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धेनुपुरीश्वरर मंदिर: भगवान शिव ने किया था कपिल मुनि को श्राप से मुक्त, आज भी शिवलिंग पर मौजूद हैं पौराणिक निशान!

सनातन धर्म में कई सारे मंदिर हैं जिनसे लाखों भक्तों की आस्था और विश्वास जुड़ा है. ऐसे में चेन्नई में स्थित धेनुपुरीश्वरर मंदिर भी इसी बात का प्रतीक है. मंदिर में प्राचीन शिवलिंग मौजूद है जो आधा मिट्टी में दबा हुआ है. माना जाता है कि यहां भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर कपिल मुनि को श्राप से मुक्त किया था. मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा भी बेहद रहस्यमयी है…

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12 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
02:32 AM )
धेनुपुरीश्वरर मंदिर: भगवान शिव ने किया था कपिल मुनि को श्राप से मुक्त, आज भी शिवलिंग पर मौजूद हैं पौराणिक निशान!
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सनातन धर्म और हमारे शास्त्रों में हमेशा मनुष्य जीवन को मोक्ष से जोड़ा गया है. मोक्ष प्राप्ति के लिए दान, पूजा-पाठ और अनुष्ठान करने के लिए कहा जाता है. ऐसे में चेन्नई शहर के पास एक ऐसा मंदिर है, जहां दुखों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं. ये मंदिर सिर्फ धर्म की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारतीय पुरातत्व के लिए भी खास है.

धेनुपुरीश्वरर मंदिर कितना पुराना है?

चेन्नई के मदंबक्कम और तांबरम के पास प्राचीन धेनुपुरीश्वरर मंदिर है, जिसे 1000 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहां मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है. मंदिर के गर्भगृह में 6 इंच के शिवलिंग विराजमान हैं, जिन्हें धेनुपुरीश्वर कहा गया है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव मां पार्वती के अन्य रूप 'धेनुकंबल' के साथ विराजमान हैं. भक्तों के बीच मान्यता है कि मंदिर में आकर धेनुपुरीश्वर और 'धेनुकंबल' की पूजा करने से सारे पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

जानें धेनुपुरीश्वरर मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा!

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मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा की मानें तो महान ऋषि कपिल मुनि भगवान शिव के भक्त थे. उन्होंने बाएं हाथ से भगवान की आराधना की थी, जिसकी वजह से उन्हें अगले जन्म में गाय का जन्म लेने का श्राप मिला. गाय होकर भी कपिल मुनि ने लगातार भगवान शिव की आराधना की और मिट्टी में दबे शिवलिंग की पूजा की. एक बार ग्वाले ने गाय को दूध अर्पित करने के लिए दंडित किया और इतना मारा कि उसके खुर से निकलने वाला रक्त शिवलिंग पर अर्पित हो गया. गाय की पीड़ा को कम करने के लिए भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और कपिल मुनि को श्राप से मुक्त किया. इसी वजह से मंदिर का नाम धेनुपुरीश्वरर पड़ा. यहां धेनु से तात्पर्य गाय से है.

धेनुपुरीश्वरर मंदिर की विशेषता क्या है?

मंदिर में विराजमान छोटे से शिवलिंग पर आज भी गाय के खुर का निशान है और शिवलिंग को स्वयं प्रभु माना जाता है. शिवलिंग के पास एक गड्ढा भी है. मंदिर में भगवान विष्णु भी विराजमान हैं, लेकिन वे मुख्य गर्भगृह के पीछे की तरफ स्थापित हैं. मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है, क्योंकि मंदिर के हर खंभे पर चोल राजा सुंदर चोल के समय की नक्काशी है. मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा बनी है, जो हाथों में बाण लिए खड़े हैं. इसके अलावा मंदिर में एक नक्काशी ऐसी भी है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य और भगवान गणेश की प्रतिमा एक साथ विराजमान हैं. इस नक्काशी को वहां के लोग शक्ति का प्रतीक मानते हैं.

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धेनुपुरीश्वरर मंदिर के पास मौजूद है शुद्धानंद आश्रम!

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इसके अलावा एक खंभे पर कपिल मुनि को अपनी बाईं भुजा में शिवलिंग और दाईं भुजा में माला धारण करते हुए दिखाया गया है. धेनुपुरीश्वरर मंदिर के पास ही 18 सिद्धों का मंदिर है और थोड़ी ही दूरी पर शुद्धानंद आश्रम और इनकॉन फाउंडेशन भी देखने को मिल जाएगा.

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