Advertisement

Loading Ad...

ट्रंप ने अपने पैर पर मार ली कुल्हाड़ी! टैरिफ का दांव पड़ा उल्टा, नजदीक आ रहे भारत और चीन, अमेरिका की बढ़ेगी चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ फैसले से भारत और चीन के रिश्तों में नई गरमाहट आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले महीने दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइट सर्विस बहाल हो सकती है. गलवान घाटी झड़प के बाद पांच साल से ठंडे पड़े रिश्तों में यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

Loading Ad...

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि दूसरे देशों पर टैरिफ लगाकर अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है. लेकिन यह नीति उनपर भारी पड़ सकती है. भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देश ट्रंप की इस टैरिफ पॉलिसी के खिलाफ एकजुट हो गए हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका असर साफ दिख रहा है और अब एशिया के दो बड़े पड़ोसी भारत और चीन अपने रिश्तों को नई दिशा देने की ओर बढ़ रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक, अगले महीने की शुरुआत से भारत और चीन के बीच सीधी फ्लाइट सर्विस फिर से शुरू होने की संभावना है. यह संकेत दोनों देशों के बीच तनाव कम होने और आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. ऐसे में जब सीधी फ्लाइट सर्विस शुरू होगी तो सबसे ज्यादा पेट में दर्द अमेरिकी राष्ट्रपति को होगा. क्योंकि उन्हें अच्छे से पता है कि भारत व्यापार के दृष्टिकोण से कितना बड़ा मार्केट है. 

कब से बंद थी उड़ान सेवा?

Loading Ad...

दरअसल, साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन के रिश्तों में गहरी दरार आ गई थी. 15 जून 2020 को लद्दाख के गलवान में चीनी सेना के साथ संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. इसके जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल सीमा पर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई बल्कि कई आर्थिक और राजनयिक कदम भी उठाए. इसमें चीन के निवेश पर पाबंदी, कई चीनी ऐप्स पर बैन और सीधी उड़ानों को निलंबित करना शामिल था. इसके बाद महामारी से पहले दोनों देशों के बीच हर महीने करीब 539 सीधी उड़ानें होती थीं, जिनकी कुल क्षमता 1.25 लाख से ज्यादा सीटों की थी. इन उड़ानों में एअर इंडिया, चाइना साउदर्न एयरलाइंस और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस जैसी कंपनियां शामिल थीं. उड़ान सेवा बंद होने के बाद यात्रियों को बांग्लादेश, हॉन्गकॉन्ग, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे कनेक्टिंग हब के जरिए यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते थे.

Loading Ad...

अब क्यों बदल रहा है माहौल

पिछले साल रूस के कजान में हुए G20 समिट ने भारत-चीन रिश्तों में बर्फ पिघलाने का काम किया. पांच साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने मिले. इस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद और आपसी संबंधों की स्थिति पर चर्चा की और तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति जताई. इसके बाद से डेमचोक और देपसांग जैसे विवादित इलाकों से दोनों देशों की सेनाओं का पीछे हटना, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से अनुमति देना और अब फ्लाइट सर्विस बहाल करने की दिशा में काम करना, यह सब रिश्तों में सुधार के संकेत दे रहे हैं. भारत सरकार ने 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों को वीजा देना भी शुरू कर दिया है, जिसे महामारी और गलवान झड़प के बाद निलंबित कर दिया गया था.

Loading Ad...

टैरिफ वार पर एकजुटता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के खिलाफ भारत, चीन और रूस का रुख भी दिलचस्प है. ट्रंप मानते हैं कि आयातित सामान पर भारी टैरिफ लगाकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ेगा और अमेरिका खुद को अलग-थलग कर सकता है. भारत, चीन और रूस के बीच हाल के दिनों में हुई कूटनीतिक बातचीत ने यह साफ कर दिया है कि वे अमेरिका की इस नीति का कड़ा विरोध करने के लिए तैयार हैं. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और समन्वय देखने को मिल सकता है.

आर्थिक और रणनीतिक मायने

Loading Ad...

भारत और चीन की सीधी फ्लाइट सर्विस शुरू होना केवल परिवहन सुविधा नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अहम है. दोनों देश एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और व्यापारिक संबंधों में सुधार से न केवल द्विपक्षीय कारोबार बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी. फ्लाइट सर्विस बहाल होने से व्यापारियों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा. महामारी और सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच यात्रा बेहद जटिल और महंगी हो गई थी, जिसे अब आसान बनाया जा सकेगा.

यह भी पढ़ें

बता दें कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत-चीन रिश्तों में पूरी तरह सामान्य स्थिति लौट आएंगे. सीमा विवाद, व्यापारिक असंतुलन और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अब भी बने हुए हैं. लेकिन हाल के घटनाक्रम यह जरूर दिखाता है कि दोनों देश टकराव से ज्यादा बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...