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भारत में डेथ वैली जैसी गर्मी का खतरा! बाबा वेंगा की भविष्यवाणी क्या सच हो रही है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

डेथ वैली, अमेरिका के कैलिफोर्निया और नेवादा के बीच स्थित, दुनिया की सबसे गर्म और सबसे शुष्क जगहों में से एक मानी जाती है। यहां का तापमान कभी-कभी 56.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसे धरती का "तंदूर" इसीलिए कहा जाता है क्योंकि यहां की ज़मीन और हवा दोनों आग जैसी गर्म होती हैं। 2025 में जब भारत और पाकिस्तान में इसी तरह की गर्मी की चेतावनी दी जा रही है, तो डेथ वैली का जिक्र फिर सुर्खियों में है।

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16 Apr 2025
( Updated: 16 Apr 2025
02:43 PM )
भारत में डेथ वैली जैसी गर्मी का खतरा! बाबा वेंगा की भविष्यवाणी क्या सच हो रही है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट
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अभी अप्रैल की शुरुआत ही हुई थी कि दिल्ली के आसमान से जैसे आग बरसने लगी. दोपहर के वक्त सड़कों पर सन्नाटा, खाली पड़ी चाय की दुकानें और छांव की तलाश में दर-दर भटकते लोग, और इन सबके बीच सामने आया मौसम विभाग का अलर्ट "भारत और पाकिस्तान में इस बार तापमान अमेरिका की डेथ वैली जितना पहुंच सकता है." अब मौसम विभाग के इस अलर्ट को सामान्य चेतावनी समझना सही नहीं होगा. 

दरअसल डेथ वैली धरती का सबसे गर्म और जानलेवा इलाका मानी जाती है. वहां का तापमान 56 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है. और अब ऐसी ही गर्मी की लपटें भारत की ओर बढ़ रही हैं.

समय से पहले गर्मी का हमला

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, देश के कई हिस्सों में तापमान औसत से 5 से 7 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है. दिल्ली में अप्रैल के शुरुआती हफ्तों में ही पारा तीन बार 40 डिग्री के पार चला गया. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दिन में बाहर निकलना जैसे किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं लग रहा. राजस्थान के चुरु जिले से एक चौकाने वाली खबर आई वहां 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, और अस्पतालों में लू से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 

पाकिस्तान भी झुलस रहा है

गर्मी का कहर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. पाकिस्तान पहले ही गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है, और अब ऊपर से इस भीषण गर्मी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. पाक मौसम विभाग ने 14 से 18 अप्रैल के बीच 8 डिग्री अधिक तापमान की चेतावनी जारी की है. बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में पारा 49 डिग्री सेल्सियस (120°F) तक पहुंचने की संभावना है यह सामान्य मानवीय सहनशीलता की सीमा से परे है. वहां 16-16 घंटे बिजली कटौती की खबरें आ रही हैं. न पीने का पानी है, न ठंडी हवा. गरीब तबका त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है.

बाबा वेंगा की भविष्यवाणी क्या होगी सच?

अब इस पूरे हालात के बीच जो सबसे रहस्यमयी बात सामने आ रही है, वो है बुल्गारिया की भविष्यवक्ता बाबा वेंगा की वो भविष्यवाणी जिसमें उन्होंने 2025 के आसपास "दुनिया में एक विकराल गर्मी की लहर" की बात कही थी, जो "मनुष्य के धैर्य और विज्ञान की सीमा की परीक्षा लेगी." बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां पहले भी कई बार सच साबित हुई हैं चाहे 9/11 हमला हो, या कोरोना जैसी महामारी. अब, जब मौसम वैज्ञानिक डेथ वैली जैसी गर्मी की चेतावनी दे रहे हैं, लोग सोचने लगे हैं क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी सच में सच होने जा रही है?

डेथ वैली धरती का तंदूर

डेथ वैली, अमेरिका के कैलिफोर्निया और नेवादा के बीच स्थित, दुनिया की सबसे गर्म और सबसे शुष्क जगहों में से एक मानी जाती है. यहां का तापमान कभी-कभी 56.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. इसे धरती का "तंदूर" भी कहा जाता है, और वो इसलिए क्योंकि यहां की ज़मीन और हवा दोनों आग जैसी गर्म होती हैं. इसी वजह से आज तक यह दुनिया का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड बना हुआ है. और अब भारत-पाकिस्तान का तापमान भी 47 से 50 डिग्री तक पहुंचने की आशंका है. मतलब साफ है यह अब सामान्य गर्मी नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा बन सकती है.

गर्मी से कैसे जूझ रहे हैं लोग?
उत्तर भारत के कई हिस्सों में स्कूलों का समय बदला जा चुका है, और कई राज्यों ने हीट वेव अलर्ट जारी कर दिए हैं. गांवों में लोग दिन के वक्त घरों से बाहर नहीं निकल रहे, और शहरों में AC और कूलर की मांग आसमान छू रही है. हालात इतने खराब हैं कि अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या रोज़ाना बढ़ रही है. प्रदूषण, ग्लोबल वॉर्मिंग और पेड़ों की कटाई ने इस गर्मी को और जानलेवा बना दिया है.

उधर, निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों को दिन के वक्त काम करना नामुमकिन लग रहा है, जिससे निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है.
ऊर्जा की मांग भी बढ़ेगी, और इससे बिजली की दरें बढ़ने की संभावना है.

जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग अब सिर्फ भविष्य की चेतावनी नहीं रही, वो हमारे वर्तमान का सच बन चुकी है. अगर अभी भी हम कार्बन उत्सर्जन, पेड़ कटाई, और अनियंत्रित औद्योगिक विकास को नहीं रोकते, तो 2025 की गर्मी केवल एक ट्रेलर साबित होगी.

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