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भारत के शंकराचार्य ने किनके जीवन को ख़तरे में बताया ?

अबकी बार देश के शंकराचार्य ने अपनी सांकेतिक भविष्यवाणी से ऐसे लोगों का भविष्य बता दिया है, जिसका जीवन ख़तरे में रहेगा। यानी की 2025 से किनके सिर पर मौत मंडराने लगेगी, इसको लेकर गोवर्धन मठ पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया, उनके के बयाने के अब कई मायने निकाले जा रहे हैं, इस पर देखिये हमारी ये ख़ास रिपोर्ट।

भारत के शंकराचार्य ने किनके जीवन को ख़तरे में बताया ?
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नये साल से एक नई शुरुआत होने को है, बस कुछ ही दिनों का समय बचा है। 2024 की विदाई के साथ ही 2025 का श्री गणेश हो जाएगा, यूँ तो आने वाले कल को लेकर आम से ख़ास हर कोई ख़ुद के बारे में जानने की उत्सुकता रखता है, ये जानने की कोशिश करता है, कि आने वाला समय उसके लिए कैसा रहेगा, जिसके लिए ज्योतिषाचार्यों का दरवाज़ा खटखटाया जाता है लेकिन अबकी बार देश के शंकराचार्य ने अपनी सांकेतिक भविष्यवाणी से ऐसे लोगों का भविष्य बता दिया है, जिसका जीवन ख़तरे में रहेगा। यानी की 2025 से किनके सिर पर मौत मंडराने लगेगी, इसको लेकर गोवर्धन मठ पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया, उनके के बयाने के अब कई मायने निकाले जा रहे हैं, इस पर देखिये हमारी ये ख़ास रिपोर्ट। 

देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कह गये मैं अपने को सनातनी हिंदू कहता हूँ, क्योंकि मैं वेदों, उपनिषदों , पुराणों, हिंदू धर्मग्रंर्थों के नाम से प्रचलित साहित्य में विश्वास रखता हूँ और अवतारों और पुनर्जन्म में भी। डॉ डेटगेवार ने कहा हिंदू संस्कृति, हिंदुस्तान की धड़कन है, इसलिए ये साफ़ है कि अगर हिंदुस्तान की सुरक्षा करनी है, तो पहले हमें हिंदू संस्कृति को संवारना होगा। सावरकर ने सनातन पर बताया। हिंदुत्व हर भारतीय का एक समावेशी शब्द है, सनातन सभ्यता ही हिंदुओं की सभ्यता और संस्कृति है।यहाँ कर की विवेकानंद बोले है। मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूँ, जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ़ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि , हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं।

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सनातन पर देश की इन महान विभूतियों के विचार आज आपके समक्ष इसलिए रखे जा रहे हैं, क्योंकि भारत की इस धरातल पर कुछ ऐसे लोग रहे हैं, जिन्होंने सनातन के ख़िलाफ़ ज़हर उगला। पिछले साल उदय निधि स्टालिन और ए राजा ने सनातन पर कुठाराघात किया। सनातन धर्म लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटने वाला विचार है, इसे खत्म करना मानवता और समानता को बढ़ावा देना है ऐसा उदयनिधि स्टालिन ने कहा, डेंगू, मलेरिया, कोरोना से सनातन की तुलना की और ए. राजा ने तो सनातन धर्म को एड्स और कुष्ठ रोग जैसा करार दिया था। इन जैसे लोगों ने जब मारी संस्कृति, हमारे इतिहास और सनातन धर्म का अपमान किया, तो इनके ख़िलाफ़ हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोला, जमकर राजनीति हुई और अब जब इन्हीं सनातन विरोधियों का भविष्य शंकराचार्य ने दिखाया , तो राजनीतिक भूचाल आ गया। 

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दरअसल एक बार फिर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने हिंदू राष्ट्र की माँग की है, ये बताने की कोशिश की है कि ये देश सनातनियों को है और भारत को जल्दी ही हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए।हिंदू राष्ट्र की माँग तो समझ आती है, लेकिन जब विधर्मियों की जान शंकराचार्य ने ख़तरे में बता दी, तो हर कोई अचंभित रह गया जी हैं बड़ी ही बेबाक़ी से शंकराचार्य जी ने इस बात के संकेत देते हुए ये कहा है।ये देश सनातनियों का है, जो सनातन धर्म को नहीं मानता, उसका जीवन ख़तरे में है। सनातन धर्म ने विज्ञान और वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किया है। सभी के पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य थे। ये श्रीमद्भगवत और अन्य ग्रंथों के विश्लेषण से साफ़ हो गया है। सनातन धर्म के सिद्धांत का नेतृत्व करने वाले विकसित हुए हैं, जबकी इसके विपरीत इसे निपटाने की सोच रखने वाले विलुप्त हो गये हैं। 

अब यहाँ शंकराचार्य जी की इन बातों से साफ़ हो जाता है कि जिस किसी ने सनातन को ख़त्म करने की सोची, वो ख़ुद मिट्टी में मिल गय यानी की 2025 की शुरुआत से जो कोई भी पुनः सनातन पर प्रहार करेगा, उसकी ज़िंदगी मौत के मुँह में समा जाएगी। लेकिन क्या ऐसा संभव है, सनातन को बदनाम करने वाले और सनातन को मिटाने की चाह रखने वाली जितनी भी ताक़तें हैं, उनका भविष्य अंधकार मय हो चुका है। इस पर आप क्या सोचते हैं, कमेंट करके ज़रूर बताइयेगा।

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