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इंडियंस को जबरन डिपोर्ट करने में लगे थे ट्रंप, US कोर्ट से लगा करारा झटका, दो अन्य भारतीयों को रिहा करने के आदेश

भारतीयों को जबरन जबरन डिपोर्ट करने में लगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. अदालत ने अधिकारियों को ना सिर्फ फटकार लगाई है बल्कि दो अन्य इंडियंस को रिहा करने के आदेश दिए हैं. इतना ही नहीं बिना नोटिस गिरफ्तारी से भी रोक लगा दी है.

Donald Trump (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जबरन डिपोर्ट करने के मामले में एक के बाद एक झटके लग रहे हैं. शरणार्थियों के मुद्दे पर उन्हें कोर्ट में चुनौती भी दी जा रही है, जहां से उन्हें तगड़ी फटकार लग रही है. इतना ही नहीं अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आ रही खबरों से पता चल रहा है कि अमेरिकी अधिकारी प्रवासियों के खिलाफ नफरती, पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्रवाईयां कर रहे हैं. इस दौरान वो जानबूझकर तथ्यों को इग्नोर कर रहे हैं और लोगों को परेशान कर रहे हैं. अब इस पर वैध रूप से अमेरिका गए भारतीय डटकर मुकाबला कर रहे हैं और उन्हें कोर्ट में घसीट भी रहे हैं.

भारतीयों को तुरंत रिहा करने का आदेश!

आपको बता दें कि एक ऐसा ही एक मामला शामने आया है जहां अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप को करारा झटका दिया है. कैलिफोर्निया में अमेरिका के फेडरल जजों ने इमिग्रेशन अधिकारियों को दो भारतीय नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि बिना सुनवाई के उन्हें हिरासत में रखना शायद संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है.  

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ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिका में सख्त हुई प्रवासी नीति

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिका में प्रवासी नीतियों को बदल कर सख्त कर दिया गया है. इसके बाद से ही आईसीई अधिकारियों ने अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के लिए सख्त जांच शुरू कर दी है. 

कोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार

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इससे पहले कोर्ट की तरफ से इसी मामले में तीन भारतीयों को रिहा करने का आदेश दिया था. ये आदेश इस हफ्ते पूर्वी कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला कोर्ट ने जारी किया. दोनों मामलों में, कोर्ट ने पाया कि इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) ने इन लोगों को कस्टडी में रखने से पहले नोटिस, सुनवाई या कानूनी वजह नहीं दी.

कोर्ट ने किरणदीप को रिहा करने का दिया आदेश!

एक मामले में, चीफ यूएस जिला जज ट्रॉय एल ननली ने किरणदीप को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया. किरणदीप भारत की नागरिक हैं और वह दिसंबर 2021 में अमेरिका आई थीं. इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में शरण भी मांगी थी. कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, किरणदीप जांच के साथ आई थीं और रिहा होने से पहले उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था. इमिग्रेशन अधिकारियों ने उस समय तय किया था कि वह समुदाय के लिए कोई खतरा नहीं थीं या भागने का खतरा नहीं था.

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वैलिड डॉक्यूमेंट् होने के बावजूद किरणदीप को हिरासत में लिया गया था

कोर्ट के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, वह चार साल से ज्यादा समय से कैलिफोर्निया में रह रही थीं. अपने चार सालों के दौरान किरणदीप ने आईसीई और अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा के साथ सभी तय समय में जांच के लिए हिस्सा लिया. किरणदीप कैलिफोर्निया में अपने साझेदार के साथ रहती थीं. 

सितंबर 2025 में, किरणदीप को एक रूटीन आईसीई चेक-इन के दौरान हिरासत में लिया गया था. अधिकारियों ने कहा कि वह पहले एक तय समय पर आईसीई के सामने पेश नहीं हुई थीं. हालांकि, अपनी अनुपस्थिति के लिए उन्होंने एक सही वजह बताई और अगले दिन चेक-इन किया. किरणदीप की अनुपस्थिति के कारणों को आईसीई ने उसी समय मान लिया था.

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दोबारा गिरफ्तारी पर भी कोर्ट ने लगाई रोक

जज ननली ने फैसला सुनाया कि बिना सुनवाई के उन्हें लगातार हिरासत में रखना शायद सही प्रक्रिया का उल्लंघन है. इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और अधिकारियों को बिना नोटिस के उन्हें दोबारा गिरफ्तार करने से रोक दिया.

एक अन्य भारतीय को भी रिहा करने का आदेश

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एक अलग फैसले में, जज ननली ने रोहित को रिहा करने का आदेश दिया, जो एक भारतीय नागरिक है. उनका अमेरिका में शरण लेने का दावा पेंडिंग है. रोहित नवंबर 2021 में बिना इंस्पेक्शन के अमेरिका आए थे और उन्होंने भारत में राजनीतिक उत्पीड़न का डर बताया था. रोहित को जून 2025 में हिरासत में लिया गया था. वह बिना बॉन्ड सुनवाई के सात महीने से ज्यादा समय तक हिरासत में रहा.

कोर्ट ने सुनवाई में क्या पाया

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कोर्ट ने पाया कि रोहित के समुदाय के साथ रिश्ते थे और सरकार सुनवाई का इंतजाम करने या यह बताने में नाकाम रही कि लगातार हिरासत क्यों जरूरी थी. जज ननली ने फैसला सुनाया कि बिना किसी प्रक्रिया के उसे हिरासत में रखने से गलत तरीके से आजादी छीनने का गंभीर खतरा पैदा होता है. उन्होंने रोहित को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया. दोनों मामलों में, कोर्ट ने कहा कि जब इमिग्रेशन अधिकारी किसी व्यक्ति को कस्टडी से रिहा करती है, तो उस व्यक्ति को सुरक्षित आजादी का हक मिल जाता है.

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