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एलन मस्क के बयान से क्यों परेशान हैं ब्रिटिश-पाकिस्तानी? जानें पूरा मामला

ब्रिटेन में इन दिनों टेक अरबपति एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "X" पर दिए गए भड़काऊ बयानों से पाकिस्तानी और मुस्लिम समुदाय में चिंता बढ़ गई है। मस्क ने पुराने यौन शोषण मामलों को उठाते हुए खासतौर पर पाकिस्तानी मुसलमानों को निशाना बनाया, जिससे ब्रिटिश-पाकिस्तानी समुदाय को बलि का बकरा बनाए जाने का डर सताने लगा है।

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ब्रिटेन के लंदन में सर्द रातों में टैक्सी चलाने वाले ब्रिटिश-पाकिस्तानी ड्राइवरों की चिंताएं इन दिनों कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। और उनकी ये चिंता एलन मस्क की हालिया गतिविधियों से जुड़ी है। दक्षिण अफ्रीका में जन्मे टेक अरबपति एलन मस्क, जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "X" (पूर्व में ट्विटर) को नई दिशा दी, इन दिनों ब्रिटेन के पाकिस्तानी समुदाय के लिए एक बड़ी चिंता बन गए हैं। मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म पर ब्रिटिश-पाकिस्तानी समुदाय से जुड़े यौन शोषण के पुराने मामलों को उजागर किया है, जिसने ब्रिटेन में रहने वाले मुस्लिम और प्रवासी समुदायों के लिए एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है।

मस्क के बयान से बढ़ी चिंता

अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क के भड़काऊ पोस्ट्स ने ब्रिटिश-पाकिस्तानी समुदाय के बीच खलबली मचा दी है। मस्क ने अपने पोस्ट में 10 साल पुराने यौन शोषण के मामलों को दोबारा उछालते हुए इसे खासतौर पर पाकिस्तानी मुसलमानों से जोड़ा। इसके बाद से ब्रिटेन में इस समुदाय को लेकर नकारात्मक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ब्रिटिश-पाकिस्तानी ड्राइवरों का कहना है कि उनके यात्रियों की बातचीत अब बदलने लगी है। “पिछली सीट पर बैठने वाले लोग अब मुस्लिम और प्रवासी समुदायों को लेकर अजीब बातें करने लगे हैं। यह डराने वाला है। मस्क जैसे व्यक्ति के पास इतनी बड़ी शक्ति और संसाधन हैं कि वह किसी भी दिशा में सामाजिक ध्रुवीकरण कर सकते हैं।

मस्क ने अपने पोस्ट्स में पुरानी घटनाओं को दोबारा उठाया है, जो पहले से ही संवेदनशील मुद्दा रही हैं। उन्होंने यौन शोषण के कुछ दोषियों के पाकिस्तानी मूल का जिक्र किया, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया। 2010 के दशक में ब्रिटेन में पाकिस्तानी मूल के कुछ लोगों के खिलाफ बाल यौन शोषण के मामले सामने आए थे। हालांकि, उन पर पहले से ही कानूनी कार्रवाई हो चुकी है और यह मामला धीरे-धीरे शांत हो रहा था। लेकिन मस्क के हालिया पोस्ट्स ने इस जख्म को फिर से ताजा कर दिया।


साउथपोर्ट का मामला

पिछले साल अगस्त में साउथपोर्ट में तीन लड़कियों की हत्या के बाद एक मुस्लिम प्रवासी को दोषी ठहराने की अफवाहें फैल गईं। हालांकि, बाद में पता चला कि दोषी 18 वर्षीय एक्सल रुदाकुबाना था, जो न तो मुस्लिम था और न ही प्रवासी। बावजूद इसके, झूठी अफवाहों के कारण व्यापक दंगे हुए।

मस्क ने एक्स पर इन दंगों के फुटेज साझा करते हुए लिखा, “गृहयुद्ध अपरिहार्य है।” यह बयान न केवल भड़काऊ था, बल्कि ब्रिटेन के विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने वाला साबित हुआ। हजारों ब्रिटिश-पाकिस्तानी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है। मस्क का प्लेटफॉर्म और उनकी पहुंच समाज में पहले से मौजूद खाइयों को और गहरा कर सकता है। एलन मस्क के भड़काऊ पोस्ट्स ने ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी और मुस्लिम समुदायों को एक बार फिर से बलि का बकरा बनने का डर पैदा कर दिया है। जिसके बाद ब्रिटिश-पाकिस्तानी ड्राइवरों का कहना है कि, “हमारे समुदाय ने पहले भी ऐसे हालात देखे हैं। लेकिन अब मस्क के जैसे ताकतवर लोगों के हाथ में सोशल मीडिया की कमान है। इससे खतरा और बढ़ गया है।”

इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग से कैसे नफरत और भेदभाव बढ़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सभी समुदाय एकजुट होकर नफरत फैलाने वाली किसी भी हरकत का सामना करें। ब्रिटेन सरकार और स्थानीय प्रशासन को भी इस तरह के मामलों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति या समूह अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल न कर सके।
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