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अहमदाबाद विमान हादसा: 30 सेकंड में 260 मौतें, फ्यूल कट या साज़िश? शुरुआती रिपोर्ट के बाद अब तीन एंगल से होगी जांच

एअर इंडिया के अहमदाबाद विमान हादसे पर AAIB की 15 पेज की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों फ्यूल स्विच बंद हो गए, जिससे दोनों इंजन भी बंद हो गए. पायलट ने एक इंजन को दोबारा चालू करने की कोशिश की, लेकिन दूसरा इंजन शुरू नहीं हो सका और विमान क्रैश हो गया. कॉकपिट रिकॉर्डिंग में पायलटों के बीच फ्यूल स्विच को लेकर बातचीत भी दर्ज हुई है. अब इस हादसे की जांच तीन एंगल से की जा रही है.

अहमदाबाद विमान हादसा: 30 सेकंड में 260 मौतें, फ्यूल कट या साज़िश? शुरुआती रिपोर्ट के बाद अब तीन एंगल से होगी जांच
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12 जून की सुबह अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरते ही फ्लाइट AI-171 ने उस तबाही की ओर रुख कर लिया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. यह एअर इंडिया का यह बोइंग 787-8 विमान महज कुछ सेकंड के भीतर एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गया. इस भीषण दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 241 यात्री और 19 क्रू सदस्य शामिल थे. इस हादसे में चमत्कार यह रहा कि इस हादसे में एक यात्री किसी तरह से बच निकला. अब इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपनी 15 पेज की शुरुआती रिपोर्ट जारी कर दी है, जो कई चौंकाने वाले खुलासे करती है.

फ्यूल कट की वजह से इंजन फेल होने का खुलासा
AAIB की रिपोर्ट बताती है कि विमान के टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद, एक-एक कर दोनों फ्यूल स्विच बंद हो गए, जिससे विमान के दोनों इंजन ने काम करना बंद कर दिया. पायलटों ने इंजन को रिकवर करने की कोशिश की. एक इंजन थोड़ी देर के लिए चालू भी हुआ, लेकिन दूसरा इंजन शुरू नहीं हो सका. इतनी ऊंचाई नहीं थी कि विमान दोबारा संतुलन बना पाता और नतीजा यह हुआ कि विशालकाय जहाज कुछ ही सेकंड में ज़मीन पर आ गिरा.

कॉकपिट की रिकॉर्डिंग से हुआ बड़ा खुलासा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) ने एक हैरान करने वाली बातचीत दर्ज की. एक पायलट ने दूसरे से पूछा, “क्या तुमने फ्यूल स्विच बंद किया है?” जवाब आया – “नहीं”. यह संवाद इस ओर इशारा करता है कि स्विच मैनुअली बंद नहीं किए गए थे. यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर दोनों फ्यूल स्विच अचानक कैसे बंद हो गए?

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  • हादसे की जांच अब तीन अहम एंगल से होगी
    AAIB ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी. इसलिए जांच तीन अहम एंगल से की जाएगी.
  • क्या किसी टेक्निकल गड़बड़ी की वजह से यह हादसा हुआ? यानी विमान के सिस्टम या इंजन में पहले से कोई खराबी थी या नहीं. इससे तय होगा कि विमान निर्माता बोइंग की कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं.
  • क्या फ्यूल स्विच मैन्युअली कट किए गए थे? इस सवाल के पीछे यह शक भी जुड़ा है कि क्या यह मानवीय गलती थी या जानबूझकर किया गया कोई कृत्य.
  • क्या किसी तीसरे इक्विपमेंट की वजह से फ्यूल सिस्टम में दिक्कत आई, जैसे सेंसर या सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी? इसके लिए अब ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) को भी जांच में शामिल किया जा रहा है.

टेकऑफ से हादसे तक सिर्फ 30 सेकंड
रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ से लेकर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने तक का समय मात्र 30 सेकंड का था. इतनी कम ऊंचाई और समय में पायलट के पास बहुत सीमित विकल्प बचे थे. उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन विमान को संभालना संभव नहीं हो सका. यह समय इतना कम था कि दोनों इंजन को दोबारा चालू करने और थ्रस्ट बनाने का मौका ही नहीं मिला. यही वजह थी कि विमान सीधा इमारत से जा टकराया.

बोइंग और इंजन मैन्युफैक्चरर्स भी रडार पर
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि फिलहाल बोइंग 787-8 विमान या GE GEnx-1B इंजन के खिलाफ किसी चेतावनी या कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है. लेकिन जब तक क्लीन चिट नहीं मिलती, तब तक बोइंग भी जांच के दायरे से बाहर नहीं हो सकता. विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक विमानों में फ्यूल स्विच का अपने आप ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पर शिफ्ट हो जाना लगभग असंभव है, जब तक किसी बाहरी तकनीकी दोष का असर न हो.

नागरिक उड्डयन मंत्री की प्रतिक्रिया
इस हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि यह रिपोर्ट शुरुआती स्तर की है. इसमें किसी भी तथ्य को छिपाया नहीं गया है और जांच पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जा रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही अंतिम रिपोर्ट आएगी, दोषियों की ज़िम्मेदारी तय की जाएगी और आगे की कार्रवाई होगी.

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बताते चलें कि अहमदाबाद विमान हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हवाई सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है. यह उन नियमों और प्रक्रियाओं की सच्चाई दिखाता है, जिन पर हज़ारों ज़िंदगियां हर दिन निर्भर करती हैं. अब जब जांच के कई दरवाज़े खुले हैं, ज़रूरत है पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त फैसलों की, ताकि भविष्य में कोई और फ्लाइट, टेकऑफ के 30 सेकंड के भीतर, इतनी त्रासदी की शिकार न हो.

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