Advertisement

Loading Ad...

डॉलर गिरा तो सोना उछला, अमेरिकी मंदी से भारत में सोने की कीमतें आसमान पर

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्ती, डॉलर की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते निवेशक एक बार फिर सोने और चांदी की ओर लौट आए हैं. यही वजह है कि भारत में सोने के दाम फिर चढ़ने लगे हैं और कुछ शहरों में यह 1 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है.

Loading Ad...
बीते कुछ हफ्तों तक जहां सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही थी, वहीं अब अचानक इनकी चमक फिर से लौट आई है. इसका मुख्य कारण अमेरिका की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है. वैश्विक बाजार में जैसे ही अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आई और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ीं, निवेशकों ने सोने और चांदी को एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर चुनना शुरू कर दिया. भारत में इसका असर सीधा दिखा और सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ने लगीं.

डॉलर की कमजोरी का गोल्ड पर सीधा असर

अमेरिका की आर्थिक हालत जब कमजोर होती है या मंदी की आहट मिलती है, तो सबसे पहले निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार से हटकर सोने की ओर चला जाता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ. अमेरिकी GDP ग्रोथ में गिरावट, बेरोजगारी में बढ़ोतरी और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव जैसे संकेतों ने निवेशकों को डरा दिया. साथ ही डॉलर इंडेक्स में लगातार गिरावट दर्ज की गई. डॉलर के कमजोर होने से दूसरे देशों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ जाती है और दाम चढ़ जाते हैं. यही कारण है कि भारत समेत कई देशों में सोने की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.

दरअसल अक्षय तृतीया से पहले भारत में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है. यही कारण रहा कि इस बार कुछ शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई. 24 मई को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 96,400 प्रति 10 ग्राम और चांदी 97,935 प्रति किलो दर्ज की गई. वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBA) के अनुसार, 24 कैरेट सोना 96,850 और 22 कैरेट सोना 88,779 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया. चांदी की कीमत (999 फाइन) 98,230 प्रति किलो रही.

निवेश के नजरिए से कितना फायदेमंद है सोना?

अगर हम निवेश की दृष्टि से देखें, तो सोना हमेशा से लंबी अवधि के लिए सुरक्षित और फायदेमंद माना गया है. पिछले एक साल में ही सोने ने लगभग 30 प्रतिशत तक रिटर्न दिया है. अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2001 से अब तक सोने ने औसतन 15 प्रतिशत का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) रिटर्न दिया है. इतना ही नहीं, 1995 से अब तक सोना हर साल महंगाई दर से 2 से 4 प्रतिशत ज़्यादा रिटर्न देता आया है. इसका मतलब है कि सोना न केवल महंगाई से बचाव करता है, बल्कि पूंजी को बढ़ाने में भी मदद करता है.

चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल

चांदी भी निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने में पीछे नहीं रही है. अक्षय तृतीया 2024 से मई 2025 तक चांदी के दामों में लगभग 15.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास तौर पर साल 2021 में चांदी ने 69.04 प्रतिशत का ऐतिहासिक उछाल दिखाया था. बीते पांच वर्षों में चांदी ने औसतन 20 प्रतिशत का CAGR रिटर्न दिया है. इसका मतलब है कि चांदी भी लंबे समय के लिए एक मजबूत निवेश विकल्प बन चुकी है.

सोना खरीदते समय रखें इन जरूरी बातों का ध्यान 

जब भी आप सोना खरीदने जाएं, तो ध्यान रखें कि बुलियन बाजार की दरों में मेकिंग चार्ज, टैक्स और GST भी जुड़ता है. इसलिए बाजार में गहना खरीदते समय कीमत कुछ हद तक ज्यादा लग सकती है. बेहतर होगा कि आप BIS हॉलमार्क, पक्का बिल और विश्वसनीय ज्वैलर्स से ही खरीदारी करें.

सोने की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के समय सोना निवेशकों का सबसे बड़ा सहारा बनता है. अमेरिका की आर्थिक नीतियों, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय मांग के बीच सोने की कीमतें आने वाले महीनों में और भी तेज़ी दिखा सकती हैं. 
Loading Ad...

यह भी पढ़ें

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...