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भारतीय मूल के काश पटेल को ट्रंप ने किया FBI चीफ के लिए नॉमिनेट, जानें कौन हैं ये शख्स?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के काश पटेल को FBI चीफ के पद के लिए नामित किया है। काश पटेल का जन्म न्यूयॉर्क में हुआ था, लेकिन उनकी जड़ें भारत के गुजरात राज्य से जुड़ी हैं। उनके माता-पिता 1970 के दशक में युगांडा से कनाडा और फिर अमेरिका पहुंचे थे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के काश पटेल को फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के नए निदेशक पद के लिए नामित किया है। इस नामांकन के बाद, पटेल सीनेट की न्यायिक समिति के समक्ष पुष्टि सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुए, जहां उन्होंने अपने परिवार का परिचय 'जय श्रीकृष्ण' के अभिवादन के साथ कराया, जो उनके भारतीय मूल और गुजरात से विशेष संबंध को दर्शाता है।
कौन है काश पटेल ?
काश पटेल का पूरा नाम कश्यप 'काश' पटेल है। उनकी जड़ें भारत के गुजरात राज्य के वडोदरा शहर से हैं। उनके माता-पिता 1970 के दशक में पूर्वी अफ्रीका के युगांडा से कनाडा और फिर अमेरिका आए थे। 25 फरवरी 1980 को न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में जन्मे पटेल ने रिचमंड विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से अंतर्राष्ट्रीय कानून में प्रमाणपत्र के साथ कानून की डिग्री हासिल की। शुरुआत में, उन्हें शीर्ष कानून फर्मों में नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने एक सार्वजनिक वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। मियामी की अदालतों में लगभग नौ वर्षों तक सेवा देने के बाद, उन्होंने न्याय विभाग में आतंकवाद अभियोजक के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी समूहों से जुड़े मामलों की जांच और अभियोजन का नेतृत्व किया।
ट्रंप प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं
पटेल ने हाउस इंटेलिजेंस कमेटी में रिपब्लिकन सदस्य डेविन नून्स के साथ काम किया, जहां उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की जांच का नेतृत्व किया। उन्होंने 'नून्स मेमो' का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें न्याय विभाग के निगरानी वारंट प्राप्त करने के तरीकों की आलोचना की गई थी। इस मेमो ने काफी ध्यान आकर्षित किया और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी निकटता बढ़ी। ट्रंप प्रशासन के दौरान, पटेल ने राष्ट्रीय खुफिया के कार्यवाहक निदेशक के प्रधान उप-निदेशक के रूप में भी सेवा दी, जहां उन्होंने 17 खुफिया एजेंसियों की देखरेख की और राष्ट्रपति की दैनिक ब्रीफिंग दी।
FBI निदेशक पद के लिए नामांकन
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा एफबीआई के निदेशक पद के लिए नामित किए जाने के बाद, पटेल ने सीनेट की न्यायिक समिति के समक्ष अपनी पुष्टि सुनवाई में भाग लिया। इस दौरान, उन्होंने एफबीआई में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया लाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा, "एफबीआई ने जनता का विश्वास खो दिया है, और यदि मैं एजेंसी का निदेशक बनता हूं, तो मैं उचित प्रक्रिया के साथ पारदर्शिता लाऊंगा।" सुनवाई के दौरान, समिति के सदस्यों ने ट्रंप के प्रति उनकी वफादारी और एफबीआई में संभावित सुधारों के बारे में सवाल किए।
पटेल के माता-पिता का संबंध गुजरात के वडोदरा से है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य भी है। अपने भारतीय मूल और संस्कृति के प्रति गर्व व्यक्त करते हुए, पटेल ने सुनवाई के दौरान अपने माता-पिता और बहन का परिचय 'जय श्रीकृष्ण' के साथ कराया, जो गुजरात में एक आम अभिवादन है। उनका यह कदम उनके भारतीय जड़ों और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
पटेल की एफबीआई निदेशक पद के लिए नामांकन के साथ ही विवाद और आलोचना भी सामने आई है। उनकी ट्रंप के प्रति वफादारी और एफबीआई की पिछली जांचों के प्रति उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियों के कारण, कुछ सीनेटरों ने उनकी निष्पक्षता और एजेंसी के नेतृत्व के लिए उनकी उपयुक्तता पर सवाल उठाए हैं। सीनेट न्यायिक समिति के टॉप डेमोक्रेट सीनेटर डिक डर्बिन ने कहा, "अमेरिका को आतंकवाद, हिंसक अपराध और अन्य खतरों से सुरक्षित रखने में एफबीआई की भूमिका महत्वपूर्ण है, और राष्ट्र को एक एफबीआई निदेशक की जरूरत है जो इस मिशन की गंभीरता को समझता है और इसके लिए तैयार है।"
अब, पटेल की नियुक्ति की पुष्टि के लिए सीनेट की पूर्ण मंजूरी आवश्यक होगी। अगर उनकी नियुक्ति की पुष्टि होती है, तो वह एफबीआई के पहले भारतीय-अमेरिकी निदेशक बनेंगे, जो भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय होगा। हालांकि, उनकी नियुक्ति के साथ जुड़े विवाद और चुनौतियां उनके नेतृत्व के लिए एक कठिन राह प्रस्तुत कर सकती हैं।
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