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जेलेंस्की के बाद अब पीएम मोदी को पुतिन का कॉल, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कैसे भारत बना वार्ता की 'अदृश्य शक्ति'

रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए आज 3 साल से अधिक का वक्त हो चुका है. दो देशों की इस लड़ाई में भारत का किरदार अहम हो गया है. रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत अपनी तटस्थ और संतुलित कूटनीति के जरिए एक अदृश्य लेकिन महत्वपूर्ण साझेदार की भूमिका निभाई है. भारत की रूस से कच्चा तेल खरीदने की क्षमता ने नई दिल्ली को इस जंग को प्रभावित करने की आर्थिक ताकत दे दी है.

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20 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:21 AM )
जेलेंस्की के बाद अब पीएम मोदी को पुतिन का कॉल, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कैसे भारत बना वार्ता की 'अदृश्य शक्ति'
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भारत प्रत्यक्ष रूप से भले ही इस युद्ध को प्रभावित नहीं कर रहा है लेकिन अमेरिका और यूरोप कहते हैं कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर रूस के वॉर मशीन की फंडिंग कर रहा है. इसके अलावा रूस और यूक्रेन दोनों पक्षों के साथ भारत के मजबूत संबंध, उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक मंचों पर संवाद व शांति की वकालत ने इसे इस संघर्ष में एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है.

जेलेंस्की-पुतिन ने पीएम मोदी को किया फोन 

अलास्का में पुतिन और ट्रंप के बीच बहुप्रतिक्षित मुलाकात ने रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने में उत्प्रेरक का काम किया है. इस मुलाकात के बाद ही व्हाइट हाउस में ट्रंप की जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ मुलाकात की पृष्ठभूमि तैयार हुई. अलास्का से लौटते ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को फोन लगाया और इस वार्ता में प्रगति की जानकारी दी. इस दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रयासों का समर्थन करने की बात कही. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा की और निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई.

11 अगस्त 2025 को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पीएम मोदी से बात की और रूसी हमलों, विशेष रूप से ज़ापोरिज़िया पर बमबारी, की जानकारी दी. उन्होंने रूस के तेल निर्यात पर प्रतिबंध की आवश्यकता बताई ताकि युद्ध के लिए उसकी वित्तीय क्षमता कम हो. जेलेंस्की ने भारत के शांति प्रयासों की सराहना की और सितंबर में UNGA में मुलाकात की इच्छा बताई.

भारत के पास ऑयल डिप्लोमेसी के विस्तार का मौका 

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रूस-यूक्रेन युद्ध ने भारत को अपनी ऑयल डिप्लोमेसी को विस्तार करने का मौका दिया है. क्योंकि यह आर्थिक और भू-राजनीतिक रूप से रूस के लिए महत्वपूर्ण है. साथ ही भारत की तटस्थ कूटनीति को मजबूती देता है. 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस को तेल निर्यात के लिए नए बाजार चाहिए थे. भारत ने इस अवसर का लाभ उठाया और रियायती दरों पर रूसी तेल का आयात बढ़ाया. 2023 में भारत ने रूस से 25% कच्चा तेल आयात किया. पिछले साल भारत ने अरबों डॉलर का कच्चा तेल रूस से खरीदा. भारत की ये खरीद उसके घरेलू ऑयल बाजार को स्थिर रखने में तो सहायक रही ही इससे रूस को भी अपनी अर्थव्यवस्था को भी स्थिर रखने का मौका मिला. इससे भारत रूस के लिए एक विश्वसनीय आर्थिक साझेदार बना. रूसी तेल खरीदने की नीति ने भारत को आर्थिक लाभ (सस्ता तेल) और रूस के साथ रणनीतिक साख दी, जिससे वह पश्चिमी दबाव के बावजूद मध्यस्थ की भूमिका निभा सका. पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत की तटस्थता की नीति ने रूस का विश्वास जीतने में रोल निभाया. अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर भारत के खिलाफ कई बार खुलेआम नाराजगी जताई और भारत पर हैवी टैरिफ लगाने की धमकी दी. अमेरिका ने भारत पर टैरिफ की दर 50 फीसदी कर दी बावजूद इसके भारत ने रूस के साथ व्यापार जारी रखा. इससे भारत और रूस की विश्वस्त और भरोसेमंद दोस्ती की बुनियाद और भी मजबूत हुई. रूस का तेल खरीदने के बावजूद भारत ने कभी युद्ध की पैरवी नहीं की. 

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पीएम मोदी ने इस जंग को लेकर बार बार कहा कि आज की दुनिया में मसलों को संवाद से सुलझाया जाना चाहिए. 2022 में उज्बेकिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी ने पुतिन से कहा, "यह युद्ध का समय नहीं है." पीएम मोदी के इस बयान ने भारत की रणनीतिक साख को मजबूत बनाया. भारत की तटस्थता और रणनीतिक स्वायत्तता ने उसे दोनों पक्षों रूस और यूक्रेन के साथ विश्वास बनाए रखने में सक्षम बनाया. यही वजह है कि जेलेंस्की को भारत के नेतृत्व पर भरोसा है और वे बार-बार इस जंग में भारत से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते रहते हैं. 23 अगस्त 2024 को अपनी यूक्रेन यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति और कूटनीति पर जोर दिया. कीव में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ मुलाकात में मोदी ने कहा कि भारत युद्ध की समाप्ति और दोनों देशों के बीच संवाद के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान दोहराया और मानवीय सहायता की घोषणा की. मोदी ने रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता में भारत की मध्यस्थता की पेशकश की. जेलेंस्की ने भारत के इस कदम को सराहनीय बताया. यही वजह रही कि यूक्रेन इस जंग की समाप्ति में भारत के सकारात्मक रोल को देखता है.

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