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गुजरात का प्रसिद्ध पावागढ़ कालिका शक्तिपीठ, नवरात्रि में उमड़ता है भक्तों का सैलाब

मां काली का मंदिर पहाड़ी पर 800 मीटर की ऊंचाई पर बना है, जहां से पावागढ़ का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. मंदिर के बनावट में दक्षिण भारतीय शैली की झलक देखने को मिलती है. मान्यता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर पीड़ा से तांडव कर रहे थे.

गुजरात का प्रसिद्ध पावागढ़ कालिका शक्तिपीठ, नवरात्रि में उमड़ता है भक्तों का सैलाब
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देश के हर मंदिर का इतिहास हमारे पुराणों से जुड़ा है. हर मंदिर के महत्व और इतिहास को दर्शाती पौराणिक कथाएं भी मौजूद हैं, जो उन्हें बाकी अन्य मंदिरों से अलग बनाती हैं.

800 मीटर ऊंचाई पर स्थित है मंदिर

51 शक्तिपीठों में शामिल गुजरात के पंचमहल जिले में बना मां कालिका का मंदिर अपने आप में विशेष है. नवरात्रि के समय इस मंदिर में 800 मीटर की ऊंचाई पर पैदल चढ़कर भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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तंत्र और रोगों से मुक्ति की मान्यता

गुजरात के पंचमहल जिले के पावागढ़ में मां काली का प्रसिद्ध कालिका मंदिर स्थित है, जिसकी मान्यता पूरे गुजरात में है. कलिका मंदिर भारत के प्रमुख और प्राचीन शक्तिपीठों में से एक है, जहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है. तंत्र से परेशान लोग भी मां कालिका के दर्शन कर तंत्र से छुटकारा पाते हैं. मान्यता है कि मां काली शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा दिलाती हैं और यही वजह है कि शारीरिक व मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए ज्यादा आते हैं.

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मंदिर में लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं और मां भवानी से कष्टों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं. हालांकि मंदिर तक पहुंचने का रास्ता दुर्लभ नहीं है. मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, वहीं भक्तों की सुविधा के लिए रोपवे की भी व्यवस्था है. नवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा, संकीर्तन और यज्ञ का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

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नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

मां काली का मंदिर पहाड़ी पर 800 मीटर की ऊंचाई पर बना है, जहां से पावागढ़ का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. मंदिर के बनावट में दक्षिण भारतीय शैली की झलक देखने को मिलती है. मान्यता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर पीड़ा से तांडव कर रहे थे, तब सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए थे.

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माना जाता है कि इसी स्थान पर माता सती का दाहिना पैर गिरा था. कई जगहों पर वक्षस्थल गिरने की बात भी कही गई है. यही कारण है कि इस स्थान को ऊर्जा का सबसे पावरफुल प्लेस माना जाता है. मंदिर के प्रवेश के साथ ही भक्तों को अलौकिक शक्तियों का अनुभव होता है.

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