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तुर्की का कट्टर दुश्मन, भारत का पक्का दोस्त...महज एक दौरा नहीं, बल्कि पाकिस्तान के 'जिगरी यार' को सख्त संदेश है PM मोदी की साइप्रस यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन से पहले साइप्रस की दो दिवसीय यात्रा की है. ऐसे में अब सवाल उठता है कि एक छोटे से देश साइप्रस को भारत इतना महत्व क्यों दे रहा है? जानकारों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन से पहले साइप्रस की दो दिवसीय यात्रा की, जो पिछले दो दशकों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा थी. यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है, और कुछ समय के लिए लेबनान सहित कई देशों का हवाई क्षेत्र बंद रहा. इस स्थिति के चलते प्रधानमंत्री का विमान अरब सागर, सोमालिया, इथियोपिया, इरिट्रिया और मिस्र के रास्ते साइप्रस पहुंचा. ऐसे में अब सवाल उठता है कि एक छोटे से देश साइप्रस को भारत इतना महत्व क्यों दे रहा है? आइए आपको इस रिपोर्ट में विस्तार से बताते हैं.

दरअसल सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है. भारत, भूमध्यसागर और यूरोपीय क्षेत्र में अपनी भागीदारी को विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है और साइप्रस इसमें एक अहम कड़ी बनकर उभरा है. जानकारों का मानना है कि यह यात्रा हाल ही में संपन्न हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद तुर्की को एक स्पष्ट संकेत भी है. तुर्की और साइप्रस के बीच लंबे समय से भू-राजनीतिक विवाद चला आ रहा है, वहीं तुर्की ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान के पक्ष में मुखर होकर भारत विरोधी रुख अपनाया है. ऐसे में भारत ने अब साइप्रस और ग्रीस जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने का निर्णय लिया है, जिससे न सिर्फ क्षेत्रीय संतुलन में भारत की भूमिका बढ़ेगी, बल्कि तुर्की को भी एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि भारत अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा. बता दें कि पीएम मोदी को साइप्रस सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III’ से किया सम्मानित किया है. 

भारत-साइप्रस संबंधों में नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया साइप्रस यात्रा ने भारत और साइप्रस के दशकों पुराने संबंधों को नई मजबूती दी है. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी को गहरा करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए. भूमध्यसागर में स्थित साइप्रस वर्ष 1960 में ब्रिटिश राज से आजाद हुआ था. हालांकि जल्द ही वहां ग्रीक और तुर्की मूल के समुदायों के बीच तनाव शुरू हो गया। वर्ष 1974 में ग्रीस समर्थित तख्तापलट के बाद तुर्की ने साइप्रस के उत्तरपूर्वी हिस्से में सैन्य कार्रवाई की, जो आज भी ‘तुर्की गणराज्य उत्तरी साइप्रस’ के नाम से जाना जाता है.हालांकि इसे केवल तुर्की ही मान्यता देता है. भारत ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है. भारत की भूमिका साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा बल (UNFICYP) के संचालन में भी महत्वपूर्ण रही है, जहां अब तक तीन भारतीय सैन्य अधिकारी मिशन प्रमुख रह चुके हैं.

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आर्थिक सहयोग की नई दिशा
पीएम मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस की मौजूदगी में आर्थिक सहयोग को लेकर कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. दोनों देशों ने वित्तीय सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशते हुए एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज गिफ्ट सिटी, गुजरात और साइप्रस स्टॉक एक्सचेंज के बीच समझौता ज्ञापन को स्वीकार किया है. इसके अलावा, एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और यूरोबैंक साइप्रस के बीच समझौते के तहत यूपीआई आधारित सीमा पार भुगतान सेवा शुरू करने पर सहमति बनी है. यह सुविधा दोनों देशों के पर्यटकों और व्यापारिक समुदायों को सरल, तेज़ और सुरक्षित लेनदेन का अनुभव देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत, ग्रीस और साइप्रस (IGC) के बीच व्यापार और निवेश परिषद के गठन का स्वागत किया है. इस नई पहल का उद्देश्य तीनों देशों के बीच शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और डिजिटल सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में त्रिपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करना है.

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साइप्रस बन रहा भारत के लिए यूरोप में रणनीतिक व्यापारिक केंद्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि साइप्रस में आयोजित व्यापार गोलमेज चर्चा से जो व्यावहारिक सुझाव सामने आए हैं, वे एक संरचित आर्थिक रोडमैप का आधार बनेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल व्यापार, नवाचार और रणनीतिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को सुनिश्चित करेगी. प्रधानमंत्री ने साइप्रस को यूरोप में भारत के लिए एक उभरता हुआ व्यापारिक और निवेश केंद्र बताया. अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो उसके अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और साइप्रस के बीच कुल व्यापार 136.96 मिलियन डॉलर का रहा. भारत से साइप्रस को प्रमुख रूप से दवाइयां, सिरेमिक उत्पाद, इस्पात, वस्त्र और मशीनरी का निर्यात किया जाता है, जबकि साइप्रस से भारत में दवाइयां, पेय पदार्थ और अन्य उत्पाद आयात किए जाते हैं.

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बताते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) में साइप्रस एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ता है. इसके अलावा, साइप्रस के पास समुद्री ऊर्जा संसाधनों की अपार संभावनाएं हैं, जहां भारत सहयोग को इच्छुक है. भारत की रणनीतिक मंशा तुर्की के साथ समुद्री विवादों के बीच अपनी उपस्थिति को इस क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने की है. खास बात यह है कि साइप्रस वर्ष 2026 में यूरोपीय संघ की अध्यक्षता करेगा, जो भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए भारत को एक मज़बूत साझेदार दिलाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है.

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