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ट्रंप सरकार की तानाशाही... स्टूडेंट वीजा के इंटरव्यू पर लगाई रोक, छात्रों की मुश्किलें बढ़ीं
ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों को नया निर्देश जारी किया है. इसके तहत तत्काल प्रभाव से छात्र (F), व्यवसायिक (M) और एक्सचेंज विजिटर (J) वीजा इंटरव्यू की नई अपॉइंटमेंट्सपर फिलहाल रोक लगा दी है.
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज कल अपने फैसलों को लेकर लगातार वैश्विक खबरों में छाए हुए हैं. ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों को नया निर्देश जारी किया है. इसके तहत तत्काल प्रभाव से छात्र (F), व्यवसायिक (M) और एक्सचेंज विजिटर (J) वीजा इंटरव्यू की नई अपॉइंटमेंट्सपर फिलहाल रोक लगा दी है. ट्रंप के इस कदम से विदेशी छात्रों के लिए अनिवार्य सोशल मीडिया स्क्रीनिंग लागू करने की व्यापक योजना का हिस्सा है. इस जांच प्रणाली की जद में कई देशों के छात्र सीधेतौर पर आएंगे.
इसको लेकर पोलिटिको की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है, इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री रुबियो मार्को द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेजों का हवाला दिया है. इसमें साफ कहा गया है कि आवश्यक सोशल मीडिया जांच के विस्तार की तैयारी में किसी भी नए एक्सचेंज विजिटर वीजा के साक्षात्कार को शिड्यूल नहीं करना है. जब तक कोई अगला आदेश न दिया जाए. अमेरिका का यह आदेश बताता है कि विदेशी छात्रों की डिजिटल गतिविधियों की कई पहलुओं पर जांच की तैयारी है. हालांकि, अमेरिकी सरकार द्वारा यह स्पष्ट नहीं नई जांच प्रणाली किन पहलुओं पर केंद्रित रहेगी.
क्या है अमेरिका की मंशा?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की इस नीति की जड़े उन कार्यकारी आदेशों से जुड़ी है, जो आतंकवाद विरोधी उपायों और यहूदी-विरोध के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित है. बताया जा रहा है कि यह फैसला हाल के महीनों में गाजा और इजरायल को लेकर अमेरिकी कैंपसों में लगातार हुए विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर लिया गया है. बता दें पिछले साल के अंत में ट्रंप सरकार ने कुछ छात्रों को सोशल मीडिया स्क्रीनिंग के तहत रखा था. जो इजरायल के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़े हुए पाए गए थे.
अमेरिकी विदेश विभाग का बयान
छात्रों के वीजा से जुड़े मामले को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टैमी ब्रूस का मानना है कि सरकार व्यक्तिगत वीजा मामलों या उनमें लिए गए फैसले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करती. अमेरिका में आने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से लिया जाता है. और यह प्रोसेस भविष्य में भी जारी रहेगा. टैमी ब्रूस ने कहा “अमेरिका आने वाला कोई छात्र हो, पर्यटक हो या किसी भी रूप में आने वाला वीजा धारकों की हमें जांच करनी है. इसको किसी प्रकार से विवादास्पद नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि यह फैसला सुरक्षा और सामाजिक हितों रक्षा के लिहाज से लिया गया है. ट्रंप प्रशासन है सबसे पहली प्राथमिकता है कि अमेरिका आने वाले लोग कानून का पालन करें, आपराधिक मानसिकता ना रखें और सकारात्मक भूमिका के साथ यहां प्रवास करें.
विश्वविद्यालयों पर होगा आर्थिक असर
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को लेकर जानकारों का मानना है कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति पर भी अच्छा खासा प्रभाव डालेगा. National Association of Foreign Student Advisers (NAFSA) की रिपोर्ट बताती है कि ये छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 43.8 अरब डॉलर का योगदान करते हैं और इससे 3.78 लाख नौकरियां पैदा होंगी. इसके साथ ही स्थानीय रोजगार भी प्रभावित होंगे. बता दें कि राष्ट्रतपि ट्रंप ने हाल के दिनों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों को नामांकित करने के अधिकार को छिनने का प्रयास किया था. हालांकि अमेरिका की एक स्थानीय अदलत ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी. इस फैसले से गुस्साए ट्रंप हार्वर्ड विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों की लिस्ट मंगवाई थी. उन्होंने कहा था कि विदेशी छात्र का अमेरिका की शिक्षा प्रणाली में कोई भी योगदान नहीं है, सिर्फ लाभ उठाने के मकसद से छात्र बने हुए है.
बताते चलें की अमेरिकी सरकार के इस फैसले से यहां आने वाले छात्रों में चिंता बढ़ गई है. एक तो पहले से वीजा का इंतजार करना पड़ता है और अब सोशल मीडिया जांच की वजह से यह प्रक्रिया और भी धीमी हो सकती है. इस जांच प्रणाली की जद में भारत, चीन, कोरिया, ब्राजील और नाइजीरिया जैसे देशों के छात्र ज्यादा आएंगे. वही विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में यह प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले समय में अमेरिका की वैश्विक शैक्षणिक नेतृत्व की स्थिति संकट में पड़ सकती है.
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