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अमेरिका में नए सिक्कों का उत्पादन क्यों हुआ बंद? जानें ट्रंप के फैसले से जुड़े अहम पहलू

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर नए सिक्कों के उत्पादन को बंद कर दिया गया है। ट्रंप का कहना है कि सिक्के बनाने की लागत उनकी वास्तविक कीमत से ज्यादा हो रही है, जिससे सरकारी खर्चों में अनावश्यक वृद्धि हो रही है। इस फैसले के पीछे प्रशासनिक खर्चों में कटौती और पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए कई तर्क दिए जा रहे हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को आदेश दिया है कि अब नए सिक्कों का उत्पादन रोका जाए। उनके इस फैसले ने पूरे अमेरिका में हलचल मचा दी है और यह चर्चा का विषय बन गया है। ट्रंप का कहना है कि सिक्के बनाने की लागत, उनकी वास्तविक कीमत से कहीं ज्यादा हो रही है, जिससे सरकार का खर्च अनावश्यक रूप से बढ़ रहा है। लेकिन क्या यह सच में एक रणनीति है, जिससे सरकार का खर्च बचाया जाएगा, या फिर इसके पीछे कोई और बड़ा कारण छुपा है? आइए, जानते हैं कि यह फैसला अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर कैसे असर डाल सकता है और क्या इसके पक्ष और विपक्ष में तर्क हैं।

नए सिक्कों का उत्पादन क्यों रोका गया?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिका लंबे समय से सिक्के बना रहा है, लेकिन इन सिक्कों की लागत 2 सेंट से भी ज्यादा है। यह बेकार है। मैंने ट्रेजरी सचिव को आदेश दिया है कि अब नए सिक्कों का उत्पादन न किया जाए।" ट्रंप के इस बयान से साफ है कि उनका मकसद सरकारी खर्चों में कटौती करना है, ताकि जो पैसे अनावश्यक खर्च हो रहे हैं, उन्हें बचाया जा सके। इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन संघीय कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती करने की योजना बना रहा है, जिससे सरकारी खर्चों में और कमी लाई जा सके। उनका यह मानना है कि सरकार के बजट का एक भी पैसा अनावश्यक खर्चों पर नहीं लगना चाहिए।

अमेरिकी सिक्कों का इतिहास

अमेरिका में सिक्कों का उत्पादन 1792 से शुरू हुआ था, जब अमेरिकी मिंट की स्थापना की गई थी। उस वक्त पहले बनाए गए सिक्कों का आकार काफी बड़ा था और वे 100% तांबे से बने होते थे। आजकल, इन सिक्कों का आकार छोटा हो गया है और ये 97.5% जिंक से बने होते हैं, जिनपर तांबे की कोटिंग होती है। 1943 में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तांबे की कमी के कारण सिक्के स्टील और जिंक से बनाए गए थे।

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अमेरिका में सिक्के बनाने की लागत को लेकर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है। ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक पेनी (1 सेंट का सिक्का) बनाने की लागत उसकी वास्तविक कीमत (1 सेंट) से कहीं ज्यादा है। 2010 से अब तक कई प्रयास किए गए हैं ताकि सिक्कों की उत्पादन लागत कम की जा सके, लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया।

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सिक्कों के उत्पादन में खर्च क्यों बढ़ा?

अमेरिकी मिंट, जिसे कांग्रेस की तरफ से अधिकृत किया गया है, फिलाडेल्फिया और डेनवर में सिक्कों का उत्पादन करता है। 2024 के न्यूयॉर्क टाइम्स मैगज़ीन के अनुसार, अनुमानित 240 अरब सिक्के अब भी सर्कुलेशन में हैं। अमेरिका में सिक्कों का उत्पादन लगातार हो रहा है, लेकिन इनकी उत्पादन लागत बेहद बढ़ गई है। 2024 में कुल 3.2 अरब सिक्के बनाए गए, जो अमेरिका में सालभर में बनी कुल 5.61 अरब सिक्कों का 57% हिस्सा थे। अमेरिका में सिक्के बनाने की प्रक्रिया में जो धातु इस्तेमाल होती है, उसकी कीमत अब बहुत ज्यादा हो चुकी है। इसी कारण सरकार को सिक्कों के उत्पादन पर मोटा खर्च करना पड़ता है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक सिक्के को बनाने की लागत 3.69 सेंट से अधिक होती है, जो इसके वास्तविक मूल्य से कहीं ज्यादा है।

सिक्कों के उत्पादन को रोकने के क्या तर्क हैं?

डोनाल्ड ट्रंप समेत कई लोग मानते हैं कि अब सिक्कों का उत्पादन करना बेकार हो चुका है, क्योंकि इसकी लागत बहुत ज्यादा हो रही है। 2024 की यूएस मिंट रिपोर्ट के मुताबिक, एक सिक्के की लागत 3.69 सेंट से ज्यादा हो चुकी है, जबकि इसकी असली कीमत केवल 1 सेंट है। ट्रंप का मानना है कि यह खर्च सरकार के बजट पर अनावश्यक बोझ डाल रहा है। सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, सिक्कों के उत्पादन से पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इसे बनाने के लिए धातुओं के खनन से कार्बन उत्सर्जन, प्रदूषण और भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत होती है। ऐसे में, सिक्कों के उत्पादन को रोकना पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद हो सकता है।

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हालांकि, सभी लोग सिक्कों को हटाने के पक्ष में नहीं हैं। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सिक्के हटाने से सरकार को कोई खास फायदा नहीं होगा, बल्कि उल्टा असर पड़ सकता है। तर्क दिया जा रहा है कि सिक्कों की ढलाई रोकने के बाद, छोटे-मोटे लेन-देन के लिए अधिक निकेल (5 सेंट का सिक्का) बनाने पड़ेंगे, जिनकी लागत काफी अधिक होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक निकेल सिक्का बनाने में 13.8 सेंट का खर्च आता है, जबकि एक पेनी बनाने में 3.69 सेंट खर्च होते हैं। अगर सिक्के हटाए जाते हैं, तो निकेल सिक्कों का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे सरकारी खर्च और बढ़ सकता है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर होगा असर?

इस फैसले से अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर कई प्रभाव पड़ सकते हैं। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सिक्कों के उत्पादन को रोकने से कुछ हद तक बचत होगी, लेकिन कैश आधारित लेन-देन करने वालों को परेशानी हो सकती है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। अमेरिका में डिजिटल पेमेंट्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कैश का उपयोग पहले से ही कम हो चुका है। यदि सिक्कों का उत्पादन बंद किया जाता है, तो इसका असर कैश-लेन-देन पर पड़ेगा, लेकिन डिजिटल ट्रांजैक्शन में वृद्धि होगी, जो भविष्य की ओर एक सकारात्मक कदम हो सकता है।

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ट्रंप प्रशासन का यह फैसला अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकारी खर्चों पर एक अहम असर डाल सकता है। हालांकि, इसके पक्ष और विपक्ष में अलग-अलग दलीलें दी जा रही हैं, लेकिन यह साफ है कि अमेरिका के सिक्कों का उत्पादन अब पहले जैसा नहीं रह सकता। सिक्कों के उत्पादन से बचत तो होगी, लेकिन क्या यह कदम सिर्फ खर्च बचाने के लिए लिया गया है, या फिर इसके पीछे कोई और बड़ा उद्देश्य छिपा है? यह सवाल भविष्य में और भी स्पष्ट हो पाएगा।


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