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ईरान को लेकर ट्रंप के बदले तेवर… इजरायल को लगाई फटकार, कहा – FORDOW को मिटाना आसान नहीं

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग लगातार उग्र होती जा रही है. दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रही हैं. ईरान के कई शहरों में भारी तबाही देखी जा रही है. इस बीच इजरायल की नजर अब ईरान के परमाणु ठिकानों पर है. इजरायल ने अमेरिका से मदद की अपील की है. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक अहम बयान सामने आया है, जो अमेरिका की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है.

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ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग लगातार उग्र होती जा रही है. दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रही हैं. ईरान के कई शहरों में भारी तबाही देखी जा रही है. इस बीच इजरायल की नजर अब ईरान के परमाणु ठिकानों पर है. खासतौर पर फोर्डो (Fordow) न्यूक्लियर प्लांट को लेकर इजरायल ने अमेरिका से मदद की अपील की है. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक अहम बयान सामने आया है, जो अमेरिका की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है.

मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना भेजना 'आखिरी विकल्प' होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि “हमारे पास अभी अधिकतम दो हफ्तों का समय है.” ट्रंप ने यह भी माना कि इजरायल के पास फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता नहीं है. उन्होंने कहा, “इजरायल की क्षमता सीमित है. वे फोर्डो के एक हिस्से को हल्का नुकसान तो पहुंचा सकते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते.” जानकारी देते चले कि फोर्डो न्यूक्लियर फैसिलिटी ईरान के सबसे सुरक्षित और भूमिगत परमाणु ठिकानों में से एक मानी जाती है. ऐसे में इजरायल की कोशिश है कि वह अमेरिका के सैन्य सहयोग से इसे नष्ट कर दे. हालांकि ट्रंप के बयान से साफ हो गया है कि अमेरिका इस दिशा में फिलहाल सतर्क रुख अपना रहा है.

ईरान कुछ ही हफ्तों में बना सकता है न्यूक्लियर बम: अमेरिका
ईरान-इजरायल जंग के बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान के पास अब परमाणु बम बनाने की पूरी क्षमता मौजूद है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अगर ईरान के सुप्रीम लीडर आदेश दें, तो तेहरान कुछ ही हफ्तों में न्यूक्लियर बम तैयार कर सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन से लेकर विस्फोटक तकनीक तक, बम निर्माण के लिए आवश्यक सभी सामग्रियां और तकनीकी क्षमताएं मौजूद हैं. कैरोलिन लेविट ने यह भी चेताया कि अगर ईरान ने वाकई परमाणु बम तैयार कर लिया, तो यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएगा. इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर असर पड़ेगा.

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बौखलाया ईरान, तेल अवीव पर बरसाईं मिसाइलें
ईरान और इजरायल के बीच जंग अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है. 12 जून को इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर एक बड़ा हमला किया. इस हमले को ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ के नाम से अंजाम दिया गया. इजरायली वायुसेना द्वारा किए गए इस हमले में फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान जैसे महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया. हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. बौखलाए ईरान ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव सहित कई रिहायशी इलाकों पर मिसाइलें दागीं. इसके बाद से दोनों ओर से लगातार हमले हो रहे हैं. 

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फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट पर दुनिया की नजर
इस बीच ईरान का फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इसका निर्माण ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की सैन्य इकाई के तहत किया गया था. यह प्रतिष्ठान ईरान के पवित्र शहर कौम के उत्तर-पूर्व में स्थित है और पहाड़ों के नीचे छिपा हुआ है, जो इसे हवाई हमलों से काफी हद तक सुरक्षित बनाता है. फोर्डो का मुख्य उद्देश्य यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) है, जो परमाणु ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ हथियार निर्माण की दिशा में भी इस्तेमाल होता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस प्लांट का निर्माण बेहद गोपनीय ढंग से किया था. 2009 में जब पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने इसका खुलासा किया, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी जानकारी मिली थी। इसके बाद से फोर्डो को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है, खासकर मौजूदा हालात में जब इजरायल इसे निशाना बना चुका है.

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ईरान ने भारत के लिए खोला एयरस्पेस
गौरतलब है कि ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन सिंधु’ शुरू किया है. ईरान सरकार ने भारत के लिए अपने एयरस्पेस को विशेष रूप से खोल दिया है ताकि राहत और बचाव कार्य में कोई बाधा न आए. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार रात 290 भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया. इससे पहले 19 जून को 110 भारतीयों को ईरान से निकाला गया था. इस ऑपरेशन के तहत अगले दो दिनों में करीब एक हजार भारतीयों को निकाले जाने की योजना है. भारत सरकार, ईरान के सहयोग से, युद्धग्रस्त इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों को तेजी से निकालने में जुटी है.

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