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‘ये इलाका झुग्गी, एक भी गोरा नहीं’ ब्रिटिश सांसद ने भारतीयों पर उगला जहर! नस्लीय टिप्पणी कर बुरा फंसे

ब्रिटेन का बर्मिंघम शहर, सोहो रोड हैंड्सवर्थ. ये वो इलाका है जहां बड़ी तादाद में भारतीय और पाकिस्तानी लोग रहते हैं. रॉबर्ट जेनरिक जब इस इलाके से बाहर निकले तो उन्होंने इसे अब तक की सबसे खराब जगहों में से एक बताया.

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ब्रिटेन वो देश है जहां विकास का पैमाना अर्थव्यवस्था से नहीं बल्कि बराबरी से सेट करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन ये दावे तब बेमानी लगते हैं जब यहां के माननीय ही लोगों में नस्लभेद का जहर भर दें. हम बात कर रहे हैं ब्रिटेन के सांसद रॉबर्ट जेनरिक की. 

ब्रिटेन का बर्मिंघम शहर, सोहो रोड हैंड्सवर्थ. ये वो इलाका है जहां बड़ी तादाद में भारतीय और पाकिस्तानी लोग रहते हैं. रॉबर्ट जेनरिक जब इस इलाके से बाहर निकले तो उन्होंने इसे अब तक की सबसे खराब जगहों में से एक बताया. इतना ही नहीं रॉबर्ट जेनरिक ने ये तक कह दिया कि, यह एक ऐसा इलाका है जहां एक भी गोरा शख्स नहीं है. लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिटिश सांसद ने अपने ही देश के इलाके को न केवल लोगों के आधार पर बांटा बल्कि रंगभेद जैसी ओछी टिप्पणी करने से भी बाज नहीं आए. 

रॉबर्ट जेनरिक ने कहा, ‘मैं बर्मिंघम के हैंड्सवर्थ गया. वहां का हाल बहुत ही खराब था. यह मेरे हिसाब से इस देश की एक झुग्गी जैसा इलाका है. वहां मैं 90 मिनट तक रहा. लेकिन एक भी गोरा चेहरा नहीं दिखा. यह वो देश नहीं है जिसमें मैं रहना चाहता हूं.’

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ब्रिटिश सांसद रॉबर्ट की टिप्पणी से खड़ा हुआ विवाद  

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भारतीयों पर नस्लीय हमले करने वाले रॉबर्ट जेनरिक की इस नफरत भरी टिप्पणी के बाद वह विवादों में आ गए. उन्हें स्थानीय लोगों, राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ कई समुदायों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. सांसद अयूब खान और मेयर रिचर्ड पार्कर ने उनकी टिप्पणी को विभाजनकारी और नस्लीय भेदभाव करार दिया. उन्होंने कहा, रॉबर्ट जेनरिक की बातों में नस्लवाद की झलक है. 

मेयर रिचर्ड पार्कर ने भी रॉबर्ट जेनरिक की तीखी आलोचना करते हुए कहा, वह समुदायों को बांटने की राजनीति कर रहे हैं. हैंड्सवर्थ वह इलाका है जहां अलग-अलग मूल के लोग एक साथ रहते हैं. इसके अलावा धर्म गुरुओं ने भी रॉबर्ट जेनरिक से माफी की मांग की. 

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अपने सांसद की नस्लीय टिप्पणी से ब्रिटिश मूल के लोग भी वास्ता नहीं रखते. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि, यहां हर तरह के, हर रंग रूप, हर जगह के लोग आते हैं. फिर चाहे वे गोरे हों, एशियाई हों या अफ्रीकी. सब साथ में घुल मिलकर रहते हैं. कुछ लोगों ने रॉबर्ट जेनरिक की टिप्पणी को उनके नशे का असर बता दिया. 

जेनरिक की पत्नी ने की थी इलाके की तारीफ 

भारतीय लोगों पर जहर उगलने वाले, उन्हें रंग के आधार पर बांटने वाले रॉबर्ट जेनरिक को लोगों ने आईना दिखा दिया. एक समय में हैंड्सवर्थ इलाके में रहने वाले ब्रिटिश भारतीय सलाहकार ऋषि लोथियी ने कहा कि ये इलाका कई संस्कृतियों का संगम है. उन्होंने बताया, जेनरिक की पत्नी केरी भी श्वेत ब्रिटिश नागरिक हैं, लेकिन उन्होंने इलाके की तारीफ की है. वहीं, हैंड्सवर्थ के रहने वाले लोगों ने सांसद रॉबर्ट की इस टिप्पणी को अज्ञानता और हास्यास्पद बताया. 

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अपनी सफाई में रॉबर्ट जेनरिक ने क्या कहा? 

चौतरफा आलोचना के बाद भी रॉबर्ट जेनरिक को अपनी टिप्पणी पर कोई पछतावा नहीं है. उल्टा उन्होंने ये कहा है कि, कस्बों और शहरों के कुछ इलाके काफी हद तक अलग-थलग हैं. इस मुद्दे पर चर्चा की जाने चाहिए न कि नस्लवादी कहे जाने के बेतुके डर की वजह से बात टाल दी जाए.

पूर्व PM ऋषि सुनक पर की गई थी नस्लीय टिप्पणी 

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यह पहला मामला नहीं है जब भारतीयों या अश्वेत लोगों को नस्ल के आधार पर टारगेट किया गया है. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी नस्लीय टिप्पणी का शिकार हो चुके हैं. क्योंकि वह भारतीय मूल है. 

हैंड्सवर्थ की कुल जनसंख्या कितनी? 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हैंड्सवर्थ में ज्यादातर भारतीय और पाकिस्तानी मूल के नागरिक रहते हैं. जहां तक बात है श्वेत लोगों कि तो रिपोर्ट में बताया गया है कि, यहां कुल जनसंख्या में से 8.7% लोग श्वेत हैं. 

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