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उमर खालिद-शरजील इमाम को फिर नहीं मिली बेल, अब इस दिन होगी सुनवाई, जानें सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

उमर खालिद की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि, वह दंगों के वक्त दिल्ली में था ही नहीं.

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31 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
12:31 AM )
उमर खालिद-शरजील इमाम को फिर नहीं मिली बेल, अब इस दिन होगी सुनवाई, जानें सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
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5 साल 5 महीने से जेल में बंद दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. हालांकि जमानत का रास्ता अभी भी साफ नहीं हो सका है. दोनों ओर से दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को सोमवार 3 नवंबर तक के लिए टाल दिया है. 

उमर खालिद, शरजील इमाम के साथ दिल्ली दंगों के साथ-साथ दंगों के आरोपी मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान और मुहम्मद सलीम खान की बेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट की ओर से सोमवार तक का टाइम दिए जाने के बाद सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू ने एक दिन का और समय मांगा. हालांकि, जस्टिस अरविंद कुमार ने इससे साफ इंकार कर दिया. उन्होंने ASG राजू से कहा, ‘नहीं नहीं, हमें फ्रेस सुनवाई करनी है. आप अपने साथियों मौजूद रहने के लिए कहें. हम देखते हैं, क्या कर सकते हैं.’ 

3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का पहला मैटर होगा 

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जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि, ‘इस केस को सोमवार के लिए लिस्ट किया जाए, वो भी कोर्ट का पहला मैटर.’ यानी 3 नवंबर को दिल्ली दंगों के आरोपियों की बेल पर सुनवाई कोर्ट का पहला केस होगा.

उमर खालिद के पक्ष में कपिल सिब्बल ने क्या दलील दी? 

दिल्ली दंगे के सभी आरोपियों के लिए अलग-अलग वकील कोर्ट में पेश हुए. शरजील इमाम की पैरवी सिद्धार्थ दवे कर रहे थे. जबकि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने उमर खालिद के लिए दलीलें दीं. 

कपिल सिब्बल ने खालिद के पक्ष में दलील देते हुए कहा, उन्होंने 17 फरवरी को अमरावती में भाषण दिया था और इसी आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया कि उमर खालिद इस सब के लिए ज़िम्मेदार है. उसने हिंसा के बारे में कुछ नहीं कहा और यह एक सार्वजनिक भाषण है. जिसमें गांधीवादी सिद्धांतों की बात की गई है. तीन आरोपियों, जिनमें 2 महिलाएं और एक आसिफ इकबाल तन्हा, को हाई कोर्ट ने नियमित जमानत दी और सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा. समानता के आधार पर इस पर भी फैसला किया जा सकता है.

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दंगों के वक्त कहां था उमर खालिद? 

कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कहा कि, जब दिल्ली मे दंगे हुए उस समय उमर खालिद दिल्ली में नहीं था. उमर खालिद के खिलाफ आरोप साजिश का है. 751 एफ़आईआर हैं, उमर खालिद पर एक में आरोप है कि उसने दंगों की साज़िश रची थी. लेकिन जिन तारीखों को दंगे हुए, उन तारीखों को उमर खालिद दिल्ली में नहीं था और न ही उसके पास से कोई पैसा, कोई हथियार बरामद हुए और न ही हिंसा से जुड़े कोई साक्ष्य मिले. किसी गवाह का बयान भी नहीं मिला, जो उमर खालिद को वास्तव में किसी हिंसा से जोड़ता हो. याचिकाकर्ता दंगों के समय दिल्ली में था ही नहीं. तो दंगों को इससे कैसे जोड़ा जा सकता है? 

शरजील इमाम पर सिद्धार्थ दवे ने क्या दलील दी? 

वहीं, शरजील इमाम के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट में दलीलें दीं. उन्होंने शरजील के पक्ष में कोर्ट में कहा कि, पुलिस को अपनी जांच पूरी करने में 3 साल लग गए. शरजील के जिन भाषणों को आधार बनाया गया है वह दंगों से 2 महीने पहले के हैं. दवे ने कहा कि शरजील का दंगों से ऐसा कोई प्रत्यक्ष या निकट संबंध नहीं है जिससे पता चले कि हिंसा उसी ने हिंसा भड़काई है. 

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कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने क्या कहा? 

दिल्ली दंगों की आरोपी गुलफिशा फातिमा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी कर रहे थे. गुलफिशा अप्रैल 2020 से जेल में है. इस पर सिंघवी ने कहा कि मुख्य आरोपपत्र 16 सितंबर, 2020 को दायर किया गया था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने हर साल पूरक आरोपपत्र दायर करना एक वार्षिक चलन बना लिया है. उन्होंने कहा कि फातिमा की जमानत याचिका पर विचार करने में अत्यधिक देरी हुई है, जिसे 2020 से 90 से अधिक बार सूचीबद्ध किया गया है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, आरोप है कि गुलफिशा पिंजरा तोड़ वुमेन ग्रुप का हिस्सा हैं. फिर सीक्रेट मीटिंग के आरोप लाए गए, लेकिन इस मामले में दूसरी आरोपियों देवांगना और नताशा को भी जमानत मिल गई है. उन्होंनेे कहा, 'मेरे मुअक्किल के खिलाफ आरोप यह है कि उसने धरना स्थल स्थापित किया था, लेकिन इनमें से किसी भी धरना स्थल पर कोई हिंसा की घटना नहीं हुई. जिन भी स्थलों पर वो मौजूद थी, वहां किसी के पास मिर्च पाउडर, तेजाब जैैसी सामग्री होने का कोई सबूत नहीं मिला.' 

दिल्ली पुलिस ने किया जमानत का विरोध 

कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया. पुलिस का कहना है कि, आरोपियों के खिलाफ मजबूत दस्तावेजी और तकनीकी सबूत हैं, जो साबित करते हैं कि उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर पूरे देश में दंगे भड़काने की योजना बनाई थी. पुलिस के हलफनामे के अनुसार, उमर खालिद और उनके साथियों ने साजिश रची, उसे बढ़ावा दिया और उसे अमल में लाया. इसका मकसद सांप्रदायिक सद्भाव को तोड़कर देश की संप्रभुता और एकता पर हमला करना था. पुलिस ने उन पर भीड़ को उकसाने और विद्रोह के लिए भड़काने का आरोपी माना. 

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हाईकोर्ट ने खारिज की थी जमानत 

दिल्ली दंगों के सभी आरोपियों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी. इससे पहले हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम समेत 9 लोगों की बेल खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि, विरोध प्रदर्शनों की आड़ में 'षड्यंत्रकारी' तरीके से हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती. 

दिल्ली में कब हुए थे दंगे? 

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फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में दंगे भड़क गए थे. CAA-NRC विरोधी प्रदर्शनों के बीच ये हिंसा भड़की थी. जिसमें 53 लोग मारे गए. जबकि कई घायल हो गए. हिंसा में कई वाहनों, घर और दुकानों को भी नुकसान पहुंचाया गया था. सितंबर 2020 में उमर खालिद को हिंसा भड़काने के आरोप में अरेस्ट किया गया था. फिलहाल दोनों ओर से मिलीं दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता सेे लेेते हुए 3 नवंबर के लिए पहले नंबर पर इस मैटर को लिस्टेड कर दिया है. 

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