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मिडिल-ईस्ट में जंग तेज... ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने दुबई में किया ताबड़तोड़ हमला, धुआं-धुआं हुईं रिहायशी इमारतें

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तेज हो गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले और बढ़ाने की चेतावनी दी है, जबकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियां ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग ठुकरा दी.

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मिडिल-ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है. बढ़ते सैन्य हमलों, मिसाइलों और बमबारी के बीच वैश्विक बाजार, हवाई यात्रा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी दबाव बढ़ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध एक सप्ताह और इसी तरह चलता रहा, तो कई देशों में आर्थिक मंदी जैसे हालात बन सकते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ हमले और तेज किए जाएंगे. ट्रंप ने कहा कि ईरान के व्यवहार की वजह से उसे भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है. उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ा दी है.

ईरान ने ठुकराई आत्मसमर्पण की मांग

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दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका के दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियां ने अमेरिकी मांग को खारिज करते हुए कहा कि ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा. उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की मांग को सिरे से नकार दिया. पजेश्कियां ने कहा कि ईरानी जनता के सामने आत्मसमर्पण की बात करना बेकार है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान तब तक पड़ोसी खाड़ी देशों पर हमला नहीं करेगा, जब तक उन देशों की ओर से कोई हमला नहीं होता. उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि ईरान अभी भी संघर्ष को सीमित रखने की कोशिश कर रहा है.

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क्षेत्र में फैलता जा रहा संघर्ष

हालांकि जमीनी हालात इससे अलग दिखाई दे रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में ईरान की ओर से क्षेत्र के कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में भी धमाकों की खबरें सामने आई हैं. इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है. 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों के बाद यह संघर्ष तेजी से बढ़ा. इसी दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी, जिसके बाद देश की कमान संभालने के लिए एक त्रिपक्षीय नेतृत्व परिषद बनाई गई. वर्तमान राजनीतिक स्थिति में यह परिषद ही कई महत्वपूर्ण फैसले ले रही है. इस संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ गई है. कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रभावित होना पड़ा है और निवेशकों में चिंता का माहौल है. लगातार हो रहे हवाई हमलों के कारण ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व संरचना भी दबाव में है.

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रेवोल्यूशनरी गार्ड के बयान से बढ़ा भ्रम

ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखरची के बयान ने स्थिति को और उलझा दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान ने उन देशों पर हमला नहीं किया है जिन्होंने अमेरिका को अपने यहां से ईरान पर हमला करने की अनुमति नहीं दी. इससे यह संकेत मिला कि क्षेत्र में हो रहे कुछ हमलों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. इस बीच ईरान के प्रमुख धर्मगुरु अयातुल्ला नासिर मकारम शिराजी ने देश की विशेषज्ञ सभा से अपील की है कि जल्द से जल्द नए सर्वोच्च नेता का चयन किया जाए. लेकिन युद्ध के कारण 88 धर्मगुरुओं की समिति से जुड़े कई भवनों पर हमले हुए हैं, जिससे बैठक में देरी की संभावना बढ़ गई है.

अमेरिका ने दी और भीषण बमबारी की चेतावनी

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अमेरिका ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है. ट्रंप प्रशासन ने इजराइल को करीब 15.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के नए हथियार बेचने की मंजूरी भी दे दी है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण के बिना बातचीत संभव नहीं है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने भी कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा. पश्चिमी तेहरान में हुए धमाकों और धुएं के वीडियो सामने आने के बाद हालात की गंभीरता और साफ दिखाई दे रही है.

लगातार बढ़ रहा है मौत का आंकड़ा

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. अधिकारियों के मुताबिक अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोग मारे जा चुके हैं. लेबनान में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि इजराइल में 11 लोगों के मारे जाने की खबर है. इसके अलावा छह अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में जान गंवा चुके हैं.  शनिवार सुबह ईरान से दागी गई मिसाइलों के कारण पूरे इजराइल में अलर्ट जारी कर दिया गया. लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए. यरुशलम में भी जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई. वहीं दुबई में हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी गई और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद यात्रियों को सुरक्षा सुरंगों में ले जाया गया.

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बताते चलें कि मिडिल-ईस्ट में बढ़ते इस संघर्ष ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है. अगर जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह युद्ध वैश्विक स्तर पर और बड़े संकट को जन्म दे सकता है.

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