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ताकि पूरी दुनिया में बजे 'Made in India' का डंका... PM Modi ने दिया 'दाम कम, दम ज्यादा का मंत्र', की स्वदेशी को मजबूती देने की अपील

प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल स्वतंत्रता दिवस की रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि एक दृढ़ इच्छाशक्ति और ठोस रणनीति का परिचायक था, जो भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर ले जाने का संकल्प प्रस्तुत करता है

ताकि पूरी दुनिया में बजे 'Made in India' का डंका... PM Modi ने दिया 'दाम कम, दम ज्यादा का मंत्र', की स्वदेशी को मजबूती देने की अपील
Image: PM Modi
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PM Modi Speech: भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया और देशवासियों को नई दिशा में सोचने और कार्य करने का संदेश दिया. अपने भाषण में उन्होंने देश की प्रगति, आत्मनिर्भरता और MSME सेक्टर की ताकत पर विशेष ज़ोर दिया. पीएम मोदी का संबोधन सिर्फ एक राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि यह आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत की परिकल्पना को साकार करने का एक स्पष्ट रोडमैप था.

"दाम कम, दम ज्यादा": भारतीय उत्पादों के लिए नया मंत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उनके योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि आज दुनिया क्वालिटी को प्राथमिकता देती है और भारत को भी इसी राह पर चलना होगा. मोदी ने ‘दाम कम, दम ज्यादा’ का मंत्र देते हुए सभी निर्माताओं और उद्यमियों से अपील की कि वे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाएं ताकि भारत वैश्विक बाजार में मजबूती से अपनी पहचान बना सके. उन्होंने कहा, “हम सभी जो उत्पादन के क्षेत्र में लगे हैं, उन सभी का मंत्र होना चाहिए ,दाम कम, दम ज्यादा. इस भाव के साथ हमें आगे बढ़ना है।” उन्होंने गुणवत्ता और नवाचार के साथ उत्पादन की लागत को कम करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि सरकार नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन पर तीव्र गति से काम कर रही है.

ग्लोबल मार्केट में ‘मेड इन इंडिया’ की पहचान

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प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय MSMEs की ताकत को दुनिया भर में पहचाना जा रहा है. बड़े-बड़े वैश्विक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भारत के छोटे उद्योगों द्वारा बनाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ के सिद्धांत पर चलते हुए विश्व बाजार में अपने उत्पादों की गुणवत्ता का लोहा मनवाए. इसके लिए सरकार कच्चे माल की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स, और उत्पादन लागत को नियंत्रित करने की दिशा में काम कर रही है.

स्वदेशी को मजबूरी नहीं, मजबूती बनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में विशेष रूप से देश के व्यापारियों और दुकानदारों से अपील की कि वे स्वदेशी उत्पादों को मजबूरी में नहीं, बल्कि गर्व और मजबूती के साथ अपनाएं और उसका प्रचार करें. उन्होंने कहा कि स्वदेशी को बढ़ावा देना किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का साझा दायित्व है. उन्होंने प्रेरणादायक उदाहरण देते हुए कहा, “पहले दुकानों पर लिखा होता था घी की दुकान, फिर लिखा जाने लगा शुद्ध घी की दुकान. मैं चाहता हूं कि व्यापारी बोर्ड लगाएं यहां स्वदेशी माल बिकता है” प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मानसिकता अगर देश भर में फैलती है, तो यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बड़ा कदम होगा.

सभी राजनीतिक दलों से अपील, वोकल फॉर लोकल को राष्ट्रीय आंदोलन बनाएं

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पीएम मोदी ने इस अवसर पर सभी राजनीतिक दलों को भी आह्वान किया कि वे मिलकर ‘वोकल फॉर लोकल’ को राष्ट्रीय जन आंदोलन बनाएं. उन्होंने कहा कि अगर 140 करोड़ देशवासी मिलकर संकल्प लें और भारतीय मेहनत से बने उत्पादों को प्राथमिकता दें, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की ओर भी अग्रसर हो सकता है. प्रधानमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा कि जिस प्रकार पिछली पीढ़ी स्वतंत्र भारत के लिए बलिदान हुई, अब यह पीढ़ी समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे. “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार करने के लिए आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास को ज़रूरी बताया.

आत्मनिर्भरता: सिर्फ आर्थिक नहीं, राष्ट्रीय आत्मसम्मान की कसौटी

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भरता की व्यापक परिभाषा देते हुए कहा कि यह केवल आयात-निर्यात या आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है. यह एक राष्ट्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और रणनीतिक स्वतंत्रता का प्रतीक है.उन्होंने किसानों के योगदान को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश के सामने भोजन की भारी चुनौती थी, जिसे भारतीय किसानों ने मेहनत और समर्पण से पूरा किया. उन्होंने भारत को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया और यह राष्ट्रीय आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया.

विकसित भारत के रास्ते पर दृढ़ कदम

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प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल स्वतंत्रता दिवस की रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि एक दृढ़ इच्छाशक्ति और ठोस रणनीति का परिचायक था, जो भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर ले जाने का संकल्प प्रस्तुत करता है. 'दाम कम, दम ज्यादा', 'वोकल फॉर लोकल', और 'स्वदेशी से समृद्धि' जैसे संदेश आज हर भारतीय के लिए प्रेरणा बनने चाहिए. अब यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम न केवल स्वतंत्रता की रक्षा करें, बल्कि उसकी अगली मंज़िल समृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर देश को आगे बढ़ाएं.

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