आशारिकांडी: असम का टेराकोटा शिल्प ग्राम’ को दर्शाती है. छत्तीसगढ़ की झांकी ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित रही. गुजरात की झांकी में ‘स्वदेशी का मंत्र: आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता– वंदे मातरम्’ को प्रदर्शित किया गया.

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हिमाचल प्रदेश की झांकी में ‘देव भूमि, वीर भूमि’ की झलक दिखाई गई. जम्मू-कश्मीर की झांकी हस्तशिल्प और लोकनृत्य को समर्पित रही. केरल की झांकी ‘वॉटर मेट्रो एवं 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता: आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल’ विषय पर केंद्रित थी. महाराष्ट्र की झांकी में ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ दिखाया गया. मणिपुर की झांकी ‘समृद्धि की ओर: कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक’ थीम पर आधारित रही. नागालैंड की झांकी में ‘हॉर्नबिल महोत्सव: संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता का उत्सव’ को दर्शाया गया.

ओडिशा की झांकी में ‘मिट्टी से सिलिकॉन तक: परंपरा में निहित, नवाचार के साथ उन्नति’ को प्रस्तुत किया गया. पुडुचेरी की झांकी में शिल्प, संस्कृति की समृद्ध विरासत और ऑरोविल विजन को दर्शाया गया. राजस्थान की झांकी ‘मरुस्थल का स्वर्णिम स्पर्श: बीकानेर स्वर्ण कला’ पर आधारित रही. तमिलनाडु की झांकी में ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ की झलक दिखाई दी.

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उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित किया गया, जबकि पश्चिम बंगाल की झांकी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की भूमिका को रेखांकित किया. मध्य प्रदेश की झांकी पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर पर आधारित रही और पंजाब की झांकी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350 वर्ष को समर्पित रही.

मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं की झांकियों की बात करें तो वायु सेना मुख्यालय ने ‘पूर्व सैनिक झांकी: युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ को प्रस्तुत किया. नौसेना की झांकी में ‘समुद्र से समृद्धि’ को दर्शाया गया. सैन्य कार्य विभाग की त्रि-सेवा झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता से विजय’ को प्रदर्शित किया गया. संस्कृति मंत्रालय की झांकी में ‘वंदे मातरम्: राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ को दिखाया गया.

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वहीं, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की ओर अग्रसर भारतीय स्कूली शिक्षा’ विषय पर आधारित झांकी प्रस्तुत की.

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गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस परेड 2026 की ये झांकियां भारत की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक गौरव, नवाचार, आत्मनिर्भरता और विकासशील दृष्टिकोण को एक सशक्त और प्रेरणादायक रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करती नजर आईं.

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