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भारत को ट्रंप ने दिखाई आंख, बदले के लिए मोदी भी तैयार !
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर टेंशन बढ़ गई है. ट्रंप ने जहां सीधे सीधे BRICS देशों को 100 प्रतिशत बढ़ाने की चेतावनी दे डाली. वहीं, भारत अमेरिका के अगले कदम का इंतजार कर रहा है क्योंकि इसका असर भारत पर भी गहरा होगा
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20 जनवरी का वो दिन जब अमेरिका में फिर एक बार ट्रंप राज कायम हुआ। डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ लेते ही एक के बाद एक कई ऐसे ऐलान कर डाले जिससे दुनिया टेंशन में आ गई। हुआ वहीं जिसका डर था। चाहे बात इमिग्रेशन डिटेंशन बिल की हो या हो WHO से अमेरिका को बाहर करने की। ट्रंप आते ही तहलका मचाने के मूड में हैं। भारत के लिए भी बात कम टेंशन वाली नहीं है। कैसे चलिए जानते हैं ?
ट्रंप आएंगे तो बड़े बदलाव करेंगे इसकी आशंका तो पहले से थी। लेकिन ट्रंप आएंगे और आते ही भारत को आंखें दिखाएंगे इसकी कल्पना तो भारत ने नहीं ही की थी। ट्रंप 1.0 में मोदी और ट्रंप की दोस्ती ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक, सामरिक औऱ रक्षा क्षेत्र को मजबूती दी। ऐसे में माना जा रहा था इस बार ट्रंप इस दोस्ती को यूं ही बरकरार रखते हुए एक दूसरे का हाथ उसी मजबूती से थामे रखेंगे। लेकिन ट्रंप तो कुछ अलग ही तेवर में नजर आ रहे हैं। यहां तक की चेतावनी भी जारी कर दी। ये चेतावनी है भारतीय प्रोडेक्ट्स पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की। इससे सीधे सीधे तो नहीं लेकिन इशारों इशारों में भारत को लेकर ट्रंप ने अपने इरादे बता दिए।
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने सत्ता संभालते ही BRICS देशों से सीधे सीधे कह दिया कि अगर वे डि-डॉलराइजेशन की कोशिश करेंगे तो इसकी कीमत उन्हें हाई टैरिफ से चुकानी पड़ेगी। यानी अमेरिका जाने वाले प्रोडेक्ट्स पर 100 प्रतिशत टैक्स। इससे सामान के दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाएंगे। जिसका असर उनकी बिक्री पर भी होगा।भारत के लिए ये टेंशन वाली बात इसलिए है क्योंकि भारत भी BRICS देशों का हिस्सा है। ऐसे में अमेरिका में भारतीय सामानों की कीमत भी लगभग दोगुनी हो जाएगी।
ट्रंप ने अपने इस बड़े ऐलान के दौरान डि डॉलराइजेश का जिक्र किया। ऐसे में डि डॉलराइजेशन का मतलब जान लेते हैं दरअसल, डॉलर से बचने के लिए कई देश अपनी अलग मुद्रा बनाने की कोशिश कर रहे हैं यानि वैश्विक व्यापार में डॉलर की उपयोगिता या प्रभाव को कम करने की कोशिश। BRICS में शामिल ये देश रूस, चीन, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्त्र, इथियोपिया, और UAE हैं।
हालांकि डि-डॉलराइजेशन की कोशिश रूस और चीन की तरफ से की जा रही है इसका भारत का दूर दूर से कोई वास्ता नहीं है। लेकिन ट्रंप ने अपनी धमकी में ब्रिक्स देशों का जिक्र किया है ऐसे में भारत पर भी इसका गहरा असर होगा। ट्रंप की ये चेतावनी भारत-अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों को खराब भी कर सकती है।
किसी भी चुनौती से डील करने के दो रास्ते होते हैं पहला उसके हर पहलु पर सोच विचारकर शांति समझदारी और बातचीत का रास्ता अपनाया जाए। दूसरा कि जैसे को तैसा। उसे उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। ट्रंप की नई चुनौती से निपटने के लिए भी भारत इन दोनों तरीकों पर चल रहा है। इसके लिए भारत अमेरिका को कुछ ऑफर भी कर सकता है।
अमेरिका से आयात बढ़ा सकता है भारत। अमेरिका की उर्जा जरूरतों को पूरी कर सकता है भारत। कच्चे तेल के आयात का मौका दे सकता है भारत। रक्षा क्षेत्र में अमेरिका के साथ अहम डील हो सकती है। अमेरिकी हथियार, ड्रोन, लड़ाकू जेट, मिसाइल समेत कई डिफेंस सौदे कर सकता है।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक बाजार में अमेरिकी प्रोडेक्ट के आयात को बढ़ाना। खाद्य पदार्थों में प्रोटीन सप्लीमेंट, मेवे और दालों का आयात बढ़ा सकता है भारत ।हेल्थ सेक्टर में अमेरिकी प्रोडेक्ट का आयात।
आयात को बढ़ाना ना केवल बढ़े हुए टैरिफ से भारत को बचा सकता है साथ ही अमेरिका और भारत के व्यापारिक सौदे में नुकसान को भी बचा सकता है।
अब आते हैं दूसरे ऑप्शन पर यानि सामने वाले को उसी की भाषा में जवाब देना। इसके लिए
भारत भी अमेरिकी प्रोडेक्ट पर टैरिफ रेट बढ़ा सकता है।अमेरिका से आयात को कम करना ।अमेरिका से आयात कम कर अन्य देशों से आयात के लिए हाथ मिलाना। भारतीय बाजार में नए देशों को इन्वाइट कर सकता है भारत। अमेरिकी प्रोडेक्ट पर निर्भरता कम कर घरेलू उद्योग को बढ़ावा। कृषि प्रोडेक्ट, ऑटोमोटिव पार्ट्स, व्हिस्की, समेत कई अमेरिकी प्रोडेक्ट पर टैरिफ ।
हालांकि भारत पहले इस ऑप्शन से बचना चाहेगा क्योंकि भारत की प्रमुखता हमेशा से ही दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों की निरंतरता को बनाए रखने की होती है। भारत की कोशिश फ्रेंडली रिश्तों को बढ़ावा देने की रहती है ना कि कमजोर करने की लेकिन वही बात हो गई ना। कोई छेड़ेगा तो भारत हाथ पर हाथ धरे थोड़ी बैठे रहेगा। वहीं, दोनों देशों के बीच ये व्यापारिक तनाव अमेरिका को भी भारी पड़ सकता है ऐसे में वो भी टैरिफ के मामले में भारत को छूट देने का ऑप्शन अपना सकता है। बहरहाल ट्रंप की ये चेतावनी किसके लिए चुनौती बनती है देखने वाली बात होगी।
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