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गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक और ‘चोरी’ पकड़ी गई! रोबोटिक डॉग के बाद नया दावा भी निकला फर्जी, जानें पूरा मामला

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता दिखाना था. उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. इसके बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘स्क्रैच’ से बने ड्रोन का दावा किया, लेकिन जांच में इसे दक्षिण कोरिया के ‘Striker V3 ARF’ मॉडल जैसा बताया गया. मामले पर विवाद जारी है.

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक और ‘चोरी’ पकड़ी गई! रोबोटिक डॉग के बाद नया दावा भी निकला फर्जी, जानें पूरा मामला
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देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना था. इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों के तकनीकी विशेषज्ञों और कंपनियों ने भाग लिया है. समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. लेकिन इसी मंच पर एक विवाद ने पूरी चर्चा को नया मोड़ दे दिया.

रोबोटिक डॉग पर पहला विवाद

समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोटिक डॉग को अपना स्वदेशी नवाचार बताकर प्रस्तुत किया. बाद में सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि यह उपकरण चीन निर्मित है और बाजार में पहले से उपलब्ध है. आरोप यह भी लगे कि इसे ‘मेक इन इंडिया’ के नाम पर पेश किया गया. विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी को समिट परिसर से हटाए जाने की खबरें सामने आईं.

‘स्क्रैच से बने ड्रोन’ पर दूसरा दावा

विवाद यहीं नहीं रुका. यूनिवर्सिटी की ओर से दावा किया गया कि उनके कैंपस में ‘स्क्रैच’ से एक उन्नत शोकर ड्रोन तैयार किया गया है. प्रोफेसरों ने इसे एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग का उदाहरण बताया. लेकिन टेक विशेषज्ञों की जांच में दावा किया गया कि यह ड्रोन दक्षिण कोरिया की कंपनी हेलसेल द्वारा निर्मित ‘Striker V3 ARF’ मॉडल जैसा है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 40,000 रुपये में उपलब्ध है. सोशल मीडिया पर साझा की गई पड़ताल में कहा गया कि प्रस्तुत ड्रोन एक रेडी-मेड मॉडल हो सकता है, जिसे स्वदेशी नवाचार के रूप में दिखाया गया. हालांकि इन दावों पर यूनिवर्सिटी की ओर से आधिकारिक विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

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सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रियाएं

जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने इसे वैश्विक मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया. वहीं दूसरी ओर विपक्षी स्वर भी तेज हुए और पूरे आयोजन पर सवाल उठाने लगे. आलोचकों का कहना है कि एक संस्थान की कथित गलती को पूरे समिट या भारत की तकनीकी प्रगति से जोड़कर देखना उचित नहीं है.

समिट में अन्य स्वदेशी पहलें भी रहीं केंद्र में

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में 35 हजार से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी बताई गई. कार्यक्रम में कई भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों ने अपने स्वदेशी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर समाधान प्रस्तुत किए. सरकारी सूत्रों के अनुसार 30 से अधिक स्वदेशी AI एप्लिकेशन्स को हाल में मंजूरी दी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य भारत की वास्तविक नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने लाना है.

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बताते चलें कि यह विवाद केवल एक यूनिवर्सिटी तक सीमित है या व्यापक संस्थागत जवाबदेही का विषय है, इस पर चर्चा जारी है. यदि किसी भी मंच पर स्वदेशी नवाचार के नाम पर आयातित तकनीक प्रस्तुत की जाती है तो यह गंभीर नैतिक प्रश्न खड़े करता है. साथ ही यह भी जरूरी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और तथ्य सामने आएं. इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का मूल उद्देश्य भारत को AI क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है. ऐसे में पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक नवाचार ही उस लक्ष्य को मजबूत कर सकते हैं.

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