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भारत पर ट्रंप का 50% टैरिफ आज से लागू... निर्यात में बड़ी गिरावट तय, जानिए कौन से उद्योग संकट में और कौन सुरक्षित

अमेरिका ने बुधवार से भारत से आने वाले माल पर 50% तक टैरिफ लागू कर दिया है. इससे परिधान, वस्त्र, रत्न-आभूषण, झींगा, कालीन और फर्नीचर जैसे उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं. GTRI का अनुमान है कि 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 43% घटकर 87 अरब डॉलर से 49.6 अरब डॉलर रह जाएगा. ट्रंप प्रशासन ने इसे दो चरणों में लागू किया है. जुलाई 2025 में 25% और 27 अगस्त 2025 से अतिरिक्त 25%.

Donald Trump/ Narendra Modi (File Photo)
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अमेरिका द्वारा भारत से आने वाले माल पर 50% तक का अतिरिक्त टैरिफ बुधवार से लागू कर दिया गया है. इस फैसले से भारत के श्रम प्रधान और कम मार्जिन वाले उद्योगों को बड़ा झटका लग सकता है. खासकर परिधान, वस्त्र, रत्न-आभूषण, झींगा, कालीन और फर्नीचर जैसे उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. ट्रेड थिंक-टैंक Global Trade Research Initiative (GTRI) के अनुसार, 2025-26 तक भारत का अमेरिका को माल निर्यात लगभग 43% घटकर 87 अरब डॉलर से 49.6 अरब डॉलर पर आ सकता है. इनमें से करीब दो-तिहाई निर्यात मूल्य पर सीधे 50% का शुल्क लगाया जाएगा.

ट्रंप प्रशासन की दोहरी चोट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत यह कदम उठाया है. जुलाई 2025 से ही भारत पर 25% टैरिफ लगाया जा चुका था. अब 27 अगस्त 2025 से अतिरिक्त 25% शुल्क लागू कर दिया गया है. यानी भारतीय उत्पादों पर कुल 50% तक का टैरिफ लग रहा है. इस कार्रवाई के पीछे भारत के रूस से तेल खरीदने और डिफेंस डील जारी रखने को बड़ी वजह माना जा रहा है.

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कौन-कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे

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इस नए टैरिफ से कई भारतीय उद्योगों के लिए अमेरिकी बाजार लगभग बंद होने जैसा हो गया है. इसमें कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. 

टेक्सटाइल और परिधान – भारत के परिधान निर्यात का लगभग 30% हिस्सा अमेरिका जाता है. 50% टैरिफ से भारत की प्रतिस्पर्धा बुरी तरह प्रभावित होगी और अमेरिकी बाजार में जगह बनाए रखना लगभग असंभव हो सकता है.

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  • रत्न और आभूषण – हर साल करीब 10 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका को होता है. नए टैरिफ से यह व्यापार गिरेगा और हजारों कारीगरों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी.
  • झींगा – भारत का 48% झींगा निर्यात केवल अमेरिका में होता है. 50% शुल्क के कारण अमेरिकी बाजार में इसकी कीमत दोगुनी हो जाएगी और मांग घटेगी.
  • होम टेक्सटाइल और कालीन – होम टेक्सटाइल का लगभग 60% और कालीन का 50% निर्यात अमेरिका को जाता है. अब इनकी बिक्री में भी तेज गिरावट का अंदेशा है.
  • फर्नीचर, चमड़ा और हैंडीक्राफ्ट्स – ये सभी सेक्टर उच्च टैरिफ से अमेरिकी बाजार से बाहर होने की कगार पर पहुंच सकते हैं.

कौन से सेक्टर बचेंगे

भारत का लगभग 30% निर्यात अभी टैरिफ से मुक्त है. इनमें फार्मास्यूटिकल्स (करीब 12.7 अरब डॉलर), इलेक्ट्रॉनिक्स (10.6 अरब डॉलर) और रिफाइंड पेट्रोलियम (4.1 अरब डॉलर) शामिल हैं. इन क्षेत्रों में भारत की स्थिति फिलहाल सुरक्षित है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन अमेरिका में नहीं हुआ तो भविष्य में इन पर भी 200% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है.

नौकरियों पर संकट

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GTRI का अनुमान है कि प्रभावित सेक्टरों का निर्यात घटकर 70% तक कम हो सकता है और यह केवल 18.6 अरब डॉलर पर आकर रुक जाएगा. इसका सीधा असर लाखों निम्न और अर्ध कुशल श्रमिकों पर पड़ेगा. खासतौर पर टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर में नौकरी जाने का खतरा है. इन उद्योगों ने सरकार से कोविड काल जैसी राहत की मांग की है, जिसमें कैश सपोर्ट और लोन मोरेटोरियम शामिल था.

भारत की जगह कौन लेगा

अमेरिकी बाजार में अब भारत की जगह वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान और चीन जैसे देश फायदा उठा सकते हैं. इन देशों के उत्पादों पर कम शुल्क लग रहा है. ऐसे में अमेरिकी खरीदारों का रुख इन देशों की ओर मुड़ना तय है.

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अमेरिका पर भी असर

इन सबके बीच सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह टैरिफ सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि अमेरिका को भी चोट पहुंचा सकता है. नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन और कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका में महंगाई और बढ़ेगी. कपड़े, गहने और झींगा जैसी रोजमर्रा की चीजें अमेरिकी उपभोक्ताओं को ज्यादा दाम पर मिलेंगी. इसका असर वहां की अर्थव्यवस्था और चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है.

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बताते चलें कि अमेरिका का यह फैसला भारत के लिए आर्थिक झटका है. भारत को अब निर्यात बाजार में विविधता लाने और नए व्यापार साझेदार खोजने की जरूरत होगी. साथ ही प्रभावित उद्योगों के लिए तुरंत राहत पैकेज जरूरी है, ताकि लाखों नौकरियों को बचाया जा सके. यह संकट भारत और अमेरिका दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

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