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'एक देश के भेष में सौदागर...', US के टैरिफ वॉर पर राजनाथ सिंह का करारा जवाब, ट्रंप को सुनाई खरी-खरी, कहा- दबाव में भी चट्टान है भारत

‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ की तर्ज पर ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया. अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अमेरिका को एक बार फिर करारा जवाब दिया है. उन्होंने साफ कहा कि, हमारी रणनीति और आत्मनिर्भरता ग्लोबल दबाव के बावजूद अडिग है और हमेशा स्थिर रही है.

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30 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:28 AM )
'एक देश के भेष में सौदागर...', US के टैरिफ वॉर पर राजनाथ सिंह का करारा जवाब, ट्रंप को सुनाई खरी-खरी, कहा- दबाव में भी चट्टान है भारत
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एक के बाद एक भारत पर टैरिफ लगाकर दोनों देशों के रिश्ते में कड़वाहट घोल दी है. ट्रंप की कोशिश भारत को दबाव में लेने की थी, ताकि भारत दूसरे देशों से व्यापारिक रिश्तों न बढ़ाए, लेकिन भारत ने भी बता दिया कि वह किसी भी हालात में झुकने के मुड में नहीं है. ये ही वजह है कि ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ की तर्ज पर ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया. अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अमेरिका को एक बार फिर करारा जवाब दिया है. उन्होंने साफ कहा कि, हमारी रणनीति और आत्मनिर्भरता ग्लोबल दबाव के बावजूद अडिग है और यह स्थिर रही है. दरअसल, राजनाथ सिंह NDTV के डिफेंस समिट में शामिल हुए थे. यहां उन्होंने बढ़ते ट्रेड वॉर पर भारत के स्टैंड को खुलकर सामने रखा. साथ-साथ अमेरिका का बिना नाम लिए निशाना भी साधा. 

‘देश के भेष में सौदागर’

ट्रेड वॉर पर जवाब देने के लिए राजनाथ सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी का उदाहरण दिया. उन्होंने एंग्लो-आयरिश दार्शनिक एडमंड बर्क का जिक्र करते हुए कहा कि, किसी समय एडमंड बर्क ने ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में कहा था-  A state in the disguise of a merchant यानी सौदागर के भेष में एक देश. आज के समय में स्टेट व्यापारी की तरह बर्ताव कर रहा है. राजनाथ सिंह ने एडमंड बर्क के इस कोट में थोड़ा बदलाव करते हुए कहा, A merchant in the disguise of a state यानी एक देश के भेष में सौदागर बन गया है. उन्होंने कहा, 
इस दुनिया में उथल-पुथल चल रही है. एक तरह का संरक्षणवाद विकिसित कहे जाने वाले देश की तरफ से देखने को मिल रहा है. ट्रेड वॉर और टैरिफ वॉर की स्थिति गंभीर होती जा रही है. 

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‘सिद्धांतों से समझौता नहीं’

राजनाथ सिंह ने पीएम मोदी की बात को दोहराते हुए कहा कि, हम कभी भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं करेंगे. कोई भी देश जब आगे बढ़ता है तो कुछ देशों के साथ उसके विचार मिलते हैं. वहीं कुछ देशों के साथ उसके विचार नहीं भी मिलते हैं. जिनके साथ विचार मिलते हैं, उन्हें आमतौर पर फ्रेंडली देश समझा जाता है. जिनसे विचार नहीं मिलते हैं, उन्हें विरोधी समझा जाता है लेकिन कोई भी देश भारत का दुश्मन नहीं है. राजनाथ सिंह ने कहा, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संबंध में यह चर्चित तौर पर कहा जाता है कि इसमें कोई स्थायी शत्रु या मित्र नहीं, केवल स्थायी हित होते हैं. 

भारत किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता, लेकिन हमारे लिए अपने लोगों का, अपने किसानों का, अपने छोटे व्यापारियों का, अपने देशवासियों का हित सबसे ऊपर है. किसी भी कीमत पर इसको लेकर समझौता नहीं किया जाएगा. चाहे कितना भी दबाव डाला जाए, भारत इन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा. 

'चट्टान की तरह खड़ा भारत'
रक्षा मंत्री ने भारत की तुलना चट्टान से की और देश को अडिग बताया. उन्होंने कहा, भूगोल में पढ़ाया जाता है कि चट्टान पर जितना दबाव पड़ता है, वह उतनी ही मजबूत होती है. मुझे लग रहा है भारत पर जितना दवाब डाला जाएगा, भारत उतनी ही मजबूत चट्टान के तौर पर सामने आएगा. हमारी रणनीति और आत्मनिर्भरता किसी भी ग्लोबल दबाव के बावजूद अडिग है और यह स्थिर रही है.

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‘डिफेंस की मजबूती आत्मनिर्भरता की ताकत’
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए आत्मनिर्भर भारत की ताक़त बताई. उन्होंने कहा, आज की शिफ्टिंग जियो पॉलिटिक्स ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में डिफेंस सेक्टर में दूसरे पर निर्भर रहना कोई विकल्प नहीं है. हमारी इकॉनमी और हमारी सिक्यॉरिटी, दोनों के लिए आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है. पीएम नरेंद्र मोदी का भी यही विजन है. सरकार के हर फैसले में आत्मनिर्भरता का विजन है. भारत की सेनाओं ने कुछ ही महीने पहले दुनिया के सामने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है.

इससे पहले भी रक्षा मंत्री ने इशारों-इशारों में अमेरका पर टैरिफ़ को लेकर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था, कुछ लोग खुद को दुनिया का बॉस समझते हैं, उन्हें भारत का विकास पसंद नहीं आ रहा है, कई लोग कोशिश कर रहे हैं कि भारत में बनी चीजें, भारतीयों के हाथों से बनी चीजें उन देशों में बनी चीजों से ज्यादा महंगी हो जाएं. 

टैरिफ पर अमेरिका में ही क्यों घिर गए ट्रंप? 

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टैरिफ को लेकर ट्रंप की मनमानी खुद अमेरिका भी परेशान है. अमेरिकियों को इसमें फ़ायदा कम नुक़सान ज़्यादा दिख रहा है. यहां तक कि अमेरिका की एक कोर्ट ने भी टैरिफ पर ट्रंप को फटकार लगाई है. कोर्ट ने ट्रंप के ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी बताया है. कोर्ट का कहना है कि ट्रम्प ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए जिस कानून का सहारा लिया, वह यह अधिकार नहीं देता. ट्रम्प के पास हर आयात पर टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति नहीं है. ट्रम्प ने कोर्ट के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ये टैरिफ हटे, तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा. ट्रंप कुछ भी कहें लेकिन कोर्ट की इस टिप्पणी ने उनकी ट्रेड पॉलिसी पर एक लकीर ज़रूर खींच दी. 

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