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चीन के गेम चेंजर डेटा के सामने धरी की धरी रह गई ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी

चीन ने साल 2025 की पहली तिमाही में अपने एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के डाटा से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। खासकर अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह आंकड़े हजम नहीं हो पा रहे, क्योंकि उन्होंने चीन पर भारी टैरिफ लगाए थे।

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दुनिया के सबसे ताक़तवर देश की जब बात होती है, तो अमेरिका और चीन का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन बीते कुछ समय में ये मुकाबला एक व्यापारिक युद्ध में बदल चुका है। इस बार मैदान में सिर्फ बातें नहीं, आंकड़े भी उतरे हैं और वो आंकड़े सीधे चीन ने पेश किए हैं। जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है।

इस बार ड्रैगन ने एक ऐसी चाल चली है, जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि उनके राजनीतिक इमेज के लिए एक झटका भी हो सकती है। चीन ने साल 2025 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट डाटा जारी किया है और ये डाटा उस कहानी को बयान कर रहा है जिसे अमेरिका ने कभी सोचा भी नहीं था।

आंकड़ों की भाषा में चीन की बढ़त

मार्च के महीने में चीन के निर्यात (Export) में 12.4% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं आयात (Import) में 4.3% की गिरावट आई है। यह गिरावट कोई कमजोरी नहीं, बल्कि चीन की रणनीति का हिस्सा है। चीन अब खुद पर निर्भरता बढ़ा रहा है और बाहरी सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता घटा रहा है।

जवाब में चीन का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस यानी व्यापार में लाभ मार्च में 27.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। और सिर्फ मार्च ही क्यों? जनवरी से मार्च की पूरी तिमाही में यह आंकड़ा 76.6 अरब डॉलर का रहा है। यानी अमेरिका को चीन से ज्यादा आयात करना पड़ा, जबकि चीन ने खुद अमेरिका से कम चीज़ें खरीदीं। ये ट्रंप की नीतियों पर सीधा तमाचा जैसा है, क्योंकि उन्होंने चीन के निर्यात पर 145% तक का टैरिफ लगाया था यानी टैक्स बढ़ा दिया था, ताकि चीन को नुकसान हो।

ट्रंप के टैरिफ का चीन पर कोई असर नहीं

डोनाल्ड ट्रंप की चीन को लेकर व्यापारिक रणनीति बेहद आक्रामक रही है। उन्होंने चीन पर 145% तक के आयात शुल्क थोपे, ताकि अमेरिकी कंपनियां चीन से दूर हो जाएं और चीन की कमर टूटे। लेकिन हुआ इसका उल्टा। चीन ने न केवल इन टैरिफ का डटकर सामना किया, बल्कि अपने निर्यात को नए बाजारों में भी फैला दिया।

दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों, अफ्रीका, और मध्य-पूर्व में चीन का निर्यात 17% तक बढ़ा है। यानी ड्रैगन अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहा। उसने खुद को एक वैश्विक निर्यातक में तब्दील कर लिया है। और सबसे बड़ी बात जवाब में चीन ने भी अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर 125% का टैरिफ लगा दिया है। अब ये सीधी जंग है “तू टैक्स लगाएगा? मैं डबल टैक्स लगाऊंगा।”

चीन के कस्टम डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ल्यू डालियांग ने कहा, “चीन 16 वर्षों से लगातार दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक रहा है। हमारी हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 10.5% हो गई है। हमारा घरेलू बाज़ार इतना बड़ा है कि यह पूरी दुनिया के लिए एक अवसर है।” मतलब साफ है चीन अब इस स्थिति से डरने वाला नहीं है। वो अपने ही बाज़ार को इतना मज़बूत बना रहा है कि उसे अमेरिका या यूरोप की ज़रूरत न पड़े।

इस बीच, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी चुपचाप नहीं बैठे हैं। वह वियतनाम, मलेशिया, और कंबोडिया जैसे देशों के दौरे पर हैं। ये वही देश हैं जो अमेरिकी टैरिफ के बाद चीन के लिए नए निर्यात बाजार बन सकते हैं। शी की यह यात्रा पहले से तय थी, लेकिन अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह अब और भी अहम हो गई है। वियतनाम में ही चीन का निर्यात पिछले महीने 17% से अधिक बढ़ा है – यानी जहां अमेरिका ने दीवार खड़ी की, वहां चीन ने खिड़कियां खोल दीं।

क्या ट्रंप आएंगे घुटनों पर?

अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका और खासकर डोनाल्ड ट्रंप इस हालात को संभाल पाएंगे? उन्होंने जो सोचकर चीन के खिलाफ रणनीति बनाई थी, वही अब उल्टा पड़ता दिख रहा है।

एक तरफ चीन का एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है, दूसरी तरफ अमेरिका के पास विकल्प कम होते जा रहे हैं। अगर ट्रंप अपनी टैरिफ पॉलिसी को जारी रखते हैं, तो अमेरिकी कंपनियों को महंगे सामान के साथ जूझना पड़ेगा। वहीं अगर वो पीछे हटते हैं, तो यह एक राजनीतिक हार मानी जाएगी।
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