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590 करोड़ की गड़बड़ी, हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला, दो बैंकों पर ट्रांजैक्शन बंद

Haryana: सभी विभागों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने इन बैंकों में मौजूद पैसे निकालकर दूसरे अधिकृत बैंकों में ट्रांसफर करें. सरकार ने साफ कहा है कि जब तक कोई नई सूचना नहीं आती, इन दोनों बैंकों में कोई भी सरकारी पैसा जमा या निवेश नहीं किया जाएगा.

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23 Feb 2026
( Updated: 23 Feb 2026
11:17 AM )
590 करोड़ की गड़बड़ी, हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला, दो बैंकों पर ट्रांजैक्शन बंद
Image Source: Social Media
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Haryana: हरियाणा सरकार ने हाल ही में 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के बाद बहुत बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने तुरंत IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से बाहर कर दिया है. इसका मतलब है कि अब इन बैंकों के जरिए कोई भी सरकारी लेनदेन नहीं होगा. सभी विभागों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने इन बैंकों में मौजूद पैसे निकालकर दूसरे अधिकृत बैंकों में ट्रांसफर करें. सरकार ने साफ कहा है कि जब तक कोई नई सूचना नहीं आती, इन दोनों बैंकों में कोई भी सरकारी पैसा जमा या निवेश नहीं किया जाएगा.

विभागों और पीएसयू को तुरंत कार्रवाई का निर्देश

हरियाणा सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और पीएसयू को तुरंत अपने खातों की समीक्षा करने और शेष राशि को दूसरे बैंकों में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य खातों का मासिक मिलान करना अनिवार्य कर दिया गया है. सरकार ने तय किया है कि 31 मार्च 2026 तक सभी खातों का मिलान पूरा होना चाहिए और 4 अप्रैल 2026 तक प्रमाणित रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी.

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590 करोड़ की गड़बड़ी कैसे सामने आई

दरअसल, IDFC फर्स्ट बैंक ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में यह खुलासा किया कि चंडीगढ़ शाखा के जरिए सरकार से जुड़े कुछ खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई है.  बैंक के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुछ कर्मचारियों ने बिना अनुमति के लेनदेन किए. यह मामला तब सामने आया जब एक सरकारी विभाग ने अपना खाता बंद कर दूसरे बैंक में पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश की और बैलेंस में अंतर दिखा.

बैंक और अधिकारियों की कार्रवाई

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बैंक ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल कुछ सरकारी खातों तक ही सीमित दिख रहा है और अन्य ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ा है. मामले की जांच पूरी होने तक चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही बैंक ने संबंधित खातों में शेष राशि पर रोक लगाने के लिए रिकॉल नोटिस भेजा और फॉरेंसिक ऑडिट के लिए स्वतंत्र एजेंसी को नियुक्त किया. वैधानिक ऑडिटरों को भी इस मामले की जानकारी दी गई है.

वित्त विभाग ने गड़बड़ी की वजहें बताईं

हरियाणा के वित्त विभाग ने यह भी पाया कि कई मामलों में जो रकम उच्च ब्याज वाले फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा करनी थी, उसे बचत खाते में ही रखा गया. इससे सरकार को कम ब्याज मिला और वित्तीय नुकसान हुआ. अब सरकार ने सभी विभागों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें, नियमित निगरानी रखें और किसी भी गड़बड़ी की तुरंत सूचना दें.

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आगे की जांच और सरकार का कदम

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इस पूरे मामले ने सरकारी धन प्रबंधन और बैंकिंग निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से पता चलेगा कि असली जिम्मेदार कौन है और कितनी राशि की रिकवरी हो सकती है. फिलहाल, सरकार ने एहतियातन दोनों बैंकों के साथ सभी सरकारी लेनदेन पर रोक लगा दी है.

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