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जगन्नाथ पुरी धाम आकर किनको भुगतना पड़ता है राधा रानी का श्राप ?

अब जब 26 जून से जगन्नाथ रथ यात्रा का श्री गणेश होने जा रहा है. जगन्नाथ पुरी धाम में भक्तों का मेला लगना शुरु हो चुका है. तो ऐसे में किनकी मौजूदगी प्रभु जगन्नाथ के आगे श्रापित बन जाती है, ये जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान की ये ख़ास रिपोर्ट.

जगन्नाथ पुरी धाम आकर किनको भुगतना पड़ता है राधा रानी का श्राप ?
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अब जब 26 जून से जगन्नाथ रथ यात्रा का श्री गणेश होने जा रहा है. जगन्नाथ पुरी धाम में भक्तों का मेला लगना शुरु हो चुका है. तो ऐसे में किनकी मौजूदगी प्रभु जगन्नाथ के आगे श्रापित बन जाती है , ये जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान की ये ख़ास रिपोर्ट.
 
स्नान पूर्णिमा के साथ जगन्नाथ भक्तों का इंतज़ार ख़त्म हो चुका है, क्योंकि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जानी है. एक बार फिर धरती के बैकुंठ लोक में श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, एक बार फिर भक्तों के मेले में भक्ति का उत्सव नज़र आएगा. एक बार फिर भक्तों का हुजूम प्रभु के भव्य रथ को खिंचता हुआ दिखेगा.  प्रत्येक वर्ष जगन्नाथ पुरी धाम में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा अबकी बार 26 जून से आरंभ होने जा रही है, जिसे लेकर भक्तों का उत्साह अभी से देखने को मिल रहा है. संपूर्ण वर्ष में यही एक मौक़ा होता है, जब नाथों के नाथ प्रभु जगन्नाथ स्वयं मंदिर से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। यही एक मौक़ा होता है, जब प्रभु गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं और यही एक मौक़ा होता है, जब भक्तों को अपने कष्टों से मुक्ति मिलती है.  जो कि जगन्नाथ पुरी धाम में रथ खींचने की परंपरा वर्षों पुरानी है, जिस कारण यहाँ आकर रथ खींचने का सौभाग्य भी हर किसी को प्राप्त नहीं होता है. जिस किसी पर प्रभु जगन्नाथ की कृपा होती है, उसे ही रथ खींचने का मौक़ा मिलता है. इन्हीं कारणों के चलते  प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. इन सबके बीच क्या आप जानते हैं किनके लिए प्रभु जगन्नाथ की चौखट पार करना श्रापित बन जाता है.

प्रभु जगन्नाथ की अलौकिक दुनिया रहस्यों से भरी पड़ी है और इन्हीं रहस्यों के बीच जो अविवाहित जोड़ों होते हैं, उनके लिए प्रभु जगन्नाथ की चौखट पार करना वर्जित है. अविवाहित जोड़ो चाहकर भी प्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यही आशीर्वाद उनके लिए श्राप बन जाता है. जो कि पुरी धाम में प्रभु जगन्नाथ अपनी बहल सुभद्रा और भाई बलभद्र संग विराजते हैं, जिस कारण उनकी एक झलक पाने के लिए उनके भक्त आनंदित हो जाते हैं लेकिन प्रभु के यही दर्शन अविवाहित जोड़ो के लिए श्रापित बन जाते हैं. इसके पीछे का कारण है राधा रानी की नाराज़गी, जो आज तक बनी हुई है. इसको लेकर पौराणिक कथा कहती है.

एक बार राधा रानी जगन्नाथ पुरी मंदिर आईं और उन्होंने श्रीकृष्ण के जगन्नाथ रूप को देखने की इच्छा जताई. जैसे ही राधा रानी ने पुरी मंदिर में प्रवेश करने के लिए कदम बढ़ाया, तो जगन्नाथ जी के मंदिर के पुजारी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. जब राधा रानी ने पुजारी से इस व्यवहार का कारण पूछा तो पुजारी जी ने कहा कि देवी आप श्रीकृष्ण की प्रेमिका हैं न कि विवाहिता. जब मंदिर में श्री कृष्ण की पत्नियों को प्रवेश नहीं मिला, तो आपको प्रवेश की अनुमति कैसे मिल सकती है. इसपर राधा रानी बहुत क्रोधित हुईं और उन्होंने जगन्नाथ मंदिर को यह श्राप दिया कि अब से कोई भी अविवाहित जोड़ा इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएगा. जो भी अविवाहित जोड़ा जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की कोशिश करेगा, उसे जीवन में उसका प्रेम कभी नहीं प्राप्त होगा.

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कहते हैं उसी दिन से पुरी जगन्नाथ मंदिर में विवाहित जोड़ों का प्रवेश वर्जित माना गया है, जो अविवाहित जोड़ो मंदिर की इस परंपरा को तोड़ने का दुस्साहस करते है, उन्हें बाद में श्राप का भोगी बनना पड़ता है, उनके जीवन से प्रेम समाप्त हो जाता है. इसलिए अगर आप भी प्रभु जगन्नाथ के विराट दर्शनों के इच्छुक हैं, तो जोड़ों से जाइये ना ही अविवाहित होकर. 

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