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खत्म हुई थाईलैंड और कंबोडिया की जंग, बिना किसी शर्त के 5 दिनों बाद सीजफायर पर बनी सहमति, इस मुस्लिम देश के नेता ने निभाई मध्यस्थता की भूमिका

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने सोशल मीडिया के जरिए सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि 'प्राचीन शिव मंदिर को लेकर युद्ध के मैदान में कूदे थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बिना किसी शर्त के संघर्ष विराम पर सहमति बन गई है.'

खत्म हुई थाईलैंड और कंबोडिया की जंग, बिना किसी शर्त के 5 दिनों बाद सीजफायर पर बनी सहमति, इस मुस्लिम देश के नेता ने निभाई मध्यस्थता की भूमिका
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पिछले 5 दिनों से थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक प्राचीन शिव मंदिर को लेकर चल रही जंग पर विराम लग गया है. मलेशिया के राष्ट्रपति ने मध्यस्थता की भूमिका निभाकर दोनों देशों को शांति स्थापित करने पर मना लिया है. इस बात की जानकारी उन्होंने खुद दी है. दोनों देशों की तरफ से इस जंग में कुल 36 लोगों की मौत हुई हैं. वहीं सैकड़ो लोग घायल हो गए हैं और ढाई लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. 

खत्म हुई थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रही जंग 

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने सोशल मीडिया के जरिए सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि 'प्राचीन शिव मंदिर को लेकर युद्ध के मैदान में कूदे थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बिना किसी शर्त के संघर्ष विराम पर सहमति बन गई है.' इस समझौते पर अनवर ने आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) क्षेत्रीय समूह के प्रमुख के रूप में वार्ता की अध्यक्षता की. मलेशिया के प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 'दोनों ही पक्षों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को लेकर आम सहमति बन गई है.'

अमेरिका ने दी थी धमकी 

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इससे पहले दोनों ही देशों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा था कि अगर इसी तरह से संघर्ष जारी रहा, तो अमेरिका किसी भी देश के साथ व्यापार समझौते पर आगे नहीं बढ़ेगा. यह भी एक बड़ी वजह रही कि दोनों देशों ने बिना किसी शर्त के आपसी सहमति से संघर्ष विराम के लिए राजी हो गए.

'28 जुलाई की मध्यरात्रि हुई संघर्ष विराम की घोषणा'

मलेशिया के प्रधानमंत्री ने एक संयुक्त बयान में बताया कि 'कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट और थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुनथाम वेचायाचाई 28 जुलाई की मध्यरात्रि से तत्काल और बिना किसी शर्त संघर्ष-विराम पर सहमत हो गए हैं. यह तनाव कम करने और शांति एवं सुरक्षा की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.'

'दोनों देशों की सेना और अधिकारी करेंगे बैठक'

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हुए संघर्ष विराम पर दोनों ही पक्षों के सेना और अधिकारी भी बैठकें करेंगे. मलेशिया के प्रधानमंत्री ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि 'मलेशिया, कंबोडिया और थाईलैंड के विदेश और रक्षा मंत्रियों को निरंतर शांति सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष विराम को लागू करने व उसे निगरानी करने के लिए एक विस्तृत तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया गया है.' वहीं मलेशिया में चीनी और अमेरिकी राजदूतों ने 2 घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में भाग लिया.

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'द्विपक्षीय संबंध जल्द ही सामान्य होंगे' 

दोनों ही देशों ने बैठक के बाद आए नतीजों की सराहना करते हुए एक-दूसरे से हाथ मिलाया. इस खास मौके पर हुन मानेट ने कहा कि 'उन्हें उम्मीद है कि द्विपक्षीय संबंध जल्द ही सामान्य होंगे, ताकि दोनों तरफ से विस्थापित हुए लगभग 3 लाख ग्रामीण घर लौट सकें.' इसके अलावा उन्होंने कहा कि 'अब थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विश्वास और सहयोग का पुनर्निर्माण शुरू करने का समय आ गया है.' वहीं फुनथाम ने कहा कि 'यह परिणाम शांतिपूर्ण समाधान के लिए थाईलैंड की इच्छा को दर्शाता है.'

5 दिनों तक चली यह जंग

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आपको बता दें कि बृहस्पतिवार को सीमा पर एक बारूदी सुरंग विस्फोट में 5 थाई सैनिकों के घायल होने के बाद सीमा पर संघर्ष शुरू हो गया था. इसके बाद दोनों देशों ने झड़प शुरू करने के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया, 5 दिन तक चली इस जंग में कुल 35 लोग मारे गए. इसके अलावा दोनों पक्षों के 2,60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए. इस दौरान दोनों ही देश की तरफ से हालात बिगड़ते जा रहे थे, दोनों ने अपने राजदूतों को वापस बुला लिया और थाईलैंड ने कंबोडिया के साथ सभी सीमा चौकियां भी बंद कर दी थी. हालांकि, सीजफायर की घोषणा के बाद उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच फिर से आपसी व्यवहार और रिश्ते सामान्य होंगे. 

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