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नेपाल से लेकर योगी के गढ़ तक, स्वामी रामभद्राचार्य की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

एक बार फिर जगतगुरु मीडिया की सुर्खियों में है, अबकी बार तुलसी पीठाधश्वर का ग़ुस्सा तुलसीपीठ पर सवाल उठाने वालों पर फूटा है. जलते नेपाल के पीछे का कारण बताते हुए जगतगुरु ने योगी के गढ़ में पनपरहे मिनी पाकिस्तान का भविष्य दिखा दिया है.

नेपाल से लेकर योगी के गढ़ तक, स्वामी रामभद्राचार्य की चौंकाने वाली भविष्यवाणी
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पिछले महीने अगस्त में दो बड़ी आध्यात्मिक शख़्सियत सामने आईं, संत समाज में हड़कंप मच गया. तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने चमत्कार के नाम पर वृंदावन के प्रेमानंद महाराज को चैलेंज किया और संस्कृति में शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी. संतों के बीच नाराज़गी देखने को मिली. मामले की गंभीरता को देखते हुए जगतगुरु जी के उत्तराधिकारी और शिष्य रामचंद्र दास को सामने आना पड़ा और उनकी सफ़ाई के बाद मामला शांत हो पाया. एक बार फिर जगतगुरु मीडिया की सुर्खियों में हैं, इस बार तुलसी पीठाधश्वर का ग़ुस्सा तुलसी पीठ पर सवाल उठाने वालों पर फूटा. जलते नेपाल के पीछे का कारण बताते हुए जगतगुरु ने योगी के गढ़ में पनप रहे मिनी पाकिस्तान का भविष्य दिखा दिया है.

आज भी आम जनमानस को स्वामी रामभद्राचार्य की आध्यात्मिक और साहित्यिक यात्रा प्रेरित करती है. अपने अंधेपन को चुनौती देते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने शास्त्र ज्ञान के रास्ते ख़ुद की अलग पहचान बनाई. इसका सबसे बड़ा सबूत तब देखने को मिला, जब देश की सर्वोच्च अदालत में जगतगुरु ने अपनी गवाही में 441 शास्त्र प्रमाण के साथ राम जन्मभूमि पर मंदिर के होने का प्रमाण दिया. इसके बाद न्यायधीशों ने माना कि सच में स्वामी रामभद्राचार्य में दैवीय शक्ति है. 75 की उम्र तक आते-आते उन्होंने समाज के लिए, ज़रूरतमंदों के लिए और हैंडिकैप्ड लोगों के लिए असाधारण कार्य किए, जिसके चलते भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है. 22 भाषाओं के ज्ञाता, 100 से अधिक ग्रंथों के रचनाकार और दूरगामी दृष्टि के जनक स्वामी रामभद्राचार्य ने लोगों के बीच भारत के हिंदू राष्ट्र बनने की उम्मीद जगाई. जेन ज़ी आंदोलन की आग में नेपाल क्यों जल रहा है और यूपी के गढ़ में मिनी पाकिस्तान कहाँ पनप रहा है, इसे लेकर जगतगुरु की भविष्यवाणी और उसमें छिपी चेतावनी जानें.

दरअसल, 17 साल पहले नेपाल से हिंदू राष्ट्र का तमग़ा हटा और इस दौरान लगातार सरकारें बदलीं, भ्रष्टाचार के आरोप लगे और बेरोज़गारी बढ़ती गई. आज परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि बेरोज़गारी दर 20 फ़ीसदी तक पहुँच गई है, भ्रष्टाचार मुल्क की जड़ों में दीमक की तरह घुस चुका है और चीन का आधा से ज़्यादा क़र्ज़ नेपाल की संपत्ति पर गिरवी हो चुका है. यानी राजशाही के अंत से मुल्क को कोई ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ, उल्टा हालात और बिगड़े. इन्हीं सब के बीच केपी ओली की दमनकारी नीतियों ने जैसे ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया, नेपाली युवाओं का सब्र का बांध फट पड़ा. पिछले तीन दिनों से पूरा नेपाल जल रहा है। केपी ओली पद से इस्तीफ़ा देकर छूमंतर हो गए, लेकिन युवाओं का ग़ुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा. संसद से लेकर प्रधानमंत्री के दफ्तर और घर तक आग में स्वाहा हो चुके हैं. अभी तक विद्रोह की चिंगारी में नेपाल जल रहा है, लेकिन इसके पीछे की असल वजह क्या है? मेरठ पधारे स्वामी रामभद्राचार्य ने अपनी कथा में उस पाप का ज़िक्र किया है, जिसे इस वक़्त नेपाल भुगत रहा है. नेपाल की दुर्दशा का कारण बताते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने विशेष चेतावनी और भविष्यवाणी दी है. स्वामी रामभद्राचार्य जी ने कहा नेपाल में जो हो रहा है वो अच्छा नहीं हो रहा है. वीरेंद्र विक्रम शाह की हत्या का पाप नेपाल को खा रहा है. नेपाल कभी अमेरिका के हाथ बिक जाता है तो कभी चीन के हाथ बिक जाता है. भारत के इतना करने के बाद भी उसका आकर्षण भारत के प्रति नहीं है. हम चाहेंगे कि नेपाल सुख से रहे.

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इसी कड़ी में जगतगुरु ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुद्दा उठाया. उन्होंने वेस्ट यूपी में मुसलमानों की बढ़ती आबादी पर चिंता ज़ाहिर की और कहा कि वेस्ट यूपी मिनी पाकिस्तान बनता जा रहा है. इसलिए उन्होंने हिंदुओं को अधिक से अधिक बच्चे करने की सलाह दी और कहा कि जो हिंदू बिछुड़ गए हैं, उन्हें घर वापसी करनी चाहिए. वहीं, अपनी इसी कथा में उन्होंने हिंदू राष्ट्र का भी समर्थन किया. जगतगुरु का कहना है कि समय लगेगा, लेकिन भारत हिंदू राष्ट्र ज़रूर बनेगा. जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा, "भारत हिंदू राष्ट्र बनने का प्रयास मैं करूंगा. समय लग सकता है, लेकिन हिंदू राष्ट्र बन जाएगा. यह शताब्दी हिंदुओं की है. राम मंदिर आंदोलन में मेरी गवाही मुख्य भूमिका में थी. मथुरा और काशी को लेकर वही कहूंगा जो राम मंदिर के लिए कहा था. कोर्ट बुलाएगा तो काशी और मथुरा के लिए भी गवाही देने जाऊँगा. काशी विश्वनाथ का ज्ञानवापी भी मिलेगा और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि भी मिलेगी. संभल में अब हिंदुओं का पलायन नहीं होना चाहिए. हिंदुओं को अपने प्रत्येक अधिकार के लिए कठोर संघर्ष करना चाहिए."

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