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ट्रंप ने भारतीयों को दिया H-1B पर झटका, कनाडा ने झट से लपका, H-1B पर वीजा पर PM मार्क कार्नी का बड़ा ऐलान

अमेरिका ना सही, कनाडा, जापान, रूस सहित कई देशों ने टैलेंटेड भारतीयों को लेकर बांहें फैला लिए हैं. डोनाल्ड ट्रंप के H-1B पर दिए झटके के बाद कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने इंडियन पेशेवरों को लेकर बड़ा ऐलान किया है. कार्नी के ऐलान से ना सिर्फ भारत-कनाडा के रिश्ते फिर मजबूत होंगे बल्कि यूएस के खिलाफ एक अन्य विकल्प भी पैदा होंगे

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अमेरिका को Land of Opportunities कहा जाता है. उसकी सत्ता, ताकत और बादशाहत की एक मुख्य और बड़ी वजह ये है कि दुनियाभर के स्किल्ड, पढ़े-लिखे लोग वहां पहुंचते हैं और उसकी तरक्की में योगदान देते हैं. अपनी मेहनत से वो चीजें तैयार करते हैं और उसे चलाते हैं जिसके कारण US की आज सुप्रीमेसी है, लेकिन ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसकी तिलांजलि देने पर तुले हुए हैं. इसी कारण तो उन्होंने हाल ही में H-1B वीजा पर आवेदन शुल्क 100% बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया है. ट्रंप के इस ऐलान के बाद दुनिया के कई देश, मसलन कनाडा, जापान, सिंगापुर भारतीयों को अपने यहां लेने की इच्छा दिखा रहे हैं, बाहें फैला रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क को लेकर पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है. जानकारों की मानें तो इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत पर होगा. यूएस द्वारा लॉटरी सिस्टम से हर साल निकाले जाने वाले करीब 85 हजार H-1B के 80% से ज्यादा धारक या लेने वाले इंडियंस होते हैं. कहा जा रहा है कि ट्रंप के इस फरमान से MNCs कुछ समय के लिए या आगे भी भारतीयों को कम हायर करेंगे या उनके वेजेज कम हो जाएंगे. 

कनाडा के पीएम का भारतीयों को लेकर बड़ा ऐलान

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इसी बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का बड़ा बयान सामने आया है. उनके बयान से भारत और कनाडा के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशों को लेकर संकेत मिले हैं. दरअसल उन्होंने कहा है कि उनका देश उन सभी स्किल्ड पेशेवरों का स्वागत करेगा जो ट्रंप के संशोधित एच-1बी वीज़ा आवेदन शुल्क से प्रभावित होंगे।

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भारत के दौरे पर आ रही हैं कनाडाई विदेश मंत्री

आपको बता दें कि कनाडा की भारतीय मूल की विदेश मंत्री अनीता आनंद अक्टूबर के मध्य में अपनी पहली यात्रा पर भारत आने वाली हैं. ठीक उस से पहले कनाडाई पीएम कार्नी की तरफ से ये घोषणा करना बड़ा संकेत है. कहा जा रहा है अनीता के नई दिल्ली दौरे के दौरान इस संबंध में औपचारिक ऐलान भी हो सकता है ताकि ट्रूडो सरकार में जमी बर्फ पिघल सके और रिश्तों में थोड़ी बहुत गर्मजोशी आ सके.

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पीएम कार्नी की ये घोषणा महज जॉब हायरिंग नहीं बल्कि दोनों देशों को बीच रिश्तों को सुधारने और कनाडाई सरकार की भारत के प्रति बदलते दृष्टिकोण की ओर इशारा है. ज्ञात हो कि पिछली लेफ्ट लिबरल जस्टिन ट्रूडो सरकार के दौरान खालिस्तानी आतंकियों के संरक्षण, फंडिंग और हस्तक्षेप के मुद्दे पर भारत और कनाडा के बीच रिश्ते सालों तक तनावपूर्ण रहे थे. ऐसे में कार्नी का भारतीयों को लेकर किए गए ऐलान से राहत संकेत मिले हैं कि कनाडा महंगाई, ट्रेड, सर्विसेज के मुद्दे पर भारत के साथ अपने रिलेशन को डेसपरेटली बढ़ाना और पटरी पर लाना चाहता है.

पीएम कार्नी ने भारतीय पेशेवरों को लेकर क्या कहा?

कार्नी ने शनिवार को लंदन में कहा: "यह स्पष्ट है कि यह उन लोगों को आकर्षित करने का अवसर है जिन्हें पहले तथाकथित एच-1बी वीज़ा मिलता था और मैं इसे सरल बनाने जा रहा हूं. इनमें से एक बड़ा समूह तकनीकी (IT) क्षेत्र है." उन्होंने आगे कहा कि "उनमें से ज़्यादा लोगों (एच-1बी वीज़ा धारकों) को अमेरिका का वीज़ा नहीं मिलेगा. ये लोग कुशल हैं और यह कनाडा के लिए एक अवसर है, हम जल्द ही इस पर एक प्रस्ताव लाएंगे."

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ट्रूडो सरकार में क्यों हुए थे संबंध तनावपूर्ण?

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गौरतलब हो कि सितंबर 2023 में भारत और कनाडा के संबंध उस वक्त बिगड़ गए थे जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जून 2023 में कनाडा स्थित खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत होने का अपनी संसद में सीधा आरोप लगाया. हालांकि उन्होंने इस संबंध में कभी भी सबूत नहीं दिए और ना ही कोई ऐसा स्पेसिफिक एंगल दिया जिससे उनके आरोप सही साबित होते. वहीं भारत ने इन आरोपों को न केवल खारिज किया बल्कि उन्हें बेतुका और पूर्वाग्रह से प्रेरित भी बताया. इस तनाव के चलते दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में गिरावट आई और दोनों पक्षों ने अपने-अपने यहां से उच्चायुक्तों तथा अन्य वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित कर दिया.

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