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टैरिफ दर लागू कर बुरे फंसे ट्रंप... कर्ज के दलदल में फंसा अमेरिका, 1 लाख की कमाई और 6 लाख का कर्ज, एक्सपर्ट्स ने बताया बड़ा खतरा

एक पॉडकास्ट में स्कॉट गैलोवे के साथ जाने माने फंड मैनेजर रे डेलियो ने कहा है कि 'अमेरिकी सरकार इस साल लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेगी और लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर कमाएगी. यानी सरकार अपनी कमाई से करीब 40 प्रतिशत फंड ज्यादा खर्च करेगी. यह कमाई का कुल 6 गुना है. मतलब कि अगर कोई व्यक्ति 1 लाख कमाता है, तो उस पर 6 लाख रुपए का कर्ज है.'

टैरिफ दर लागू कर बुरे फंसे ट्रंप... कर्ज के दलदल में फंसा अमेरिका, 1 लाख की कमाई और 6 लाख का कर्ज, एक्सपर्ट्स ने बताया बड़ा खतरा
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अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है. टैरिफ युद्ध छेड़कर अपनी अकड़ में चूर डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों से ऐसा लग रहा है कि उन्होंने अमेरिका को बर्बाद करने का पूरा जिम्मा उठा लिया है. पूरी दुनिया में भारी टैरिफ दर से तबाही लाने वाले ट्रंप खुद अपने ही जाल में फंसते नजर आ रहे हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार के पास जितनी कमाई नहीं है, उससे कहीं ज्यादा खर्च और उसके ऊपर कर्ज है. इस बीच जाने-माने हेज फंड मैनेजर रे डेलियो ने अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अमेरिका एक ऐसे वित्तीय संकट से जूझ रहा है, जहां उसके ऊपर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. इसका हल अगर नहीं निकाला गया, तो आगे इसे ठीक करना काफी मुश्किल होगा. 

7 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर 5 ट्रिलियन डॉलर कमाएगी 

बता दें कि एक पॉडकास्ट में स्कॉट गैलोवे के साथ जाने माने फंड मैनेजर रे डेलियो ने कहा है कि 'अमेरिकी सरकार इस साल लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर खर्च करेगी और लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर कमाएगी. यानी सरकार अपनी कमाई से करीब 40 प्रतिशत फंड ज्यादा खर्च करेगी. यह कमाई का कुल 6 गुना है. मतलब कि अगर कोई व्यक्ति 1 लाख  कमाता है, तो उस पर 6 लाख रुपए का कर्ज है. 

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खतरे के निशान के करीब अमेरिका

डेलियो ने बताया कि 'अमेरिका को अगले साल अकेले 12 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज चुकाना होगा या उसे फिर से जारी करना होगा. इसमें लगभग 9 ट्रिलियन डॉलर कर्ज बढ़ रहे हैं. इनमें 2 ट्रिलियन डॉलर नए कर्ज हैं, जो घाटे को पूरा करने के लिए जारी किए जाएंगे.' 

1 ट्रिलियन डॉलर सिर्फ ब्याज चुकाने में जाएंगे 

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उन्होंने यह भी बताया कि '1 ट्रिलियन डॉलर सिर्फ ब्याज चुकाने में जाएंगे, जो बजट घाटे का आधा है. आपको बहुत सारा कर्ज बेचना होगा. हम अब एक ऐसे बिंदु पर हैं, जहां बहुत सारा कर्ज जुड़ जाएगा, जो एक लेवल के करीब है. इसका मतलब है कि अमेरिका कर्ज के मामले में खतरे के निशान के करीब है.' 

कैसे उत्पन्न होगी राजनीतिक समस्या?

डेलियो ने फेड के पूर्व अध्यक्षों केंद्रीय बैंक के प्रमुखों और ट्रेजरी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत का भी हवाला दिया. इस दौरान उन्होंने इसे एक 'राजनीतिक समस्या' बताया. उनका कहना है कि कानूनविद निजी तौर पर मानते हैं कि घाटे को स्थिर करने के लिए टैक्स में वृद्धि और खर्च में कटौती की आवश्यकता है. 

आखिर क्या है इसका समाधान? 

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अमेरिका को कर्ज से बचने के लिए डेलियो ने 3 प्रतिशत का एक समाधान सुझाव दिया. इसके अनुसार घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के लगभग 3 प्रतिशत तक लाना, जो कि वर्तमान में यह 6-7 प्रतिशत है. वहीं अमेरिका को करों में 4 प्रतिशत की वृद्धि और खर्च में 4% की कटौती करनी होगी. हालांकि, इससे अमेरिका पूरी तरह से कर्ज से नहीं निकल पाएगा, लेकिन इससे कर्ज की आपूर्ति-मांग की तस्वीर में सुधार होगा, इससे ब्याज की दरें कम होंगी. कम ब्याज दरें कर्ज को चुकाने में आसान बना देंगी, उनका कहना है कि इससे एक चिंता यह भी है कि बॉन्ड खरीदार डर सकते हैं. 

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एक्सपर्ट्स के दावे से साफ है कि अमेरिका खुद बुरे हालातों से जूझ रहा है, लेकिन उसके बावजूद दूसरे देशों से रिश्ते अच्छे करने के बावजूद वह टैरिफ दर को सामान्य न करते हुए भारी-भरकम वाली दर लगा रहा है. बता दें कि अमेरिका ने भारत पर भी 50 प्रतिशत का टैरिफ दर लगाया है.

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