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मोदी के साथ खड़ा हुआ तालिबान, बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान; भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी नहीं देगा काबुल नदी का पानी

भारत के बाद अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार भी अपने नदियों और नहरों का पानी पाकिस्तान के अलावा अन्य पड़ोसी देशों को न देने की तैयारी में है. इसके लिए कई बांध बनाए जा रहे हैं.

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आर्थिक रूप से कंगाल हो चुके पाकिस्तान को अब अफगानिस्तान भी बड़ा झटका देने जा रहा है. जिस तरीके से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के शरणार्थियों पर जुल्म ढाए थे और उन्हें अपने देश से बाहर का रास्ता दिखाया था. अब ठीक वैसा ही अफगानिस्तान भी पाकिस्तान के साथ करने जा रहा है. यहां उसने भारत की तरह ही पाकिस्तान को पानी बिना तड़पाने का प्लान कर लिया है. अफगानिस्तान में तालिबान शासको ने कहा है कि वह अपने नदियों और नहरों का पानी किसी भी पड़ोसी मुल्क को नहीं देंगे. इसके लिए उन्होंने बड़ा प्लान तैयार किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान साल 2021 से बड़े पैमाने पर नहरों और बांधों के निर्माण की शुरुआत कर दी है. तालिबान के इस फैसले से पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है. 

अफगानिस्तान पाकिस्तान को बूंद-बूंद के लिए तरसाएगा

पाकिस्तान और ईरान ने मिलकर पिछले दो सालों के अंदर लाखों अफगानी शरणार्थियों को अपने देश से बाहर किया है, इसके बाद अफगानिस्तान के तालिबान शासको ने भी सबक सिखाने का बड़ा फैसला लिया है. खबरों के मुताबिक, अफगानिस्तान अपने देश की नदियों और नहरों का पानी पड़ोसी देशों में जाने से रोकने का प्लान तैयार कर रही है. इस फैसले से पाकिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान की नींद उड़ी हुई है. तालिबान सरकार साल 2021 में सत्ता में आने के बाद काफी बड़े पैमाने पर नहरों और बांधों का निर्माण करवा रही है. इस फैसले से कई पड़ोसी देशों, ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. 

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तालिबान का दावा

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पड़ोसी देशों को पानी सप्लाई रोकने पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि वह अपनी नदियों और नहरों का पानी खुद की खेती और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल करेंगे. तालिबान का कहना है कि इन नदियों का पानी सुरक्षित रखना उसकी संप्रभुता का हिस्सा है.

पूरब की तरफ से काबुल नदी सिंधु में मिलती है

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बता दें कि अफगानिस्तान के काबुल शहर से निकलकर काबुल नदी पाकिस्तान में जाकर सिंधु नदी में मिलती है. हालांकि, दोनों देशों के बीच इस पर किसी तरह की कोई संधि नहीं है, लेकिन जिस तरीके से तालिबान अपने नए प्रोजेक्ट को लगातार आगे बढ़ा रहा है. उससे दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ सकते हैं. पाकिस्तान इस वक्त पानी की कमी से जूझ रहा है. वहां पर कृषि और सिंचाई व्यवस्था पूरी तरीके से जर्जर हो चुकी है. भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पहले से ही सिंधु नदी के पानी पर रोक लगा रखी है. ऐसे में पाकिस्तान अब दो पड़ोसी मुल्कों के बीच में पूरी तरीके से फंस चुका है. एक तरफ से तालिबान पानी रोक रहा, तो दूसरी तरफ से भारत. वहीं भारत-चीन और तालिबान के रिश्ते काफी तेजी से सुधर रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान को पानी देने के लिए तालिबान कोई बड़ा समझौता कर सकता है.

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