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ट्रंप ने सिख सैनिकों को दिया धोखा! अमेरिकी सेना में दाढ़ी रखने पर लगा दिया बैन, लोग बोले- ये विश्वासघात है

ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका सेना में धार्मिक आधार पर दी जाने वाली छूटों को खत्म कर दिया है. नई नीति के अनुपालन के बाद सिख सैनिकों की US आर्मी में बहाली मुश्किल हो जाएगी. और तो और जो सिख सैनिक फिलहाल काम कर रहे हैं उनकी सर्विस पर भी खतरा मंडराने लगा है.

Donald Trump (File Photo)
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अमेरिकी सेना में सिख समुदाय से आने वाले लोगों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है. नए सिखों की बहाली तो मुश्किल होगी ही बल्कि जो पुराने हैं उनके भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगा है. अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की हालिया और नई ग्रूमिंग नीति ने सिख, मुस्लिम और यहूदी जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाले लोगों में चिंता पैदा कर दी है. 

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से जारी मेमो को देखें तो US Army में सैन्य दाढ़ी रखने की छूट को लगभग समाप्त कर दिया गया है. यानी कि जो सिखों के लिए एक तरह से अमेरिकी सेना के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे. क्योंकि एक सिख के लिए दाढ़ी उनकी धार्मिक पहचान का अभिन्न अंग है. दाढ़ी को एक सिख से अलग करके देखना आसान नहीं होगा. हेगसेथ की नई नीति 2010 से पहले चलने वाले नीति की ओर लौटने का आदेश देती है, जिसमें दाढ़ी की छूट की सामान्यतः अनुमति नहीं होगी.

ट्रंप प्रशासन ने खत्म की सैनिकों के लिए धार्मिक छूटों की संख्या!

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आपको बता दें कि बीते 30 सितंबर को अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी हेगसेथ ने "सुपरफिशियल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति" जैसे दाढ़ी को समाप्त करने की घोषणा की. मरीन कॉर्प्स बेस क्वांटिको में 800 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 'हमारे पास नॉर्डिक पगानों की सेना नहीं है, जो ये छूटें दी जानी चाहिए. 

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रक्षा सचिव के इस बयान के कुछ घंटों के अंदर ही पेंटागन ने इस संबंध में सभी सैन्य शाखाओं को निर्देश जारी कर दिया और दाढ़ी सहित अधिकांश धार्मिक छूट को 60 दिनों के भीतर समाप्त करने का आदेश दिया गया. जानकारी के मुताबिक यह नीति स्पेशल फोर्सेज के लिए स्थानीय आबादी में घुलमिलने के उद्देश्य से दी जाने वाली अस्थायी छूटों को छोड़कर बाकी सभी को प्रभावित करेगी.

ट्रंप 01 में दी गई थी सिखों को छूट

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वहीं इससे पहले 2017 में सेना ने अपने निर्देश संख्या 2017-03 के तहत सिख सैनिकों के लिए दाढ़ी और पगड़ी की स्थायी छूट को हरी झंडी दे दी थी. सिखों के अलावा इसी तरह की छूट मुस्लिमों, ऑर्थोडॉक्स यहूदी और नॉर्स पगान सैनिकों को भी धार्मिक आधार पर दी गई थी.

जुलाई में आई नई नीति

आपको बता दें कि जुलाई 2025 में अमेरिकी सेना ने चेहरे के बालों की नीति को लेकर अपनी नीति को अपडेट किया था, लेकिन धार्मिक छूट को बरकरार रखा था. अब कहा जा रहा है कि ये नई नीति दुनिया में धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करने के प्रगतिशील सोच के को उलट है. ये 1981 के सुप्रीम कोर्ट के गोल्डमैन बनाम वेनबर्गर को लेकर दिए गए फैसले से प्रेरित सख्त ग्रूमिंग नियमों की तरह है.

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सिख समुदाय ने दी ट्रंप प्रशासन के फैसले पर प्रतिक्रिया

अमेरिकी सेना में दाढ़ी को लेकर आई नई नीति पर सिख कोअलिशन की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. आपको बता दें कि ये संगठन अमेरिकी सेना में सिख सैनियों के अधिकार के लिए काम करता है. अब उसने हेगसेथ की टिप्पणियों की तीखी आलोचना की है.

सिख कोअलिशन ने कहा कि सिखों के लिए केश (अकाटे बाल) उनकी पहचान का अभिन्न अंग है, और यह नीति वर्षों की समावेशिता की लड़ाई को धोखा देने जैसी है. वहीं एक सिख सैनिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मेरे केश मेरी पहचान है. यह सामाजिक सौहार्द या समावेशिता के लिए विश्वासघात जैसा है."

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लंबा है सिखों का अमेरिकी सेना में काम करने का इतिहास

सिख समुदाय का अमेरिकी सेना में योगदान देने का लंबा इतिहास रहा है. ये प्रथम विश्व युद्ध से चला आ रहा है. आपको बता दें कि 1917 में भगत सिंह थिंड पहले ज्ञात सिख थे जिन्हें अमेरिकी सेना में भर्ती होते हुए भी पगड़ी पहनने की अनुमति मिली थी.

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हालांकि 1981 के बाद नियम सख्त हो गए, फिर भी 2011 में रब्बी मेनाचेम स्टर्न, 2016 में कैप्टन सिमरतपाल सिंह और 2022 में सिंह बनाम बर्गर मामले में अदालतों के फैसलों ने सिखों को दाढ़ी और पगड़ी रखने के अधिकार को और मजबूत किया. सिख कोअलिशन का कहना है कि दाढ़ी रखना सैन्य सेवा में बाधा नहीं है, क्योंकि सिख सैनिक गैस मास्क टेस्ट सफलतापूर्वक पास कर चुके हैं.

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