Advertisement

Loading Ad...

'हमें सिर्फ भारत पर भरोसा...', बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग की दहशत में हिंदुओं ने मोदी सरकार से लगाई गुहार

बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की मॉब लिंचिंग के बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है. लोगों को अपनी जान और पहचान पर खतरा महसूस हो रहा है. वहीं BNP नेता तारिक रहमान के समर्थन में बढ़ी राजनीतिक हलचल ने आशंकाएं और गहरा दी हैं.

Social Media
Loading Ad...

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय इन दिनों गहरे डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहा है. दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की नृशंस मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने पूरे देश में बसे हिंदुओं को झकझोर कर रख दिया है. इन घटनाओं के बाद हिंदू समुदाय को यह एहसास होने लगा है कि उनकी जान और पहचान दोनों खतरे में हैं. कई इलाकों में लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और हर दिन डर के साथ गुजर रहा है.

मॉब लिंचिंग की घटनाओं से फैली दहशत

दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या केवल दो व्यक्तियों की मौत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे हिंदू समुदाय पर हमले के रूप में देखा जा रहा है. इन घटनाओं के बाद यह संदेश गया है कि भीड़ कभी भी हिंसक हो सकती है. हिंदुओं का कहना है कि छोटी सी बात या धार्मिक पहचान भीड़ को उकसा सकती है. यही डर उन्हें चुप रहने और सब कुछ सहने पर मजबूर कर रहा है.

Loading Ad...

राजनीतिक हलचल ने बढ़ाई चिंता

Loading Ad...

गुरुवार को यह डर उस समय और बढ़ गया, जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान के समर्थन में राजनीतिक हलचल तेज हुई. हिंदू समुदाय में यह धारणा गहरी है कि तारिक रहमान का रुख कट्टरपंथी रहा है. लोगों को आशंका है कि अगर BNP सत्ता में आई, तो अल्पसंख्यकों के लिए हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं. यही वजह है कि राजनीतिक घटनाक्रम भी अब भय का कारण बन गया है.

रंगपुर, ढाका और चित्तागांग में डर का माहौल

Loading Ad...

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार रंगपुर, ढाका, चित्तागांग और मयमनसिंह जैसे इलाकों में हिंदुओं के बीच डर का माहौल ज्यादा दिखाई दे रहा है. रंगपुर के 52 वर्षीय एक हिंदू निवासी ने बताया कि वे रोज अपने धर्म को लेकर अपमान सहते हैं. उन्होंने कहा कि सड़क पर मिलने वाले ताने कभी भी हिंसक भीड़ में बदल सकते हैं. उन्हें डर है कि कहीं उनका अंजाम भी दीपू या अमृत जैसा न हो जाए.

BNP के सत्ता में आने की आशंका

स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि BNP के सत्ता में आने की संभावना सबसे बड़ा डर है. इस पार्टी को लंबे समय से अल्पसंख्यकों के प्रति शत्रुतापूर्ण माना जाता रहा है. एक निवासी ने कहा कि वे भारत जाना चाहते हैं, लेकिन सीमाओं पर कड़ा पहरा है. ऐसे में वे न यहां सुरक्षित हैं और न वहां जा पा रहे हैं. ढाका के एक अन्य हिंदू नागरिक ने कहा कि शेख हसीना की अवामी लीग सरकार ही अब तक उनके लिए सुरक्षा की ढाल बनी हुई थी. अगर भारत की मोदी सरकार कुछ मदद करती है तो हम सुरक्षित हो सकते हैं.

Loading Ad...

भारत तक पहुंची हिंदुओं के दर्द की आवाज

बांग्लादेश के हिंदुओं की यह पीड़ा भारत तक भी पहुंच चुकी है. महाराष्ट्र के गढ़चिरोली और चंद्रपुर तथा छत्तीसगढ़ के पाखांजूर जैसे इलाकों में पूर्वी पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी रहते हैं. निखिल बंगला समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. सुभोध बिस्वास ने कहा कि अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में बांग्लादेश के हिंदू सिर्फ भारत पर ही भरोसा कर सकते हैं.

2.5 करोड़ हिंदुओं की चिंता

Loading Ad...

सनातन जागरण मंच के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बांग्लादेश में करीब 2.5 करोड़ हिंदू रहते हैं. यह कोई छोटी आबादी नहीं है. उनका कहना है कि हालात तेजी से एक संभावित नरसंहार की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. मयमनसिंह के एक हिंदू निवासी ने कहा कि सीमा खोलने का मतलब सामूहिक पलायन नहीं, बल्कि जान बचाने का एक विकल्प होना चाहिए. ढाका में रहने वाले 40 वर्षीय एक व्यक्ति ने कहा कि उनके लिए रोजी रोटी सबसे बड़ी जरूरत है. भारत जाना उनके लिए अनिश्चित भविष्य की ओर कदम बढ़ाने जैसा है. उन्होंने बताया कि अगर कोई हिंदू प्रतीक पहन लिया जाए, तो लोग उसे भारतीय एजेंट कहने से भी नहीं हिचकते. ऐसे माहौल में अपनी पहचान के साथ जीना बेहद मुश्किल होता जा रहा है.

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि बांग्लादेश के हिंदू आज भय, असुरक्षा और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच फंसे हुए हैं. सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासकर भारत इस मानवीय संकट पर कब ठोस कदम उठाएगा. यह समय केवल चिंता जताने का नहीं, बल्कि संवेदनशील और निर्णायक कार्रवाई का है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...