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चंद्रबाबू नायडू ने एक ही बयान से फेल कर दी स्टालिन की हिंदी विरोधी चाल, कहा- नरसिम्हा राव 17 भाषा जानते थे, फिर हिंदी सीखने में...

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक कार्यक्रम में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव हिंदी सहित 17 भाषाओं के जानकार थे. उन्होंने अपने बहुभाषी ज्ञान के बल पर देश और दुनिया में प्रतिष्ठा हासिल की. नायडू ने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंदी जैसी भाषा सीखता है तो इसमें क्या दिक्कत है?

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16 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
06:03 AM )
चंद्रबाबू नायडू ने एक ही बयान से फेल कर दी स्टालिन की हिंदी विरोधी चाल, कहा- नरसिम्हा राव 17 भाषा जानते थे, फिर हिंदी सीखने में...
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हिंदी भाषा को लेकर महाराष्ट्र से लेकर तमिलनाडु तक एक नया विवाद गहराता जा रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में प्रस्तावित तीन भाषा फार्मूले में हिंदी को शामिल किए जाने के положन को लेकर दक्षिणी राज्यों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस नीति का कड़ा विरोध करते हुए इसे द्रविड़ संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान पर हमला बताया. उन्होंने दक्षिण भारत के अन्य राज्यों को इस मुद्दे पर एकजुट करने की कोशिश की, ताकि हिंदी थोपने के कथित प्रयास का विरोध किया जा सके.

हालांकि, उनकी इस रणनीति को झटका तब लगा जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हिंदी को लेकर एक ऐसा बयान दे दिया, जिसने स्टालिन की कोशिशों को कमजोर कर दिया. नायडू ने कहा कि भाषा को राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं और हिंदी सीखने से क्षेत्रीय पहचान कमजोर नहीं होती. उनके इस रुख ने दक्षिण में भाषाई राजनीति को एक नई दिशा दे दी है.

‘हिंदी सीखता है तो इसमें क्या दिक्कत है?’
नायडू ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव हिंदी सहित 17 भाषाओं के जानकार थे. उन्होंने अपने बहुभाषी ज्ञान के बल पर देश और दुनिया में प्रतिष्ठा हासिल की. नायडू ने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंदी जैसी भाषा सीखता है तो इसमें क्या दिक्कत है? यह बयान सीधे तौर पर स्टालिन पर निशाना है, जो हिंदी को दक्षिण पर थोपी जाने वाली भाषा बता रहे हैं.

बता दें कि नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखते थे. वे 1991 में आर्थिक उदारीकरण के जनक के रूप में जाने जाते हैं. वे 17 भाषाओं तेलुगु, हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली, गुजराती, ओडिया, कन्नड़, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी, जर्मन, फारसी और स्पेनिश के जानकार थे. उनकी यह काबिलियत उनकी बौद्धिक क्षमता का प्रतीक थी. नायडू ने इसे एक उदाहरण के तौर पर पेश किया कि भाषा सीखना व्यक्तिगत विकास और राष्ट्रीय एकता का हिस्सा हो सकता है.

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बयान बना क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय बहस का केंद्र
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रमुख सहयोगियों में से एक हैं. उनकी अगुवाई में आंध्र प्रदेश में NDA की सरकार भी सत्ता में है. ऐसे में हिंदी को लेकर दिया गया उनका बयान न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय विमर्श में भी खास महत्व रखता है.

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जहां एक ओर तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य हिंदी थोपने का आरोप लगाकर केंद्र की भाषा नीति का विरोध कर रहे हैं, वहीं नायडू का संतुलित और सकारात्मक रुख केंद्र सरकार की नीतियों को मजबूती देता है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने जहां तीन-भाषा फार्मूले को द्रविड़ पहचान पर खतरा बताया, वहीं नायडू ने इसे व्यक्तिगत पसंद और प्रगति का माध्यम बताते हुए स्टालिन की दलील को कमजोर कर दिया.

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