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रूस-यूक्रेन के बीच नहीं होगा युद्धविराम, इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता में नहीं बनी बात

रूस और यूक्रेन के बीच बीते तीन साल से जंग चल रही है. इस बीच पहली बार अमेरिका के दबाव के बाद रूस और यूक्रेन के शांति वार्ता के लिए आमने-सामने बैठे. इस दौरान 1000-1000 युद्धबंदियों पर सहमति तो बनी लेकिन सीजफायर को लेकर इस वार्ता में कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद तुर्की के इस्तांबुल में पहली बार 3 साल से युद्ध लड़ रहे रूस और यूक्रेन शांति वार्ता के लिए आमने-सामने बैठे. दोनों देशों के बीच जंग रोकने को लेकर हुई शांति वार्ता 2 घंटे से भी कम समय में खत्म हो है. इस शांति वार्ता के मध्यस्थ तुर्की के अधिकारियों ने  की. इस बैठक में 1000-1000 युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति तो बनी लेकिन सीजफायर की दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका. 

तुर्की के इस्तांबुल में हुई इस शांति वार्ता में यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव ने किया, जबकि रूस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी व्लादिमीर मेंडिस्की ने किया. बता दें रूस और यूक्रेन के बीच जंग साल 2022 के फरवरी महीने से चल रही है, बीते 3 सालों में यह पहला मौका है जब दोनों देश के बीच शांति को लेकर सीधी बातचीत हुई है. लेकिन इस संघर्ष को रोकने के लिए आवश्यक मूलभूत शर्तों पर रूस और यूक्रेन के बीच अभी भी असहमति बनी हुई है. 

यूक्रेन की मांग?

शांति वार्ता को लेकर यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हियोरही टिखी ने कहा "हमने अब तक रूस की ओर सीजफायर के बुनियादी मुद्दे पर हां नहीं सुनी है, अगर आप युद्धविराम को लेकर गंभीर बातचीत करना चाहते हैं तो सबसे पहले हथियारों को खामोश करना होगा."

रूस की प्रतिक्रिया भी आई सामने 

वहीं दूसरी तरफ रूस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले राष्ट्रपति पुतिन के करीबी व्लामिदिर मेंडिस्की आशावादी रुक अपनाते हुए कहा "हम बातचीत के परिणाम से संतुष्ट हैं और आगे भी संवाद जारी रखने के लिए तैयार हैं." इसके साथ ही उन्होंने कीव के साथ युद्धविराम के प्रस्तावों का आधार प्रदान करने की सहमति व्यक्त की है. 

वार्ता में पुतिन क्यों नहीं हुए शामिल?

युद्धविराम को लेकर कोई शांति वार्ता में पहले पुरुष के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के शामिल होने की संभावनाएं थीं, लेकिन शुक्रवार को हुई इस वार्ता में दोनों देशों के शीर्ष नेता शामिल नहीं हुए. इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "मुझे नहीं लगता कि जब तक पुतिन और मैं एक साथ नहीं आते, तब तक कुछ भी होने वाला है, चाहे आप इसे पसंद करें या नहीं लेकिन हमें इसे हल करना होगा क्योंकि बहुत सारे लोग मर रहे हैं."

अपनी जमीन के लिए अड़े जेलेंस्की

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पहले ही इस बात को साफ कर दिया है कि यूक्रेन कभी भी उन इलाकों को रूस का हिस्सा नहीं मानेगा. जहां वर्तमान में रूस ने अपना कब्जा कर रखा है. शांति वार्ता आगे जरुर बढ़ेगी लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन से कोई भी समझौता नहीं करेगा. वहीं दूसरी तरफ रूस भी बार-बार यह मांग करता रहा है कि यूक्रेन के चार इलाके और क्रीमिया को रूस का हिस्सा माना जाए. क्रीमिया पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था और इसके बाद अब डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यूक्रेन अब अपने पुराने इलाकों को कभी भी वापस नहीं पा सकता है.
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