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देश छोड़कर भागे हजारों चीनी नागरिक... अफ्रीकी देश अंगोला में बेकाबू हुआ ड्रैगन विरोधी प्रदर्शन, जानें पूरा मामला

अफ्रीकी देश अंगोला में ईंधन बढ़ोतरी के खिलाफ टैक्सी चालकों का विरोध अब हिंसक रूप ले चुका है और चीन विरोधी अशांति में बदल गया है. इस दौरान 90 से अधिक दुकानों को नुकसान हुआ, कई फैक्ट्रियां बंद हुईं, 5 लोगों की मौत और 1,200 से अधिक गिरफ्तार हुए. डर के कारण हजारों चीनी नागरिक देश छोड़ गए और चीनी दूतावास ने आपातकालीन चेतावनी जारी की.

Protest: File Photo
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अफ्रीकी देश अंगोला में ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर स्थानीय टैक्सी चालकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया. शुरुआत में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन जल्दी ही हिंसक रूप ले लिया. अब चीन विरोधी अशांति में बदल गया है. देश की राजनीतिक और आर्थिक नींव पर इसका गहरा असर पड़ा.

हिंसा और लूटपाट की बढ़ रही घटनाएं

‘डेली मॉनिटर’ के अनुसार, हिंसा के दौरान 90 से अधिक खुदरा दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया और कई चीनी संचालित फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा. कम से कम 5 लोगों की मौत हुई और 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. हजारों चीनी नागरिक डर के कारण देश छोड़ने को मजबूर हुए, जिससे उड़ानों में भारी भीड़ देखी गई और चीनी दूतावासों ने आपातकालीन चेतावनी जारी की. विशेषज्ञों का मानना है कि यह विरोध केवल ईंधन की बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं है. यह चीन की अंगोला में बढ़ती भूमिका और देश में बढ़ती सामाजिक असमानता के खिलाफ गहरी नाराजगी का भी संकेत है. चीनी निवेश ने बुनियादी ढांचे, खुदरा व्यापार और विनिर्माण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं.

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चीनी दुकानों और फैक्ट्रियों पर हमला

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अंगोला वाणिज्य संघ ईकोडिमा के अनुसार, सात प्रमुख चीनी खुदरा दुकानें लूटी गईं और एक चीनी ब्रांड की 72 बिक्री इकाइयों पर हमला हुआ. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुकानदारों को दुकानों के अंदर खुद को बंद करते देखा गया, जबकि बाहर कीड़ोड़ और तोड़फोड़ जारी थी. औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित चीनी कारखानों को तत्काल बंद कर दिया गया और कर्मचारियों को भागना पड़ा. राष्ट्रपति जोआओ लोरेन्सो की सरकार इस संकट को नियंत्रित करने में कठिनाई झेल रही है. हिंसा की निंदा करने के बावजूद सरकार की ईंधन नीति और आम जनता की तकलीफों के प्रति उदासीनता की आलोचना हो रही है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार की नाकामी सस्ती परिवहन व्यवस्था और मूलभूत सेवाएं उपलब्ध कराने में इस व्यापक असंतोष का प्रमुख कारण है.

चीन का निवेश और रणनीति

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चीन अब अफ्रीकी देश अंगोला पर अपनी नजरें गड़ा रहा है. इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि निवेश करो, जमीन हासिल करो और अनाज उगाकर अमेरिका और ब्राजील पर अपनी खाने-पीने की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करो. हाल ही में चीन की दो सरकारी कंपनियों ने अंगोला में लगभग 2,900 करोड़ रुपये (350 मिलियन डॉलर) का निवेश करने का करार किया है. इसके तहत हजारों हेक्टेयर जमीन पर सोयाबीन, मक्का और अन्य अनाज की खेती की जाएगी. चीन पिछले कुछ वर्षों में तंजानिया, इथियोपिया और बेनिन जैसे देशों में भी सोयाबीन परियोजनाओं में निवेश कर चुका है, जिससे उसकी वैश्विक खाद्य सुरक्षा रणनीति और मजबूत हो रही है. 

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हिंसा स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर गहरा असर डाल रही है. टैक्सी चालक और छोटे व्यवसायी पहले ही आर्थिक दबाव में थे और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने उनकी स्थिति और कठिन बना दी. अब यह विरोध धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर चीन विरोधी आंदोलन का रूप ले रहा है, जिससे देश में सामाजिक तनाव बढ़ गया है. स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं, लेकिन हिंसा और लूटपाट ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इस अशांति का समाधान केवल सुरक्षा उपायों से नहीं होगा, बल्कि चीन और स्थानीय व्यवसायों के बीच संतुलन और न्यायपूर्ण नीति से ही हो सकता है.

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बताते चलें कि अंगोला में शुरू हुआ ईंधन विरोध अब बड़े सामाजिक और राजनीतिक संकट में बदल गया है. हिंसा, लूटपाट और चीन विरोधी आंदोलन ने देश में तनाव बढ़ा दिया है और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले समय में यह आवश्यक होगा कि सरकार और स्थानीय समुदाय मिलकर स्थिरता और शांति बहाल करें, ताकि देश की आर्थिक और सामाजिक नींव मजबूत बनी रहे.

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