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'12 निर्दोष लोगों के 18 साल बर्बाद...', मुंबई लोकल धमाके के आरोपियों पर ओवैसी का बयान, कहा - उन्होंने कभी अपराध ही नहीं किया

मुंबई लोकल धमाके मामले में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पुलिस प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि 'यह सिस्टम का फेलियर है. जिन 12 निर्दोषों को सजा सुनाई गई थी, उन्होंने अपने जीवन के 18 साल उस गुनाह की सजा काटते हुए निकाल दिए, जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था.'

'12 निर्दोष लोगों के 18 साल बर्बाद...', मुंबई लोकल धमाके के आरोपियों पर ओवैसी का बयान, कहा - उन्होंने कभी अपराध ही नहीं किया
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साल 2006 में हुए मुंबई लोकल आतंकी घटना में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी कर दिया. सोमवार 21 जुलाई को कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर देश भर में माहौल गर्मा गया है. इस पर लगातार पार्टी नेताओं और आम लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. ऐसे में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने आरोपियों को बरी करने पर सिस्टम को फेलियर बताया है. इसके अलावा 12 दोषियों को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उन्होंने कोई अपराध ही नहीं किया. इससे पहले हाई कोर्ट ने मामले के 12 आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रिहा करने के फैसले पर कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा.

'उन्होंने कभी गुनाह ही नहीं किया'

मुंबई लोकल धमाके मामले में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि 'यह सिस्टम का फेलियर है. जिन 12 निर्दोषों को सजा सुनाई गई थी, उन्होंने अपने जीवन के 18 साल उस गुनाह की सजा काटते हुए निकाल दिए, जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था.' इसके अलावा उन्होंने मीडिया पर भी अलग से ट्रायल चलाने और आरोपियों को पहले से ही दोषी घोषित करने का आरोप लगाया. 

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'180 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया'

ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि '180 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, कई घायल हुए, लेकिन उनके लिए कोई राहत नहीं. ऐसे मामलों में जहां जनाक्रोश होता है, पुलिस का तरीका हमेशा पहले दोष मान लेना होता है. मीडिया मामले को जिस तरह से कवर करता है, वह एक तरह से व्यक्ति के अपराध का फैसला करता है.'

ATS अधिकारियों पर भी उठाए सवाल 

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हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने मामले की जांच करने वाले ATS अधिकारियों की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 'कृपया याद रखें कि 2006 में महाराष्ट्र में कौन सी पार्टियां शासन कर रही थीं. वे यातना की शिकायतों को नजर अंदाज करने के लिए भी जिम्मेदार हैं.'

हाई कोर्ट ने 12 आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया

इससे पहले आज सुबह बॉम्बे हाई कोर्ट ने  साल 2006 मुंबई लोकल ट्रेन में दिल दहला देने वाली आतंकी घटना पर बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा है कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है. इस फैसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस अनिल किलोर और श्याम चांडक की पीठ ने फैसला सुनाया. 

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क्या है पूरा मामला?

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बता दें कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 11 जुलाई 2006 को 11 मिनट के अंदर 7 ब्लास्ट हुए थे. जिसमें 189 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें 827 लोग घायल हुए थे. इस मामले में ATS ने कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. वहीं 15 आरोपी फरार बताए गए थे. इनमें कुछ के पाकिस्तान में होने की आशंका जताई गई थी. उसके बाद साल 2015 में निचली अदालत ने इस ब्लास्ट मामले में 12 लोगों को दोषी ठहराया, जिसमें 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद की सजा दी गई थी. इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार ने 5 आरोपियों की फांसी के कंफर्मेशन के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद आरोपियों ने भी सजा के खिलाफ याचिका दायर की थी. 

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