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रूह अफजा की बड़ी जीत! सुप्रीम कोर्ट ने ‘हमदर्द’ के पक्ष में सुनाया फैसला, जानिए क्या था पूरा मामला?

कई साल से रूह अफजा पेय जल को लेकर चल रहे विवाद पर अब ब्रेक लग गया है. सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि यह केवल ‘शरबत’ नहीं बल्कि एक ‘फ्रूट ड्रिंक’ है.

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26 Feb 2026
( Updated: 26 Feb 2026
11:25 AM )
रूह अफजा की बड़ी जीत! सुप्रीम कोर्ट ने ‘हमदर्द’ के पक्ष में सुनाया फैसला, जानिए क्या था पूरा मामला?
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रूह अफजा का नाम सुनते ही शरीर में ताज़गी की लहर दौड़ जाती है. यह एक ऐसा पेय है जिसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं, और गर्मी की दस्तक होते ही यह हर घर की पहली पसंद बन जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रूह अफजा वास्तव में एक 'फ्रूट ड्रिंक' है या 'शरबत'? सुनने में यह सवाल भले ही साधारण या बेतुका लगे, लेकिन इस परिभाषा को लेकर कानूनी गलियारों में एक लंबी बहस चल रही है. हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मशहूर ड्रिंक पर वर्षों से चले आ रहे टैक्स विवाद को सुलझाते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रूह अफजा को केवल 'शरबत' मानकर ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में नहीं डाला जा सकता. सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि टैक्स कानूनों के तहत रूह अफजा एक फ्रूट ड्रिंक है.

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, अदालत में बहस का असली मुद्दा यह था कि 'रूह अफजा’ को किस श्रेणी में रखा जाए. हमदर्द कंपनी का तर्क था कि चूंकि इसमें 10 प्रतिशत फलों का रस, हर्बल अर्क और शुगर सिरप मिला होता है, इसलिए इसे 'फ्रूट ड्रिंक' माना जाना चाहिए. पूरी बहस इसी बात पर टिकी थी कि क्या इसे कानूनी रूप से एक फ्रूट ड्रिंक घोषित किया जा सकता है या नहीं.

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विवाद हुआ खत्म

रुक अफजा पर लगने वाले टैक्स को लेकर विवाद अब खत्म हो गया है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के टैक्स अधिकारियों और इलाहाबाद हाई कोर्ट का तर्क था कि रूह अफजा ‘सामान्य शरबत’ है, इसलिए इस पर 12.5% की दर से VAT लगना चाहिए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट जस्टिस बी.वी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस पुराने फैसले को पलट दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और टैक्स अधिकारियों के 2018 के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिसमें रूह अफजा को उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स (UPVAT) एक्ट के तहत 12.5 फीसदी टैक्सेबल अनक्लासिफाइड आइटम के तौर पर लेबल किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रूह अफजा को केवल इसलिए ज्यादा टैक्स वाले ब्रैकेट में नहीं डाला जा सकता क्योंकि इसे शरबत के तौर पर बेचा जाता है. आदालत ने पाया कि इस ड्रिंक को फलों से ही बनाया जाता है इसे सिर्फ डाइल्यूट करने के लिए पानी में मिलाया जाता है.

रूह अफजा को क्यों माना गया ‘फ्रूट ड्रिंक’?

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कोर्ट ने माना कि रूह अफ़ज़ा में 10% फलों का रस जैसे अनानास और संतरा का हर्बल अर्क होता है. चूंकि यह फल-आधारित उत्पाद है और इसे पानी में मिलाकर पिया जाता है, इसलिए कानूनी तौर पर इसे 'फ्रूट ड्रिंक' या 'प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट' की श्रेणी में रखा गया है.  

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