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भारत के सख्त स्टैंड के आगे बैकफुट पर आए ट्रंप, कहा- PM मोदी से बातचीत के लिए उत्सुक हूं, व्यापार वार्ता सफल होगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन आत्मनिर्भर और मजबूत होती भारतीय अर्थव्यवस्था ने झुकने से इनकार कर दिया. नतीजतन ट्रंप अब बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना बहुत अच्छा दोस्त बता रहे हैं और आगामी हफ्तों में उनसे सफल व्यापार वार्ता की उम्मीद जता रहे हैं.

Donald Trump/ Narendra Modi (File Photo)
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वैश्विक राजनीति और व्यापार की दुनिया में भारत और अमेरिका के रिश्ते हमेशा से ही खास माने जाते रहे हैं. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पहले तो टैरिफ बम फोड़कर दबाव बनाने की कोशिश की थी. उन्हें लगा था कि भारत झुक जाएगा. लेकिन आज का भारत पहले जैसा नहीं है. भारत अब आत्मविश्वास से भरा हुआ है और अपनी अर्थव्यवस्था की ताकत के साथ दुनिया में नई दिशा तय कर रहा है. यही वजह है कि ट्रंप का रुख बदल गया है और अब वह बार-बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना 'बहुत अच्छा दोस्त' बता रहे हैं.

अमेरिका पर दबाव में नहीं झुका भारत 

पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने भारत पर व्यापारिक मोर्चे पर दबाव बनाने की कोशिश की. ट्रंप प्रशासन ने कई वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए और भारत से रियायतें चाहीं. लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा. यही नई सोच आज दुनिया को दिखा रही है कि भारत किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला देश नहीं रहा. भारत ने इसके बजाय नए वैश्विक विकल्पों की तलाश शुरू की. दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप और अफ्रीका के साथ व्यापार बढ़ाने की योजनाएं बनाईं. और यह वही कदम थे जिसने ट्रंप को सोचने पर मजबूर कर दिया कि भारत से टकराना आसान नहीं है.

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ट्रंप की अकड़ पड़ी ढीली 

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मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि उन्हें खुशी है कि भारत और अमेरिका व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं अपने बहुत अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी से आगामी हफ्तों में बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं. मुझे यकीन है कि यह वार्ता हमारे दोनों महान देशों के लिए सफल परिणाम लेकर आएगी.” यह बयान साफ करता है कि अमेरिका अब भारत को नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है. बल्कि ट्रंप की कोशिश है कि रिश्तों में जो दरार दिख रही थी, उसे पाटा जाए.

रिश्तों को बताया खास

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बीते शनिवार को ही न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए ट्रंप ने भारत-अमेरिका रिश्तों को 'बहुत खास' बताया था. उन्होंने कहा था कि वह हमेशा पीएम मोदी के दोस्त रहेंगे और वो महान प्रधानमंत्री है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें फिलहाल भारत की कुछ नीतियां पसंद नहीं आ रही हैं. यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका चाहता है कि भारत उसके हिसाब से चले. लेकिन भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और कूटनीति का असर यह है कि आज अमेरिका को भी भारत की शर्तों पर बातचीत करनी पड़ रही है. जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं की सराहना करते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है.

जल्द हो सकते हैं कुछ निर्णायक फैसले

सितंबर का महीना भारत-अमेरिका रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकता है. जानकारी के अनुसार 17-18 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा. इस दौरान 6 P8I पनडुब्बी रोधी विमान पर बातचीत होगी, जो भारत की सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा मुद्दा है. इसके अलावा दोनों देश 113 GE-404 विमान इंजन के सौदे पर हस्ताक्षर करेंगे. ये इंजन भारत के तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमानों को ताकत देंगे. यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाएगा. हालांकि, अमेरिका की ओर से भारत पर कुछ आलोचनात्मक बयान दिए जाते रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि रिश्तों की दिशा सकारात्मक है. ट्रंप और मोदी दोनों ही व्यक्तिगत स्तर पर रिश्तों को आगे बढ़ा रहे हैं. इसका मतलब साफ है कि व्यापारिक मतभेदों के बावजूद दोनों देशों की साझेदारी कायम रहेगी.

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बताते चलें कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, दुनिया में बढ़ती साख और आत्मनिर्भर नीति अब अमेरिका जैसे महाशक्ति को भी आकर्षित कर रही है. यह स्थिति बताती है कि 21वीं सदी की राजनीति में भारत की भूमिका अब और भी मजबूत होती जा रही है. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप भले ही कभी भारत पर दबाव डालने की कोशिश करते हैं और बाद में दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं.

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ऐसे में भारत-अमेरिका रिश्ते आगे कैसे बढ़ेंगे, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा. लेकिन इतना तय है कि भारत अब झुककर नहीं, बल्कि बराबरी के आधार पर हर महाशक्ति से बातचीत कर रहा है. और यही भारत की नई ताकत है, जिसे आज दुनिया मानने को मजबूर है.

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