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क्लास मिस तो वीजा रद्द! ट्रंप सरकार के नए फरमान से गिरी भारतीय छात्रों पर गाज
अमेरिकी दूतावास ने एक बार फिर विदेशी छात्रों के लिए एडवायजरी जारी की है. जिसमें कहा गया है कि अपनी वीजा की शर्तों का पालन सख्ती से करें, नहीं तो उन्हें अमेरिका से वापस भेजा जा सकता है.
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ट्रंप प्रशासन तो भारत से दुश्मनों की तरह बर्ताव करने लगा है. मंगलवार को भारत में अमेरिकी दूतावास ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए फिर से एक सख्त एडवाइजरी जारी कर दी है, जिससे छात्रों में हड़कंप मच गया है. इस एडवाइजरी में खासतौर पर भारतीय छात्रों को आगाह किया गया कि वे अपनी वीजा की शर्तों का पालन सख्ती से करें, नहीं तो उन्हें अमेरिका से वापस भेजा जा सकता है.
अमेरिकी दूतावास का तालिबानी फैसला!
अमेरिकी दूतावास ने कहा, हमने हाल के हफ्तों में देखा है कि कई इंटरनेशनल छात्रों का वीजा बिना किसी पूर्व सूचना के रद्द कर दिया गया. कुछ की लीगल स्टेटस खत्म हो गई क्योंकि उन्होंने क्लास नहीं अटेंड की, या कोर्स बीच में छोड़ दिया. यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में कई भारतीय छात्र वर्क लोड, मानसिक तनाव या अन्य कारणों से अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ रहे हैं. लेकिन अब ऐसा करना भारी पड़ सकता है.
वीजा शर्तों का पालन करें
दूतावास ने साफ तौर पर कहा, हमेशा अपनी वीजा शर्तों का पालन करें और छात्र स्टेटस को बनाए रखें, नहीं तो आपको भविष्य में भी वीजा मिलने में परेशानी हो सकती है. हाल के दिनों में कुछ छात्रों को इस तरह की सजा मिलने के बाद सोशल मीडिया पर भी चिंता फैल गई है. कई छात्रों को वीजा कैंसिल होने के बाद डिपोर्ट कर दिया गया, जबकि कुछ को अमेरिका में आगे किसी भी वीजा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया. छात्रों और उनके परिवारों को अब अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है. विश्वविद्यालय में किसी भी प्रकार की अनुपस्थिति या कोर्स से जुड़े बदलाव को तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करना जरूरी हो गया है.
ये फरमान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका में विदेशी छात्रों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है, कई छात्रों के वीजा अचानक तो कई के बिना पूर्व सूचना के रद्द कर दिए गए है. इनमें कुछ मामले फिलिस्तीन समर्थक होने, विरोध प्रदर्शन में भाग लेने, ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन करने या वीज़ा शर्तों को न मानने वाले छात्र शामिल हैं. ट्रंप प्रशासन विदेशी छात्रों पर लगातार अपनी सख्त नितियां थोप रही है. हाल ही में हावर्ड यूनिवर्सिटी को नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन से वंचित कर दिया था, जिसने लगभग 788 भारतीय छात्र सहित हज़ारों छात्रों को प्रभावित किया.
चिंता की बात यह है कि कई बार न तो छात्र और न ही उनकी यूनिवर्सिटी को यह पता चलता है कि छात्र की जानकारी SEVIS सिस्टम से हटा दी गई है. SEVIS एक वेब-आधारित प्रणाली है जिसे अमेरिका का होमलैंड सिक्योरिटी विभाग अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर निगरानी रखने के लिए संचालित करता है. यह चेतावनी भारतीय छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में 3 लाख से अधिक भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो वहां के विश्वविद्यालयों में दूसरा सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह है.
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