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'जहां दिखें तुरंत गोली मारो...', शेख हसीना के आदेश का ऑडियो क्लिप लीक

बांग्लादेश की राजनीति में हलचल उस वक्त तेज हो गई जब बीबीसी की एक रिपोर्ट में ऑडियो क्लिप लीक का मामला सामने आया है. इसमें दावा किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने छात्र आंदोलनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों को गोली मारने का सीधा आदेश दिया था. जुलाई-अगस्त 2024 में सरकारी नौकरी की कोटा प्रणाली के खिलाफ हुए विरोध में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

'जहां दिखें तुरंत गोली मारो...', शेख हसीना के आदेश का ऑडियो क्लिप लीक
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बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर दुनिया भर की सुर्खियों में है. पिछले साल के छात्र आंदोलनों पर सख्त कार्रवाई के मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुसीबत बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. बीबीसी द्वारा जारी एक लीक ऑडियो क्लिप में यह दावा किया गया है कि हसीना ने सीधे तौर पर सुरक्षा बलों को आदेश दिया था कि जहां भी प्रदर्शनकारी मिलें, उन्हें गोली मार दी जाए. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हसीना समेत उनकी सरकार में शामिल कई नेताओं पर मानवता के खिलाफ अपराधों का मुकदमा चला रही है.

1,400 जानों की कीमत पर सत्ता को बचाने की कोशिश?
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई और अगस्त 2024 के दौरान हुए छात्र आंदोलनों को दबाने में कम से कम 1,400 लोग मारे गए. यह आंदोलन बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में विवादित कोटा प्रणाली के विरोध में शुरू हुआ था, जिसमें ज्यादातर छात्र और युवा शामिल थे. कहा जाता है कि यह विरोध जल्द ही राष्ट्रीय विद्रोह में बदल गया. इसके जवाब में जो बल प्रयोग हुआ, उसने हसीना सरकार की साख को गंभीर रूप से हिला दिया. और अब जब यह ऑडियो सामने आया है, तो यह आरोप और भी मजबूत हो गए हैं कि यह कार्रवाई किसी स्वतःस्फूर्त नहीं, बल्कि एक पूर्व नियोजित राजनीतिक दमन था.

सत्ता से पलायन और भारत में शरण
5 अगस्त 2024 को, विद्रोह की आग जब राजधानी ढाका तक पहुंच गई और सेना के कुछ गुट भी आंदोलनकारियों के समर्थन में आने लगे, तब शेख हसीना देश छोड़कर भारत भाग गईं. वह अब तक भारत में शरण लिए हुए हैं. बांग्लादेश सरकार ने भारत को उनका प्रत्यर्पण करने का औपचारिक अनुरोध भेजा है, लेकिन नई दिल्ली की ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भारत इस मामले में बेहद सावधानी से कदम रख रहा है, क्योंकि इसमें न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति बल्कि मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून का भी सवाल जुड़ा हुआ है.

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ट्रिब्यूनल में गंभीर आरोप, साक्ष्य बने ऑडियो टेप
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना, पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोपी बनाया है. कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है. बीबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑडियो में हसीना प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा बल प्रयोग की सीधी अनुमति देती सुनी जा सकती हैं. ट्रिब्यूनल के लिए यह रिकॉर्डिंग एक अहम सबूत साबित हो सकती है. लंदन में स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार वकील टोबी कैडमैन ने भी इसे एक 'क्लियर एंड कॉन्फर्मिंग प्रूफ' बताया है, जो हसीना के रोल को स्थापित करता है.

अवामी लीग की प्रतिक्रिया 
शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग, ने लीक ऑडियो को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे "बेबुनियाद, फर्जी और राजनीतिक षड्यंत्र" बताया है. उनका दावा है कि ये रिकॉर्डिंग किसी साजिश के तहत तैयार की गई है ताकि हसीना की छवि को धूमिल किया जा सके और बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता को बिगाड़ा जा सके. लेकिन ऑडियो की तकनीकी वैधता की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है. अगर यह पुष्टि हो जाती है कि यह ऑडियो असली है, तो हसीना की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

क्या बांग्लादेश लौट पाएंगी हसीना?
इस सवाल का जवाब वर्तमान में अनिश्चित है. बांग्लादेश में अंतरिम सरकार फिलहाल स्थायीत्व की कोशिश में है और देश के भीतर हसीना समर्थकों की ताकत काफी कम हो चुकी है. ऐसे में उनके वापस लौटने की संभावना फिलहाल बहुत धुंधली नजर आती है. भारत में उनकी मौजूदगी और भारत सरकार की चुप्पी ने इस पूरे मामले को एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दा बना दिया है. यदि भारत प्रत्यर्पण करता है, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है.

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बताते चलें कि शेख हसीना पर लगे आरोप सिर्फ एक लंबे समय से सत्ता पर राज करने वाले नेता के पतन की कहानी नहीं हैं, बल्कि यह दक्षिण एशिया की राजनीति में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं. यदि सच में उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गोली मारने का आदेश दिया था, तो यह बांग्लादेश जैसे देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए एक बड़ा झटका है. 

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