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6,314 दिन बाद देश लौटे बांग्लादेश के ‘भावी’ प्रधानमंत्री कहे जाने वाले तारिक रहमान, रहा है भारत विरोधी स्टैंड

Tarique Rahman Bangladesh Arrival: बांग्लादेश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किए जा रहे बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान वतन लौट चुके हैं। उनकी वापसी पर भारत की भी पैनी नजर है। तारिक का एंटी इंडिया स्टैंड रहा है। उन्होंने हाल के दिनों में दिल्ली–इस्लामाबाद के साथ रिश्तों पर बड़ा बयान दिया था।

Image: Tarique Rahman Bangladesh Arrival / Meta
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बांग्लादेश के भावी प्रधानमंत्री कहे जाने वाले बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के लंबे अरसे बाद अपने देश बांग्लादेश पहुंच गए हैं. उनका विमान ढाका एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. यहां उनकी पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों समेत बीएनपी के सीनियर नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया. इससे पहले तारिक रहमान को लेकर बांग्लादेश एयरलाइंस की एक फ्लाइट गुरुवार सुबह सिलहट उस्मानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई.

तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं. तारिक के साथ उनकी पत्नी जुबैदा रहमान, बेटी बैरिस्टर जाइमा रहमान और दूसरे निजी सहयोगी भी बांग्लादेश आए हैं. बता दें, तारिक की वापसी ऐसे समय में हो रही है, जब पूर्व पीएम खालिदा जिया और उनकी मां लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं. खालिदा जिया खराब स्वास्थ्य स्थिति की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं.

अपने घर के लिए रवाना हुईं तारिक रहमान की पत्नी और बेटी

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बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान, उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी बैरिस्टर जाइमा रहमान की वतन वापसी हो चुकी है. तारिक जहां एयरपोर्ट पर लैंड करते ही रैली के लिए निकले थे, वहीं पत्नी और बेटी अपने घर के लिए रवाना हो गईं. सूत्रों के मुताबिक दोनों ढाका के गुलशन इलाके में मकान नंबर-196 स्थित अपने आवास पर पहुंच गई हैं.

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'मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और हिंदू...हमें मिलकर नया बांग्लादेश बनाना होगा...',

वहीं अपनी वतन वापसी के बाद एक रैली में तारिक रहमान ने कहा कि यह वही धरती है, जिसे 1971 में भारी बलिदानों के बाद आजादी मिली थी. रहमान ने कहा कि इसी तरह का एक आंदोलन 2024 में भी देखने को मिला, जब 5 अगस्त को लोगों ने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए खड़े होकर संघर्ष किया. उन्होंने कहा, 'आज वक्त है कि हम सब एकजुट हों. मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और हिंदू, सभी मिलकर यहां रहते हैं. हमें मिलकर एक नया बांग्लादेश बनाना है.'

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2007 में तारिक रहमान को किया गया था गिरफ्तार!

तारिक रहमान को 2007 में राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान गिरफ्तार किया गया था. 2008 में जेल से रिहा होने के बाद वह अपने परिवार के साथ इलाज के लिए ब्रिटेन चले गए थे और तब से वहीं रह रहे थे. पिछले साल 5 अगस्त को लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई अवामी लीग की सरकार के गिरने के दौरान देश में भारी हिंसा देखने को मिली. हिंसक विद्रोह के बाद अलग-अलग मामलों में तारिक रहमान को सजा देने वाले कोर्ट के कई फैसलों को पलट दिया गया था.

कुछ दूसरे मामलों में उन्हें कानूनी कार्रवाई के जरिए बरी कर दिया गया था. मां खालिदा जिया के स्वास्थ्य खराब होने के बाद से तारिक रहमान की वापसी की चर्चा ने जोर पकड़ लिया था. तारिक ने भी बांग्लादेश चुनाव में अपनी वापसी का ऐलान किया था.

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चुनाव में नहीं कोई BNP का प्रतिद्वंद्वी

आपको बता दें कि बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में बीएनपी की जीत तय मानी जा रही है. ऐसा इसलिए कि उनकी पार्टी पूर्व पीएम की सत्ता से बेदखली के बाद अकेले मैदान में रह गई है. बांग्लादेश में वैसे तो कई दल हैं, लेकिन पूरी राजनीति दो पार्टियों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है. वहीं, शेख हसीना की सत्ता के तख्तापलट के बाद उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगातार हमले हो रहे हैं. और तो और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने अवामी लीग को फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों में आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया है. यानी कि मैदान पूरी तरह खाली है. निर्दलीय उम्मीदवारों, जमात-ए-इस्लामी के अलावा ऐसी और कोई सियासी ताकत नहीं है जो जीत भी सके. ऐसे में अगर तारिक रहमान बतौर बीएनपी अध्यक्ष देश की बागडोर संभालते हैं तो इसे अतिशयोक्ति नहीं कहा जाना चाहिए.

कैसा रहा है BNP का भारत को लेकर स्टैंड?

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बांग्लादेश में दो पार्टियों का प्रभुत्व रहा है. एक शेख हसीना की अवामी लीग, दूसरी खालिदा जिया की बीएनपी. जहां हसीना का स्टैंड भारत को लेकर दोस्ताना रहा, दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती रही है. वहीं खालिदा के दौर में पाकिस्तान के साथ रिश्ते परवान चढ़ते रहे और दिल्ली के साथ टकराव पैदा हुए. हालांकि निर्वासन में जीवन व्यतीत कर रहे तारिक रहमान ने हालिया वर्षों में भारत के खिलाफ न्यूट्रल स्टैंड रखा है और बयानबाजी से दूरी बनाए रखी है.

‘न दिल्ली, न पिंडी…’

उन्होंने इस दौरान ‘न दिल्ली, न पिंडी, कोई और देश नहीं, बांग्लादेश सबसे पहले’ की नीति, यानी कि विदेश नीति की भाषा में बैलेंस्ड स्टैंड की बात की है. रहमान वादा तो कर रहे हैं कि वे दिल्ली और इस्लामाबाद, यानी कि भारत–पाकिस्तान से परस्पर दूरी और एक जैसा व्यवहार रखेंगे, हालांकि यह कितना सफल होगा, यह देखने वाली बात होगी.

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भारत से दूरी पड़ेगी भारी?

तारिक रहमान ने भारत–पाकिस्तान से परस्पर दूरी की बात की है. हालांकि ऐसा होता हुआ दिखता नहीं है. रहमान लंबे समय बाद देश लौटे हैं. अभी उन्हें अपनी पार्टी में अपनी साख बनानी है, कंट्रोल बढ़ाना है और अपनी नीति स्पष्ट करनी है. विदेश नीति में जैसा कहा जाता है, वैसा दिखता नहीं है. जब भारत–पाक के रिश्ते एक जैसे नहीं हैं, दोनों देशों के बीच चाहे सीमा, सेना, इकोनॉमी की बात हो, हर चीज अलग है, फिर नीति भी वैसी ही बनानी होगी. अगर रहमान भारत की चिंताओं पर ध्यान नहीं देंगे तो आने वाले समय में उनकी राह कठिन होगी.

भारत विरोधी रहा है तारिक रहमान का स्टैंड!

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विदेश नीति के जानकार मानते हैं कि बीएनपी के भीतर मौजूद भारत-विरोधी रुख रखने वाले नेता और पार्टी के दिल्ली के खिलाफ स्टैंड की इतनी आसानी से तिलांजलि नहीं दी जा सकती है. इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि तीस्ता जल संधि पर तारिक का नजरिया भारत के खिलाफ रहा है. वहीं घुसपैठ को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनातनी देखने को मिलती रही है. तारिक पहले भारत की विदेश नीति की मुखर आलोचना करते रहे हैं. अब भारत के लिए यह देखना अहम होगा कि सत्ता में आने के बाद, जब सरकार की चुनौतियां और वास्तविकताएं अलग होती हैं, तो फिर वे क्या स्टैंड लेते हैं. देखना होगा कि वे सहयोग की नीति अपनाते हैं या फिर कट्टरपंथियों के आगे झुक जाते हैं.

बाहर आया ग्रेटर बांग्लादेश का नया जिन्न!

इसके अलावा बांग्लादेश में एक और नया जिन्न बाहर आया है-ग्रेटर बांग्लादेश का. यानी कि बांग्लादेश में कुछ ऐसे तबके और तत्व पनप रहे हैं, जिन्हें परवान चढ़ाया जा रहा है, जो ग्रेटर बांग्लादेश का कभी न पूरा होने वाला ख्वाब देख रहे हैं. उनका सपना है कि भारत के ‘चिकन नेक’, यानी कि सेवन सिस्टर स्टेट्स को तोड़ना और पूर्वोत्तर में उथल-पुथल पैदा करना. ऐसे में तारिक के लिए ऐसे लोगों और जिन्न को डिब्बे में बंद करना आसान नहीं होगा. ऐसा पाकिस्तान और आईएसआई के एजेंडे के तहत किया जा रहा है.

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कब होंगे बांग्लादेश में चुनाव!

बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने बीते दिनों चुनावी तारीख का ऐलान किया है. चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक संसदीय चुनाव के लिए नामांकन 29 दिसंबर तक दाखिल किए जाएंगे. 30 दिसंबर से 4 जनवरी 2026 तक नामांकन की स्क्रूटनी होगी.

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20 जनवरी नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है. वहीं, 21 जनवरी को चुनाव चिन्ह आवंटन और अंतिम उम्मीदवार सूची जारी होगी. 22 जनवरी से 10 फरवरी सुबह 7:30 बजे तक चुनाव प्रचार की अनुमति होगी. बांग्लादेश में संसदीय चुनाव अगले साल 12 फरवरी को होगा.

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