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'मोदी की ही बात सुनते हैं पुतिन...', रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे से पहले यूरोपीय देशों ने लगाई गुहार, कहा- आप ही कुछ कीजिए

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर आज दिल्ली पहुंच रहे हैं. इस बीच यूरोपीय देशों ने भारत से अपील की है कि वह पुतिन पर यूक्रेन युद्ध खत्म करने का दबाव बनाए. क्योंकि पुतिन भारत की बात सुनते हैं.

'मोदी की ही बात सुनते हैं पुतिन...', रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे से पहले यूरोपीय देशों ने लगाई गुहार, कहा- आप ही कुछ कीजिए
Narendra Modi/ Vladimir Putin (File Photo)
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Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं. भारत ने उनके स्वागत के लिए निजी डिनर से लेकर उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं तक कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम तय किए हैं. इस यात्रा पर वैश्विक स्तर पर नजरें टिकी हैं क्योंकि यूरोपीय देश लगातार भारत से अनुरोध कर रहा है कि वह पुतिन पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का दबाव बनाए. अमेरिका और यूरोपीय देश यह भी कहते रहे हैं कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से पुतिन की वॉर मशीन को आर्थिक ताकत मिलती है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अहम संदेश मानी जाएगी.

मोदी और पुतिन के बीच लगातार जारी है बातचीत

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के बीच बातचीत लगातार जारी रही है. आंकड़े बताते हैं कि 2022 से 2024 के बीच दोनों की 11 बार बातचीत हुई और सिर्फ 2025 में ही यह संख्या पांच तक पहुंच गई है. सितंबर 2022 में समरकंद में हुए SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से साफ कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है. यह संदेश उस समय पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना था. जुलाई 2024 में मॉस्को यात्रा के दौरान मोदी ने फिर कहा था कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्धभूमि पर नहीं मिलता. सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा में भी प्रधानमंत्री इसी तरह का स्पष्ट और दृढ़ संदेश पुतिन तक पहुंचाने वाले हैं. भारत का मानना है कि जब तक यूक्रेन, रूस, यूरोप और अमेरिका चारों पक्ष बातचीत की मेज पर नहीं बैठते, स्थायी शांति संभव नहीं है. भारत ने पहले भी इस युद्ध में एक शांतिदूत की भूमिका निभाने की कोशिश की है. जापोरिझिया परमाणु संयंत्र की सुरक्षा पर रूस से बातचीत करना हो या रूस-यूक्रेन के बीच अनाज समझौते में बैकडोर डिप्लोमेसी, भारत ने कई मौकों पर चुपचाप लेकिन प्रभावी भूमिका निभाई है.

यूरोपीय देशों को PM मोदी से उम्मीद 

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पुतिन की यात्रा से ठीक पहले यूरोपीय देशों की गतिविधियां तेज हुई हैं. ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के राजदूतों ने भारतीय मीडिया में संयुक्त लेख लिखकर स्पष्ट किया कि रूस ही युद्ध को रोकने में बाधा है. पोलैंड के राज्य सचिव ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी पुतिन से कहेंगे कि शांति समझौते पर आगे बढ़ें. पोलैंड के अधिकारी ने यह तक कहा कि पुतिन, मोदी की बात ध्यान से सुनते हैं. इसलिए भारत की भूमिका निर्णायक बन सकती है.

भारत ने जताई नाराजगी

पुतिन की यात्रा से पहले जब तीन यूरोपीय देशों के राजदूतों ने संयुक्त लेख लिखकर रूस की आलोचना की, तो भारत ने इसे कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि किसी तीसरे देश के नेता की यात्रा से पहले इस तरह का संयुक्त ओपिनियन लेख प्रकाशित करना असामान्य है और यह परंपरागत कूटनीति के अनुरूप नहीं है. भारत ने बिना सीधे विवाद बढ़ाए, इस लेख पर अपनी असहमति दर्ज करा दी है.

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बताते चलें कि राष्ट्रपति पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब यूक्रेन युद्ध नए मोड़ ले रहा है, यूरोपीय संघ रूस पर नए प्रतिबंध लगा रहा है और अमेरिका भी भारत से लगातार तेल खरीद कम करने की मांग कर रहा है. दूसरी ओर रूस भारत के लिए ऊर्जा और रक्षा साझेदारी का बड़ा स्तंभ है. ऐसे में इस मुलाकात के परिणाम सिर्फ भारत-रूस संबंधों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिलेगा.

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