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उत्तराखंड के इस मंदिर में जाते ही श्रद्धालुओं के आंख की रोशनी क्यों चली जाती है ? जानिए मंदिर का रहस्य

उत्तराखंड में वैसे तो कई सारे मंदिर हैं जहां दुनिया भर से श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड की हसीन वादियों के बीच एक ऐसा मंदिर भी है जिसमें भक्तों का जाना वर्जित है, यहां तक कि इस मंदिर में पुजारी भी सिर्फ साल में एक बार ही जा सकता है.

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01 Jun 2025
( Updated: 10 Dec 2025
09:05 PM )
उत्तराखंड के इस मंदिर में जाते ही श्रद्धालुओं के आंख की रोशनी क्यों चली जाती है ? जानिए मंदिर का रहस्य
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धार्मिक स्थलों वाला, तीर्थों वाला, उत्तराखंड,जो अपनी हसीन वादियों को लेकर पूरी दुनिया में फेमस है. यहां कई ऐसे मंदिर हैं जो कई हजार साल पुराने हैं, जैसे कि टपकेश्वर महादेव मंदिर, जो कि 6 हजार साल पुराना है, तुंगनाथ मंदिर 1,000 साल पुराना है, तक्षक नाग मंदिर, और भी कई ऐसे मंदिर हैं जो सदियों पुराने हैं. लेकिन आज हम जिस मंदिर के बारे में आपको बताने वाले हैं. उस मंदिर में भक्तों का जाना वर्जित है, यहां तक कि इस मंदिर के कपाट भी आम दिनों में नहीं खुलते, ऐसा कहा जाता है .मंदिर के गर्भगृह में जाते ही भक्त अंधे हो जाते हैं, क्या है इस मंदिर का सच  इस रिपोर्ट में जानते हैं.

अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और अद्भुत परंपराओं के लिए विख्यात ये मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है, ये मंदिर लाटू देवता के नाम से जाना जाता है. ये इतना रहस्यमयी है कि इस मंदिर में पूजा करने वाला पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करता है और रोजाना भी इस मंदिर के कपाट नहीं खुलते।
तो चलिए एक एक कर आपको सभी जानकारी के बारे में बताते हैं लेकिन उससे पहले लाटू देवता के बारे में जान लेते हैं. 

कौन हैं लाटू देवता ?
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मान्यता है कि लाटू देवता उत्तराखंड की आराध्य, देवी नंदा के भाई हैं, देवी नंदा जिन्हें माता पार्वती का भी रूप माना जाता है.
जब मां नंदा का विवाह हुआ था. तब उनके भाई लाटू उन्हें कैलाश पर्वत पर विदा करने गए थे, लेकिन जब उन्हें यात्रा के दौरान प्यास लगी तो उन्होंने एक कुटिया में रखे दो घड़ों से मदिरा का पान कर लिया, जिसके बाद वो बेहद ही उग्र होकर उत्पात मचाने लगे तो मां नंदा ने क्रोधित होकर उन्हें वाणा गांव में बंद रहने का श्राप दे दिया.
हालांकि बाद में लाटू देवता ने जब मां नंदा से क्षमा मांगी तो माता ने उन्हें वचन देते हुए कहा कि तुम वाणा गांव में पूजे जाओगे लेकिन कोई भी तुम्हें सीधे नहीं देख सकेगा. उसके बाद से ही यहां एक मंदिर बना, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये मंदिर पूरे एक साल में एक बार खुलता है और वो दिन होता है वैशाख पूर्णिमा का, जिसमें भी सिर्फ एक ही व्यक्ति को मंदिर के गर्भगृह में जाने की अनुमति होती है.
लेकिन जब भी पुजारी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है तो वो भी आंखों पर पट्टी और मुंह पर कपड़ा बांध लेता है.
अब वो ऐसा क्यों करते हैं तो सुनिए दरअसल ये लोग सदियों पुरानी परंपरा का पालन करते हैं लेकिन इस परंपरा के पीछे भी एक रहस्य छिपा है.
कहा जाता है कि इस मंदिर में नागराज अपनी मणि के साथ विराजते हैं, इस मणि की रोशनी इतनी तेज है कि अगर किसी व्यक्ति की आंख पर ये रोशनी पड़ जाए तो वो अंधा हो सकता है. 
इसलिए इस मंदिर में आम लोग नहीं जाते हैं और न ही किसी भी व्यक्ति को नियमित रूप से जाने की इजाजत है.
वहीं लाटू देवता का ये रहस्यमयी मंदिर ही नहीं बल्कि लोगों की आस्था का भी केंद्र है.


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